Old Testament
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यिर्मयाह 31:20 पर टिप्पणी — एप्रैम के लिए दयात्मक स्मरण
इस पद में ईश्वर अपने इस्रायेल के उत्तराधिकार, एप्रैम के बारे में व्यक्तिगत प्रेम और दया की गहराई को प्रकट करते हैं। यिर्मयाह के समय में यहूदा-उत्पत्ति के उत्तराधिकार से जुड़ा का एक प्रलोभन था कि उत्तराधिकारी कैसे व्यवहार करें और परमेश्वर के साथ उनका रिश्ता कैसे बना रहे। यहाँ न सिर्फ चेतावनी है, बल्कि माता-पिता की तरह ईश्वर की गहरी दया और स्मरण शक्ति का संकेत भी है, जो गिरते हुए पुत्रों के लिए भरोसा बनाती है।
पद का पाठ और संदर्भ
यिर्मयाह 31:20 में परमेश्वर येरूशलोंम के बहन-एप्रैम के प्रति अपनी प्रियता को दोहराते हैं: “क्या एप्रैम मेरा प्रिय पुत्र नहीं है? क्या वह मेरा दुलारा लड़का नहीं है? … इसलिए मेरा मन उसके कारण भर आता है; और मैं निश्चय उस पर दया करूँगा।” यह वाक्यांक यिर्मयाह के संदेशों के बीच परमेश्वर की करुणा का स्थूल चित्र प्रस्तुत करता है—यद्यपि एप्रैम ने प्रायः असफलताएं कीं, पर परमेश्वर का विश्वास उनसे कम नहीं हुआ।
मुख्य आध्यात्मिक पाठ
- परमेश्वर का प्रेम अस्थाई नहीं है; वह अपने बच्चों को याद रखता है और उनके प्रति करुणा दिखाने के लिए तैयार रहता है। यह संकेत देता है कि गिरते हुए राज्य में भी परमेश्वर का दिल आशा से भरा रहता है।
- परमेश्वर की स्मरण शक्ति न्याय के साथ जुड़ी है; वह अपने बच्चों के लिए समय-समय पर दया के शब्द जारी करते हैं ताकि वे लौट आएँ।
अनुवादित टिप्पणी — प्रसिद्ध विचारों का संकलन
एंथनी, हर्नी, और क्लार्क से मिलते-जुलते निष्कर्षों को समाहित करते हुए एक संयुक्त धारणा निकलती है: परमेश्वर अपने लोग लौटने पर मुख्य उद्देश्य है—उन्हें सच्चे प्रेम और दया के साथ पुनः जोड़े रखना। यह महज एक भावनात्मक उक्ति नहीं, बल्कि नीति-परक प्रेम का प्रकटण है जिसमें पाप के बावजूद भी आशा और परिवर्तन के लिए मार्ग खुला रहता है।
क्रॉस-रेफरेंसेस (सं.wikified संदर्भ) और उनके संक्षिप्त विचार
जीवन-आवेदन
संक्षिप्त सार
यिर्मयाह 31:20 हमें सीख देता है कि परमेश्वर के दिल में अपने बच्चों के लिए प्रेम और दया की सदा-उपस्थित स्मृति है। गिरावट के बावजूद भी वह पुनःrestore करने का इरादा रखते हैं। एप्रैम का यह उद्धरण यह स्मृत करता है कि परमेश्वर की दया स्थिर है, और लौट आना ही उसकी इच्छा है।
यह पाठ उन अवसरों को याद दिलाता है जब परमेश्वर दिव्य हृदय से बोलते हैं: “मैं निश्चय उस पर दया करूँगा।” यह वाक्यांश भरोसा देता है कि परमेश्वर के प्रेम में स्थायित्व है और उद्धार के मार्ग खुला रहता है।
संदर्भ-उद्धरण नोट: Matthew Henry, Albert Barnes और Adam Clarke के उपलब्ध शाब्दिक ब्योरे का संक्षिप्त उपयोग यहाँ निर्भर है। यदि किसी उक्ति का उल्लेख किया गया हो, तो इसे पाठ के भीतर संकुचित रूप में ही लिया गया है।