Old Testament
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यिर्मयाह 1 यिर्मयाह 2 यिर्मयाह 3 यिर्मयाह 4 यिर्मयाह 5 यिर्मयाह 6 यिर्मयाह 7 यिर्मयाह 8 यिर्मयाह 9 यिर्मयाह 10 यिर्मयाह 11 यिर्मयाह 12 यिर्मयाह 13 यिर्मयाह 14 यिर्मयाह 15 यिर्मयाह 16 यिर्मयाह 17 यिर्मयाह 18 यिर्मयाह 19 यिर्मयाह 20 यिर्मयाह 21 यिर्मयाह 22 यिर्मयाह 23 यिर्मयाह 24 यिर्मयाह 25 यिर्मयाह 26 यिर्मयाह 27 यिर्मयाह 28 यिर्मयाह 29 यिर्मयाह 30 यिर्मयाह 31 यिर्मयाह 32 यिर्मयाह 33 यिर्मयाह 34 यिर्मयाह 35 यिर्मयाह 36 यिर्मयाह 37 यिर्मयाह 38 यिर्मयाह 39 यिर्मयाह 40 यिर्मयाह 41 यिर्मयाह 42 यिर्मयाह 43 यिर्मयाह 44 यिर्मयाह 45 यिर्मयाह 46 यिर्मयाह 47 यिर्मयाह 48 यिर्मयाह 49 यिर्मयाह 50 यिर्मयाह 51 यिर्मयाह 52Verse
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यिर्मयाह 31:21 पर व्याख्या (HINIRV)
इस पद में यहूदियों के लिए आशा और स्मरण का संदेश है। यिर्मयाह के समय हालात कठिन थे, परन्तु परमेश्वर के उद्धार के नये दिन की शुरुआत वहां से भी संभव है जहाँ उद्ग्राही स्मरण-चिन्ह और मार्गदर्शक चिह्न प्रस्तुत किए जाते हैं। इस वचन से सीख मिलती है कि ईश्वर अपने लोगों को पहचानते हैं, उनकी राह सूचित करते हैं, और पुनः बुला कर अपने ध्यान में बसाते हैं।
सूत्रार्थ और अध्याय के परिप्रेक्ष्य
यिर्मयाह 31 अध्याय भविष्य की पुनःस्थापना की आशा से भरा है।Verse 21 में द् explicitly कहा गया है कि इस्राएली कुमारी को उसके मार्ग के निशानों के साथ पहचाना जाए; वही मार्ग, जिस मार्ग से वे चले थे, उसी मार्ग पर पलट कर उसकी निश्चयता और निर्णय का संकेत किया गया है। यह एक आह्वान है: अपने ठहराव के स्थान पर लौट आओ, अपने रास्ते पहचानो और सत्यता के साथ लौटो।
मुख्य आध्यात्मिक पाठ
इस-वचन की केंद्रीय शिक्षा है—परिवर्तन और आत्म-आश्वासन: परमेश्वर उन के साथ है, वे अपने इतिहास के सच को याद रखें, और उसी मार्ग पर लौटें जिसे उसने दिया है। कुमारी रूपक के जरिए यह दिखाने की कोशिश है कि उनकी पहचान और सुरक्षा परमेश्वर के संरक्षण से जुड़ी है; उन्हें अपनी राहों में स्थिरता और नियति के अनुसार चलने की प्रेरणा दी गयी है।
कौन से प्रतिमान मिलते हैं? तुलनात्मक पाठ
- दाऊद की वापसी की स्मृति और पथ के संकेत: पुराने दायित्वों को याद करके नयी आज़ादी की ओर मन लगाएं।
- अन्य.prophetic संकेत: बंधनों से मुक्ति और नई ירושלים का आह्वान—जहां लोग अपने मार्ग पहचानें और चौकन्ने रहें।
पठन-प्रयोग
क्रॉस-रेफरेंसेज़ (संक्षेप में)
- यिर्मयाह 29:11–13: परमेश्वर की योजनाओं की आशा और फिर लौटने पर उनके राजा के साथ जुड़ना। - इब्रानी 10:22: पवित्रता से approach करने का आह्वान और आत्म-विश्वास। - यूहन्ना 14:6: एक मार्ग, एक सत्य, एक जीवन—यही मार्ग है जिससे लौटना संभव है।
इन संदर्भों का तात्पर्य है कि परमेश्वर अपने लोगों को स्मरण-चिन्हों के साथ लौटने का मार्ग दिखाते हैं और उनकी राह बिल्कुल स्पष्ट होती है, ताकि पुनः नयी आशा प्राप्त हो सके।
सावधानीपूर्वक अनुप्रयोग
- आत्म-नक़्शा: अपने जीवन के मार्ग को पहचानो और जहाँ भी भ्रम हो, परमेश्वर के शब्दों से मार्गदर्शन मांगो।
- समुदायिक स्थिरता: समाज और परिवार के बीच विश्वास के मार्ग पर टिकना और एक दूसरे के लिए प्रेरणा बनना।
सारांश
यिर्मयाह 31:21 में हमें स्मरण-चिन्हों के साथ लौटने का आह्वान है—जहाँ मार्ग स्पष्ट हो, वहाँ विश्वासपूर्ण वापस आना. परमेश्वर की योजनाओं में परिवर्तन का अवसर है, और यह वचनों के कारण संभव होता है कि हम अपने रास्ते पहचानें और उसी पर चलकर नई आशा पाएं।
उद्धृत संरचना से प्रेरित कुछ शब्द (प्रमुख पब्लिक-डोमेन टिप्पणीकारों से):
मैथ्यू हेन्री के अनुसार यह संदेश यह दिखाता है कि परमेश्वर अपने आदमी-समुदाय के लिए पथ को चिह्नित करते हैं और मन फिर उन चिह्नों के अनुसार लौटे।
ऐल्बर्ट बार्न्स ने कहा है कि वचन अपने आप में एक आत्मीय आह्वान है—हर आत्मा को अपने इतिहास के साथ नया संपर्क बनाना चाहिए।
एडम क्लार्क ने कहा कि पुनः लौटना एक आशीष है, जिसमें ईश्वर की करुणा और निर्देश स्पष्ट प्रकट होते हैं।