यिर्मयाह 31:28 बाइबल पद का अर्थ और पद-दर-पद टीका

जिस प्रकार से मैं सोच-सोचकर उनको गिराता और ढाता, नष्ट करता, काट डालता और सत्यानाश ही करता था, उसी प्रकार से मैं अब सोच-सोचकर उनको रोपूँगा और बढ़ाऊँगा, यहोवा की यही वाणी है।

पिछला पद
« यिर्मयाह 31:27

यिर्मयाह 31:28 पद-दर-पद बाइबल टीका

मुख्य व्याख्यात्मक बिंदु

यिर्मयाह 31:28 में यहोवा बताता है कि जिस प्रकार उसने पहले गिराने-उजाड़ने की क्रिया से चिह्नित किया था, उसी प्रकार अब उसकी कृपा और पुनर्निर्माण की योजना भी है। यह वाक्य यह दर्शाता है कि परमेश्वर की योजनाओं में संतुलन है: दण्ड और उद्धार, अवनति और उन्नति एक क्रम में चलते हैं ताकि वह अपने लोगों के लिये एक नया आरम्भ बन सके।

साहित्यिक संदर्भ और पृष्ठभूमि

पद का संदर्भ यिर्मयाह की किताब के अंत के गहरे बंधन से जुड़ा है, जहाँ ईश्वर अपने चिह्नित राष्ट्र के साथ विवेकपूर्ण भविष्य की योजना खोलते हैं। पहले अध्यायों में जहाँ परमेश्वर ने दण्ड के लिए योजनाएँ बताईं, वहाँ अब वह जीवन-सृजन के लिए योजना प्रस्तुत कर रहे हैं—यानी वे जो विनाश से पहले थे, वे अब उन्नति के निर्माण में सहयोग देंगे। यह परिवर्तन यह दर्शाता है कि निर्गमन-स्थापना से लेकर वापस बन्धन तक, परमेश्वर के उद्देश्य पृथ्वी पर उसका शासन बढ़ाने के लिए परिवर्तनशील नहीं रहेंगे, बल्कि वे उसी क्रम में चलते हैं जो उन्हें पुनर्निर्माण में ले जाता है।

धार्मिक महत्त्व

यह संदेश यह समझाता है कि परमेश्वर का दिल परिवर्तनशील नहीं है; उसका नीतिशास्त्र न तो एकतरफा दण्ड है न केवल आशीष। यहीं से विश्वासियों को यह विश्वास मिलता है कि क्रोध के बाद करुणा और पतन के बाद पुनरुत्थान संभव है। यह वाक्य यह भी संकेत देता है कि गिरे हुए लोग या राष्ट्र यदि दया और परिवर्तन के मार्ग पर लौटते हैं, तो परमेश्वर उन्हें उठाकर वृद्धि देता है।

अनुसंग रचनात्मक लिंक

  • यशायाह 44:24-26 — उद्धार की योजना की स्थिरता तथा उद्धारक के पुनःस्थापना के लिए God's निर्देश।
  • यिर्मयाह 33:6-9 — शांति, स्वास्थ्य और पुनर्निर्माण की गारंटी जिससे राष्ट्रों के बीच परमेश्वर की महिमा बढ़े।
  • रोमियों 11:26-27 — कुटुम्ब के पुनःजोड़े जाने की सत्यान्वेषी योजना, जिसमें दण्ड के बाद कृपा का क्रम है।

इन संदर्भों से स्पष्ट होता है कि दण्ड के बाद पुनर्निर्माण की योजना परमेश्वर की दी हुई स्थिरता है और विश्वासयोग्यों के लिये आशा का मार्ग है।

विवेचनात्मक प्रश्न

  • मैं किस प्रकार वर्तमान कठिनाई में परमेश्वर के पुनर्निर्माण के उद्देश्य को देख सकता हूँ?
  • क्या मैं अपनीabakियों में दया-उद्धार के संकेत देख रहा हूँ और उसे स्वीकार कर रहा हूँ?

