Old Testament
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यिर्मयाह 1 यिर्मयाह 2 यिर्मयाह 3 यिर्मयाह 4 यिर्मयाह 5 यिर्मयाह 6 यिर्मयाह 7 यिर्मयाह 8 यिर्मयाह 9 यिर्मयाह 10 यिर्मयाह 11 यिर्मयाह 12 यिर्मयाह 13 यिर्मयाह 14 यिर्मयाह 15 यिर्मयाह 16 यिर्मयाह 17 यिर्मयाह 18 यिर्मयाह 19 यिर्मयाह 20 यिर्मयाह 21 यिर्मयाह 22 यिर्मयाह 23 यिर्मयाह 24 यिर्मयाह 25 यिर्मयाह 26 यिर्मयाह 27 यिर्मयाह 28 यिर्मयाह 29 यिर्मयाह 30 यिर्मयाह 31 यिर्मयाह 32 यिर्मयाह 33 यिर्मयाह 34 यिर्मयाह 35 यिर्मयाह 36 यिर्मयाह 37 यिर्मयाह 38 यिर्मयाह 39 यिर्मयाह 40 यिर्मयाह 41 यिर्मयाह 42 यिर्मयाह 43 यिर्मयाह 44 यिर्मयाह 45 यिर्मयाह 46 यिर्मयाह 47 यिर्मयाह 48 यिर्मयाह 49 यिर्मयाह 50 यिर्मयाह 51 यिर्मयाह 52Verse
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यिर्मयाह 31:36 — एक दृढ़ अक्षमता एवं वचनों की स्थिरता
सीधे शब्दों में अर्थ: यदि यीशु नहीं, बल्कि परमेश्वर का नियम और वचन अपने स्थायित्व को छोड़ दें, तब ही इस्राएल के वंश की परम सुरक्षा और तरक्की की आशा मिट सकती है; अन्यथा, आकाश-पाताल जितना स्थिर यह नियम रहेंगे।
पृष्ठभूमि और संदर्भ
यिर्मयाह नबी के समय यहोवा के साथ बैत-युग के तनावपूर्ण इतिहास में लिखा गया है। विरोधी दबावों, अपकर्ष failures और शुक्रवार-सी स्थिति के बीच यह वचन परमेश्वर की वचन-निष्ठा की पुष्टि करता है। यह संदर्भ इस बात पर केंद्रित है कि परमेश्वर का नियम युगों तक बनाए रखा जाएगा—यह केवल व्यक्तिगत नैतिकता नहीं, बल्कि राष्ट्र की संरचना से जुड़ा एक वादा है।
व्याख्यात्मक टिप्पणियाँ
मुख्य विचार
अन्य पवित्र ग्रंथों से संबंध
यिर्मयाह के क्षेत्र में समान विचार मृत्य की जगह नहीं, बल्कि स्थायित्व और सत्य के साथ जुड़ा है:
छोटी व्यावहारिक अनुभूति
हमारा जीवन उन नियमों के प्रति निष्ठा से बनता-बनता है जो परमेश्वर ने ठहराया है। चाहे परिस्थतियाँ कैसी भी हों, ईश्वर के वचन की स्थिरता हमारी आशा को मजबूत बनाती है और समुदाय के भीतर विश्वास की गड़न को बनाए रखती है।
कथन-गांठ और क्रॉस-रेफरेंसे
यिर्मयाह 31:35-37 बताते हैं कि परमेश्वर का नियम चुक-चुक कर भी टूट नहीं सकता; उसी प्रकार, दाऊद की वाणी और सिद्धांतों पर आधारित आशीषें स्थिर रहती हैं।
उक्त संदर्भ क्रॉस-रेफरेंसेज: निर्गमन 19:5-6, भजन 89:34-37, यशियाह 40:8 — इनमें सभी यह दिखाते हैं कि परमेश्वर के वचन, प्रतिज्ञाएं और नियम न टूटने वाले हैं।
संक्षिप्त निष्कर्ष
यिर्मयाह 31:36 हमें यह याद दिलाता है कि परमेश्वर के नियमों की विश्वसनीयता और स्थायित्व से ही इस्राएल का जीवन, और व्यापक रूप से हमारे विश्वास का आधार बना रहता है। जब हम इन नियमों के अनुसार चलते हैं, तब न केवल राष्ट्र की आंतरिक सुरक्षा सुरक्षित होती है, बल्कि व्यक्तिगत आशीषों की भी दिशा स्पष्ट होती है।
महत्वपूर्ण उद्धरण-सम्बन्ध: यदि उपलब्ध हो, Matthew Henry, Albert Barnes और Adam Clarke के छोटे-से-उद्धरण पाठ नीचे दिए गए हैं।