Old Testament
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यिर्मयाह 1 यिर्मयाह 2 यिर्मयाह 3 यिर्मयाह 4 यिर्मयाह 5 यिर्मयाह 6 यिर्मयाह 7 यिर्मयाह 8 यिर्मयाह 9 यिर्मयाह 10 यिर्मयाह 11 यिर्मयाह 12 यिर्मयाह 13 यिर्मयाह 14 यिर्मयाह 15 यिर्मयाह 16 यिर्मयाह 17 यिर्मयाह 18 यिर्मयाह 19 यिर्मयाह 20 यिर्मयाह 21 यिर्मयाह 22 यिर्मयाह 23 यिर्मयाह 24 यिर्मयाह 25 यिर्मयाह 26 यिर्मयाह 27 यिर्मयाह 28 यिर्मयाह 29 यिर्मयाह 30 यिर्मयाह 31 यिर्मयाह 32 यिर्मयाह 33 यिर्मयाह 34 यिर्मयाह 35 यिर्मयाह 36 यिर्मयाह 37 यिर्मयाह 38 यिर्मयाह 39 यिर्मयाह 40 यिर्मयाह 41 यिर्मयाह 42 यिर्मयाह 43 यिर्मयाह 44 यिर्मयाह 45 यिर्मयाह 46 यिर्मयाह 47 यिर्मयाह 48 यिर्मयाह 49 यिर्मयाह 50 यिर्मयाह 51 यिर्मयाह 52Verse
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यिर्मयाह 31:15 का अर्थ और संदर्भ
यिर्मयाह नबी ने जो भविष्यवाणी प्रस्तुत की है, वह बाबुल-विध्वंस के बाद इस्राईली बंधन और शरणार्थी जीवन के अंधेरे में एक आर्दश और हृदयविदारक दृश्य प्रस्तुत करती है। यहाँ यहूदी-नागरिकों के लिए शोक, विलाप और बच्चों के गम्भीर अल्पकालीन नुकसान का वर्णन है। पंक्ति विशेष में यहोवा कहता है कि रामah नामक नगर में बालक-रोना और विलाप सुनाई देगा; राहेल (याकूब की बहन, इस्राईल की प्रतीक-आवाज) अपने बच्चों के लिए रो रही है, क्योंकि वे चले गए। यह दृश्य भावनात्मक रूप से संवेदना और दैनंदिन पीड़ा की गाथा है, जिसमें दया और न्याय दोनों के रंग दिखते हैं।
मुख्य अर्थ
यह श्लोक एक नश्वर पृथ्वीवादी पीड़ा का प्रतीक है—पलायन, विभाजन, और धर्म के साथ लोगों के टूटे सपनों का स्मारक।yllic ताकतें भले ही कमजोर बनें, पर परमेश्वर का स्मरण और उसकी दया बनी रहती है। राहेल की आँखों से निकलता हुआ यह शोक इस धारणा को मजबूत करता है कि दयालु परमेश्वर मानव पीड़ा को मूक नहीं छोड़ता; वह उस पीड़ा के बीच भी भविष्य में उद्धार की आशा रखते हैं।
तीन प्रमुख विषय
संबंधित पवित्र ग्रंथ
— मत्ती 2:18: बच्चों के राज्य में हुए आघात की स्मृतियाँ असहनीय हो उठती हैं, पर कृष्ण-वरदानी भविष्य में सुरक्षित मार्ग दिखाते हैं।
— यिर्मयाह 49:15-16: नसीमों के विनश्य के साथ परमेश्वर की निगरानी और न्याय की दृष्टि।
— यिर्मयाह 31:31-34: नए वाचा का संकेत, जो रोते-गए समय में भी उद्धार का आश्वासन देता है।
व्यावहारिक विचार
यह श्लोक हमें कठिन समय में भी संबल पाने की सीख देता है। पीड़ा के बीच आशा का संदेश न केवल व्यक्तिगत विश्वास को विवेक देता है, बल्कि समाज को भी दया, प्रेरणा और पुनर्निर्माण की दिशा देता है। अगर हमारे पास गली के बच्चे भले-चंगा हों या न हों, तब भी परमेश्वर की वाचा के भीतर हमारी सुरक्षा और नई राह की उम्मीद रहती है।
संक्षिप्त सार
यिर्मयाह 31:15 एक मार्मिक स्मारक है—त्याग, विलाप और पीड़ा के बीच भी परमेश्वर की योजना और उद्धार की आशा मौजूद है। राहेल के रोने के साथ यह बताता है कि दुःख के क्षणों में भी भगवान एक नई शुरुआत का मार्ग बनाते हैं, और वही हमारे भीतर भी विश्वास की चिंगारी जगाते हैं।
नोट्स
यह पंक्ति प्रसिद्ध रूप से यहोवा के लिए एक दयालु स्मरण-संदेश है: शोक का यह दृश्य भविष्य की प्रतिज्ञाओं से जुड़ता है, क्योंकि इस्राईल को अंततः उसकी वाचा के अनुसार नयी जिंदगी मिलनी है।