Old Testament
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मुख्य भाव: तेरी घटती न हो सड़कें, क्योंकि मेरी करुणा अडिग है
यशायाह 54:10 का संदेश कहता है कि यदि पहाड़ भी हिल जाएँ, फिर भी परमेश्वर की करुणা और शांति-भाषा कभी नहीं हटेगी। यह वचन भविष्य की यरूशलेम के लिए एक दृढ़ आश्वासन है कि उसकी रक्षा और प्रेम अटूट रहेगा, भले ही सीमाओं-सम्पन्न स्थितियाँ कैसी भी हों।
पृष्ठभूमि और सन्दर्भ
यशायाह 54 अध्याय, प्रायः इस्राइल-बाणियों के कारणों के बाद उद्धारात्मक आश्वासनों का भाग है। 54:10 में यहश्वर अपनी अटल करुणा और शान्तिदायक वाचा की पुष्टि करता है—”यहोवा, जो तुझ पर दया करता है”—यही वचन है। यह श्रोताओं को बताते हैं कि खर्च, दुःख, या सामरिक गिरावट के बीच भी परमेश्वर की धर्मनिष्ठता बनी रहती है।
व्याख्यात्मक प्रतीक और प्रमुख निष्कर्ष
अनुवादक विचार और मार्गदर्शक दृष्टिकोण
Matthew Henry, Albert Barnes और Adam Clarke से संक्षिप्त, उपयोगी संकेत:
Henry: “यह वह अटल प्रेम है जो अति-आलोचनाओं के समय में भी टिके रहता है” (संकेतार्थ). उद्धार का आश्वासन।
Albert Barnes: “करुणा और शान्ति-भाषा की यह विश्वसनीयता केवल परमेश्वर की सत्ता के भीतर है; मनुष्यों के परिवर्तन से नहीं”।
Adam Clarke: “यह वचन यह दर्शाता है कि उद्धार के आशीर्वाद का स्रोत परमेश्वर की कृपा है, न कि हमारे पालन या सुदृढ़ विश्वास के कारण”।
चर्चित क्रॉस-रेफरेंस और उनका संक्षेप अर्थ
- प्रकाशित और उद्धार की दया के वचनों की पुनरावृत्ति: यशायाह 49:13; 63:9; रोम 8:38-39।
- शान्ति-बंध: पाइंट में यह दिखाता है कि परमेश्वर की शान्तिदायक कृपा दुनिया की अशांति पर विजय पाती है।
व्यावहारिक takeaway
कठिन समय में भी अपनी सुरक्षा की आशा न छोड़ें। परमेश्वर की करुणा अडिग है; उसकी वाचा स्थिर है। यदि जीवन में तूफ़ान आएं, तब भी यह अनचूक नहीं कि परमेश्वर आप पर निरंतर कृपा बरसाएंगे।
टिप्पणियाँ और संदेश
यह वचन विश्वासियों को यह सिखाता है कि परिस्थितियाँ चाहे कितनी भी विपरीत हों, हमारा भरोसा परमेश्वर की स्थिर करूणा और वचनों में हो।