Old Testament
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यशायाह 43:5 का अर्थ
मत डर, क्योंकि मैं तेरे साथ हूँ; मैं तेरे वंश को पूर्व से ले आऊँगा, और पश्चिम से भी इकट्ठा करूँगा।
पुष्टि और पृष्ठभूमि
यह ईश्वर का आशीर्वचन है जो द्वितीयबंध के समय, दावीद की वंशावली और वापसी के संदर्भ में दिया गया है। बंधन से निकलकर वापस लौटना और संघर्षों के बीच मिश्रण-युक्त राष्ट्र को एक साथ लाना परमेश्वर की कृपा और सक्षम सामर्थ्य का प्रमाण है। यह वचन यह बताता है कि भय के स्थान पर विश्वास रखना है क्योंकि प्रभु साथ है और उद्धार की योजनाओं को पूरा करेगा।
व्याख्यात्मक टिप्पणी
• “मत डर”—यशायाह में बारम्बार प्रयोग में आने वाला शब्द है; यह लोगों के लिए सामर्थ्य और सुरक्षा की घोषणा है, खासकर तब जब वे भविष्य की बड़ी चुनौतियों के सामने होते हैं।
• “मैं तेरे साथ हूँ”—यह व्यक्तिगतरण का संकेत है: परमेश्वर सदा साथ रहता है, और यह भौगोलिक-कालिक सीमाओं से ऊपर है—पूर्व से पश्चिम तक उसकी उपस्थिति और सुरक्षा।
• “मैं तेरे वंश को पूर्व से ले आऊँगा, और पश्चिम से भी इकट्ठा करूँगा”—यह पुनःसंयोजन, वापसी और परमेश्वर की वासना के अनुसार बहुविध जनजातियों का एकत्रीकरण दर्शाता है। यह उद्धार की दृष्टि से एक व्यापक विश्वास प्रदान करता है कि चूंकि ईश्वर सभी को एक छाते के भीतर लाते हैं, इसलिए उनका उद्देश्य समुदाय को एक साथ रखना है।
केंद्रीय विचार
क्रॉस-रेफरेंस (संक्षेप में)
यहेजाक 36:24—परमेश्वर अन्यजातियों को मिलाकर उनके निवास स्थानों को बदलने की योजना दिखाते हैं; यह समान संदेश देता है कि परमेश्वर की कार्य-योजना वृहत्तर समूहों के बीच एकता स्थापित करती है।
याकूब 8:7—धैर्य और ईश्वर की सहायता के साथ जीवन के कठिन परिवर्तनों से निकलना संभव है; यह प्रतिपादन बताता है कि ईश्वर के साथ संगति में परिवर्तन सरल होता है।
इन्हीं से जुड़ा एक संक्षिप्त संदर्भ-समय
मत्ती 28:20 और रोम 8:28—जिन घटनाओं में विश्वासियों के लिए मार्ग बनते हैं और जीवन में ईश्वर की योजना के अनुरूप घटनाएं घटती हैं; ये संदर्भ हमें बताते हैं कि ईश्वर की उपस्थिति और कृपा कैसे दैनिक जीवन में क्रियाशील रहती है।
व्यावहारिक निष्कर्ष
आपके जीवन में यदि भय, भटकाव या अस्थिरता का समय हो, तो यह स्मरण रखें कि परमेश्वर साथ है। वह आपको पूर्व और पश्चिम से एकत्र करने की अपनी योजना के अनुसार मार्ग दिखाएगा, भीड़ में भी आप अकेले नहीं हैं। अपने विश्वास को सक्रिय करें—प्रश्नों के बजाय प्रार्थना, आशीष के साथ निर्माण करें, और समुदाय के भीतर एकत्व को महत्व दें।
संक्षेप में, यशायाह 43:5 हमें बताता है कि भय से ऊपर उठकर परमेश्वर की मौजूदगी पर भरोसा रखा जाए, क्योंकि वही वापसी, पुनःजोड़ने और एकता की पूर्ण योजना को संचालित करते हैं।
सूत्रधार उद्धरण (हस्ताक्षरित उद्धरण नीचे नहीं रखा गया है; आवश्यक स्थान पर केवल समान विचार महत्त्वपूर्ण रूप से समाहित किया गया है।)