Old Testament
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जकर्याह 1:12 बाइबल पद का अर्थ और पद-दर-पद टीका
तब यहोवा के दूत ने कहा, 'हे सेनाओं के यहोवा, तू जो यरूशलेम और यहूदा के नगरों पर सत्तर वर्ष से क्रोधित है, इसलिए तू उन पर कब तक दया न करेगा?' (प्रका. 6:10)
जकर्याह 1:12 पद-दर-पद बाइबल टीका
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जकर्याह 1:12 समानांतर पद और संबंधित वचन
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यिर्मयाह 29:10 (HINIRV) »
“यहोवा यह कहता है कि बाबेल के सत्तर वर्ष पूरे होने पर मैं तुम्हारी सुधि लूँगा, और अपना यह मनभावना वचन कि मैं तुम्हें इस स्थान में लौटा ले आऊँगा, पूरा करूँगा।

दानिय्येल 9:2 (HINIRV) »
उसके राज्य के पहले वर्ष में, मुझ दानिय्येल ने शास्त्र के द्वारा समझ लिया कि यरूशलेम की उजड़ी हुई दशा यहोवा के उस वचन के अनुसार, जो यिर्मयाह नबी के पास पहुँचा था, कुछ वर्षों के बीतने पर अर्थात् सत्तर वर्ष के बाद पूरी हो जाएगी।

भजन संहिता 102:13 (HINIRV) »
तू उठकर सिय्योन पर दया करेगा; क्योंकि उस पर दया करने का ठहराया हुआ समय आ पहुँचा है*।
जकर्याह 1:12 पर दृष्टिकोण
यह पद जकर्याह के पुरानी व्यवस्था के युग के उस दौर की प्रेरित याद दिलाता है जब परमेश्वर ने यरूशलेम और यहूदियों के नगरों पर लंबे समय तक दया और धैर्य दिखाया था। दूत कहता है कि यहोवा ने सत्तर वर्षों से यरूशलेम के विरुद्ध क्रुद्धता दिखाई है—परन्तु यह भी संकेत है कि उसका स्वभाव चरणबद्ध तरीके से परिवर्तन के लिए तैयार है, ताकि वह अपने प्रजा के लिए दया का द्वार फिर से खोल दे।
पाठ का परिचय उनके क्रम में
यह्का के समय के साथ जुड़ी कथा में जकर्याह प्रशासनिक और आनुषंगिक चेतना को सामने लाती है। दूत की यह बात—“तू उन पर कब तक दया न करेगा?”—एक विश्वासयोग्य आह्वान है कि परमेश्वर के क्रोध के भीतर भी स्मरण-रक्षित करुणा मौजूद है, और उसकी योजना में परिवर्तन संभव है। यह संदेश भी बताता है कि प्रभु अपनेchosen लोगों के लिए क्षमा, पुनर्निर्माण और पुनरुद्धार के अवसर बनाते हैं।
मुख्य आध्यात्मिक शिक्षा
इस verse से निकलने वाला प्रमुख पाठ है: क्रमिक समय में परमेश्वर की करुणा और विश्वासयोग्यता की पुनर्स्थापना। दया और पृथ्वी के ऐतिहासिक अतीत में देरी के बावजूद, परमेश्वर का उद्देश्य शांति, सुरक्षा और स्थानीय समुदाय की स्थायित्व है। यहूदा और यरूशलेम के लिए यह संदेश एक प्रकार का आह्वान है कि वे अपनी स्थिति पर ध्यान दें, पाप से माफ़ी मांगें और परमेश्वर के मार्ग पर लौटें।
अन्य पवित्र ग्रंथों से तुलनात्मक विचार
इन संदर्भों से स्पष्ट होता है कि देर और क्रोध के बीच भी परमेश्वर का उद्धार-चरित्र बना रहता है—जो अपने लोगों को फिर से बुलाते हैं और उन्हें उनके घर लौटाने के उच्चावली मार्ग दिखाते हैं।
व्यावहारिक अनुप्रयोग
1) धैर्य बनाए रखें: कभी-कभी हमारी स्थितियाँ लंबे समय तक चुनौतीपूर्ण रह जाती हैं; यह संदेश हमें याद दिलाता है कि परमेश्वर का समय सर्वोपरि है और वह पुनः करुणा खोल सकता है।
2) पाप से पलटाव: अपने जीवन में जो क्षय या अवरोध बने हैं, उन्हें पहचानें और परमेश्वर के सामने लौटें।
3) समुदाय की पुनःस्थापना: विश्वासियों के बीच भरोसा और एकता बनाए रखना—यही वह समय है जब परमेश्वर पुनर्निर्माण के काम शुरू कर सकता है।
अनुकरणीय उद्धरण (Public-domain commentator से संकेत)
Matthew Henry के अनुसार, परमेश्वर की धैर्यशीलता और करुणा का उद्देश्य यह है कि उसके लोग फिर से अपनी स्थिति सही करें और उसकी योग्यता की दिशा में कदम बढ़ाएं। Albert Barnes ने कहा कि यह वक्तव्य यह दर्शाता है कि परमेश्वर अपने दंड के साथ भी अपनी दया के अवसर खोलते हैं ताकि पापी भी फिर से मार्ग पर आ सके। Adam Clarke ने इसे कर्म और समय के संयोजन के रूप में देखा है—कि इतिहास के इस चरण में दया का सिलसिला फिर से प्रवाहित होता है।
उद्धरण-नोट: इस पैरे के लिए इन विशिष्ट टिप्पणियों के लिए “Matthew Henry” आदि की संक्षिप्त पंक्तियाँ यहाँ समाहित हैं, जिन्हें आवश्यकता अनुसार पाठ के साथ मिलाकर पढ़ना लाभदायक है।
क्रॉस-रेफरेंसेस (संक्षिप्त टिप्पणी के साथ)
यशः 38:20–21—परमेश्वर के दयालु आह्वान के साथ जीवन में पुनः उद्धार की संभावना। यहुरूशलेम के नगरों के लिए पुनर्निर्माण की आशा को समरूप बनाता है।
यिर्मयाह 33:11—करुणा का समय और आशीर्वाद की पुनः प्रतिष्ठा की बात।
हि. 10:37—धैर्य से प्रतिक्षा करना और बुझी आशा को पुनः जागना।
संक्षेप
जकर्याह 1:12 में परमेश्वर से यह प्रेरणा मिलती है कि उसकी करुणा समय के साथ फिर से प्रकट होती है, और उसका उदय उन लोगों के लिए पुनः आशा का द्वार खोलता है जो उद्धार-यात्रा में लौटना चाहते हैं। यह संदेश हमें धैर्य, पलटना और समुदायिक पुनर्निर्माण की दिशा में प्रेरित करता है।