निष्कर्ष

यह वचन हमें याद दिलाता है कि परमेश्वर सब बुराइयों के बाद भी नया आरम्भ बनाते हैं। जो गिरा, टूटता है, उसे वे उठाने और बढ़ाने के लिए सोच-समझकर आगे बढ़ते हैं। विश्वासियों के लिए यह प्रेरणा है कि संकटों के बीच भी ईश्वर की कृपा का क्रम है—पहले विघटन, फिर विकास, ताकि उसकी महिमा पूरी दुनिया में प्रकाशित हो।

पूर्व-संदर्भ उद्धरण (संक्षेप)

मथ्यू 1: अध्येताओं के अनुसार, चाहे दण्ड हो या कृपा, परमेश्वर के उद्देश्य एक समान रहते हैं; उनका प्रेम और संकल्प अंतिम लक्ष्य की दिशा में अग्रसर रहता है। अँ के लिए यह संदर्भ एक संतुलित दायित्व-रहस्य का संकेत देता है।

हार्ड-टेक्स्ट से छोटे उद्धरण

यदि आवश्यक हो, तो नीचे दिए गए प्रामाणिक टिप्पणीकारों के संक्षिप्त विचारों को संदर्भित करें:

“यहोवा की یہی वाणी है” — यह बताता है कि परिवर्तन उसी के कथन के अनुसार हो रहे हैं; उसके निर्णय पर भरोसा करना चाहिए।

Cross-references explained briefly: यशायाह 44:24-26 (उद्धार की योजना की स्थिरता), यिर्मयाह 33:6-9 (पुनर्निर्माण की गारंटी), रोमियों 11:26-27 (कुटुम्ब के पुनःजोड़े की योजना) — इनसे स्पष्ट होता है कि दण्ड के बाद पुनर्निर्माण का क्रम परमेश्वर की नियत-योजना का अंग है।

नोट: इस टिप्पणी में मथ्यू हेनरी, एल्बर्ट बार्न्स तथा एडम क्लार्क के स्वीकृत विचारों के छोटे-छोटे उद्धरण की अनुमति दी गई है; पूर्ण पंक्तियाँ यहां संक्षेप में शामिल नहीं हैं, बल्कि उनके उपलब्ध तात्त्विक निष्कर्ष को समेकित किया गया है।

*** इस टीका में सार्वजनिक डोमेन में उपलब्ध कुछ प्राचीन और क्लासिक स्रोतों की सामग्री शामिल है। कुछ सामग्री को कृत्रिम बुद्धिमत्ता उपकरणों की सहायता से संसाधित, संक्षिप्त या अनुवादित किया गया हो सकता है। हर व्याख्या को बाइबल के पूरे पाठ और उसके संदर्भ के साथ अवश्य जाँचें। यदि आपको कोई त्रुटि या ऐसा अनुवाद मिले जिसे सुधारने की आवश्यकता हो, तो कृपया हमसे संपर्क करें।

यिर्मयाह 31:28 समानांतर पद और संबंधित वचन

उन बाइबल पदों को देखें जो विषय, शिक्षा या संदर्भ के आधार पर इस अंश से जुड़े हैं। समानांतर पदों की तुलना करने से इस वचन के संदर्भ और संदेश को अधिक गहराई से समझने में सहायता मिलती है। किसी चित्र को चुनें और संबंधित पद, उसकी व्याख्या तथा पद-दर-पद बाइबल टीका देखें।

यिर्मयाह 24:6 HINIRV संबंधित बाइबल पद का चित्र
यिर्मयाह 24:6 (HINIRV) »
मैं उन पर कृपादृष्टि रखूँगा और उनको इस देश में लौटा ले आऊँगा; और उन्हें नाश न करूँगा, परन्तु बनाऊँगा; उन्हें उखाड़ न डालूँगा, परन्तु लगाए रखूँगा।

यिर्मयाह 1:10 HINIRV संबंधित बाइबल पद का चित्र
यिर्मयाह 1:10 (HINIRV) »
सुन, मैंने आज के दिन तुझे जातियों और राज्यों पर अधिकारी ठहराया है; उन्हें गिराने और ढा देने के लिये, नाश करने और काट डालने के लिये, उन्हें बनाने और रोपने के लिये।” (प्रका. 10:11)

यिर्मयाह 45:4 HINIRV संबंधित बाइबल पद का चित्र
यिर्मयाह 45:4 (HINIRV) »
तू इस प्रकार कह, यहोवा यह कहता है: देख, इस सारे देश को जिसे मैंने बनाया था, उसे मैं आप ढा दूँगा, और जिनको मैंने रोपा था, उन्हें स्वयं उखाड़ फेंकूँगा।

HINIRV बाइबल की पुस्तक चुनें