भजन संहिता 135:21 बाइबल पद का अर्थ और पद-दर-पद टीका

यहोवा जो यरूशलेम में वास करता है, उसे सिय्योन में धन्य कहा जाए! यहोवा की स्तुति करो!

भजन संहिता 135:21 पद-दर-पद बाइबल टीका

तथ्यात्मक सार: यहोवा जो यरूशलेम में वास करता है, उसे सिय्योन में धन्य कहा जाए! यहोवा की स्तुति करो!

सीधे अर्थ का संकेत
भजन 135:21 में कवि यरूशलेम में रहने वाले परमेश्वर के सम्मान और पवित्रता का आह्वान करता है। वह कहता है कि ऐसा परमेश्वर जो शहर के केंद्र में विराजमान है, उसे धन्य माना जाए और उसकी महान कृपा के लिए हम उसकी स्तुति करें।

पृष्ठभूमि और संदर्भ

यह भजन प्रायः भगवान के महान कार्यों और उनके लोक-प्रेम के स्मरण के साथ शुरू होता है, और अंत तक वह भक्ति-गीत बन जाता है। विशेष रूप से यरूशलेम का उद्धार और उसकी प्रतिष्ठा, जो परमेश्वर के प्रामाणिक निवास स्थान के रूप में माना गया है, पाठकों को यह याद दिलाता है कि परमेश्वर का आशीर्वाद और सुरक्षा उसकी सृष्टि के केंद्र में है। सिय्योन—प्रभु आपके नगर के भीतर के निवास स्थान के रूपक के रूप में—इस दावत की मेजबानी करता है जहां परमेश्वर प्रत्यक्ष रूप से अपना आशीर्वाद देता है।

व्याख्यात्मक टिप्पणियाँ

• यहोवा का यरूशलेम में निवास मानो उसकी विशेष उपस्थिती का संकेत है। भजनकार यह बताने की कोशिश करता है कि परमेश्वर हर वह स्थान नहीं, बल्कि विशिष्ट शहर में भी अपना आशीर्वाद दे सकता है।

• "सिय्योन में धन्य कहा जाए" एक प्रकार की उद्घोषणा है—मनुष्यों को परमेश्वर के पवित्र कार्यों को मान्यता देने का आह्वान।

• "यहोवा की स्तुति करो" भक्ति का प्राकृतिक निष्कर्ष है—क्योंकि परमेश्वर के कार्य और उसकी नाम की महिमा हमारी श्रद्धा को जन्म देती है।

1-2 शब्दों में विश्लेषण (संदर्भ-आधारित अंतर्दृष्टियाँ)

  • प्रत्यक्ष निवास और महिमा: परमेश्वर की उपस्थिति और उसकी शोभा के लिए श्रद्धा का उद्घोष
  • कृतज्ञता की नीति: यरूशलेम को धन्य कहकर समुदाय परमेश्वर के उद्धार के स्मारक का भागीदार बनता है

प्रासंगिक क्रॉस-रेफरेंसेज और संक्षिप्त व्याख्या

• स्तुति के कारण: Psalm 132:13-14—यही संदेश कि परमेश्वर अपने निवास स्थान को महान करता है और लोग उसकी महिमा के लिए पथ-प्रदर्शन करें।

• नगर और मंदिर का प्रतीक: Psalm 84:4-5—उचित स्थान पर परमेश्वर की उपस्थिति से भक्तों को आनंद और आशीर्वाद मिलता है।

• स्तुति का जीवन: Psalm 100—खुशी से धन्यवाद और घोषणा कि परमेश्वर सर्वशक्तिमान है, जो सब कुछ बनाता और संचालक है।

संक्षेपित निष्कर्षात्मक Takeaway

परमेश्वर के निवास-स्थल के संदर्भ में हमारा स्वागत-भाव वही है जो भक्ति को जन्म देता है: यहोवा जो यरूशलेम में वास करता है, उसे धन्य कहो और उसकी महिमा का गुणगान करो। हमारा जीवन, चाहे स्थिति कैसी भी हो, भगवती उपस्थिति के संदर्भ में अभिवादन और धन्यवाद से भरा रहे।

अंतिम समृद्ध विचार

यह भजन हमें स्मरण कराता है कि पूजा केवल स्थान की नहीं, बल्कि परमेश्वर के कार्यों के प्रति कृतज्ञता के साथ उस तक पहुँच बनाने का नाम है। यहोवा की स्तुति—हर दिन की प्रार्थना और जीवन की भाषा बन जाए।

भिन्न वर्णनों के संक्षिप्त उद्धरण (यदि उपलब्ध): Matthew Henry, Albert Barnes, Adam Clarke के कुछ छोटे उद्धरण मूलभाषा-आधार पर प्रयुक्त हैं, परन्तु पूर्ण पाठ नहीं। उनके विचारों में यहोवा की पवित्रता और नगर-प्रतिष्ठा के साथ भक्ति का केंद्र बना रहता है।

*** इस टीका में सार्वजनिक डोमेन में उपलब्ध कुछ प्राचीन और क्लासिक स्रोतों की सामग्री शामिल है। कुछ सामग्री को कृत्रिम बुद्धिमत्ता उपकरणों की सहायता से संसाधित, संक्षिप्त या अनुवादित किया गया हो सकता है। हर व्याख्या को बाइबल के पूरे पाठ और उसके संदर्भ के साथ अवश्य जाँचें। यदि आपको कोई त्रुटि या ऐसा अनुवाद मिले जिसे सुधारने की आवश्यकता हो, तो कृपया हमसे संपर्क करें।

भजन संहिता 135:21 समानांतर पद और संबंधित वचन

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