Old Testament
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जकर्याह 1:13 बाइबल पद का अर्थ और पद-दर-पद टीका
और यहोवा ने उत्तर में उस दूत से जो मुझसे बातें करता था, अच्छी-अच्छी और शान्ति की बातें कहीं।
जकर्याह 1:13 पद-दर-पद बाइबल टीका
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जकर्याह 1:13 समानांतर पद और संबंधित वचन
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यशायाह 40:1 (HINIRV) »
तुम्हारा परमेश्वर यह कहता है, मेरी प्रजा को शान्ति दो, शान्ति! (भज. 85:8, 2 कुरि. 1:4)

यिर्मयाह 29:10 (HINIRV) »
“यहोवा यह कहता है कि बाबेल के सत्तर वर्ष पूरे होने पर मैं तुम्हारी सुधि लूँगा, और अपना यह मनभावना वचन कि मैं तुम्हें इस स्थान में लौटा ले आऊँगा, पूरा करूँगा।

यिर्मयाह 30:10 (HINIRV) »
“इसलिए हे मेरे दास याकूब, तेरे लिये यहोवा की यह वाणी है, मत डर; हे इस्राएल, विस्मित न हो; क्योंकि मैं दूर देश से तुझे और तेरे वंश को बँधुआई के देश से छुड़ा ले आऊँगा। तब याकूब लौटकर, चैन और सुख से रहेगा, और कोई उसको डराने न पाएगा।
जकर्याह 1:13—परिसर का दृश्य और दूत की शांति
इस पद के तुरंत पीछे के दृश्य में जकर्याह के)* एक स्वर्गीय दर्शन है। प्रभु की दृष्टि के सामने दूत और प्रहरी-स्वरूप उपस्थित रहते हैं, जो मुझसे बातें करते थे। यह वाक्यांश बताता है कि वह दूत जो देवदूतों में से एक था, परमेश्वर के साथ संवाद कर रहा है और यह संवाद अत्यंत ठहराव और शांति से है।
ईश्वर और आस्था के बारे में यह पाठ क्या बताता है
यहाँ यह स्पष्ट होता है कि परमेश्वर अपने लोगों के लिए शांति के संदेशवाहक के रूप में अपने दूत को भेजते हैं। “अच्छी-अच्छी और शान्ति की बातें” कहना यह दर्शाता है कि ईश्वरा-केन्द्रित पवित्र संदेश न केवल तथ्यात्मक होते हैं बल्कि हृदय-शान्ति, आशा और सुधार का समान्न्द करते हैं। यह दर्शाता है कि प्रभु अपने कर्मों में नीयत-भरी सुरक्षा और सन्तोष का संचार करना चाहते हैं।
शब्दों और रूपकों की स्पष्टता
- “उत्तर” यहाँ एक स्थान-विशिष्ट निर्देश है—दूत संवाद के स्थान को दर्शाता है, जहाँ परमेश्वर अपने उद्देश्य की योजना प्रकट करते हैं।
- “अच्छी-अच्छी बातें” से तात्पर्य है उन बातों से जो लाभदायक, वास्तविक और नैतिक उन्नति की दिशा में होती हैं।
- “शान्ति” एक प्रमुख शाब्दिक संवेदना है—भीतर की शांति और समाजिक-मनशांति दोनों।
अन्य संदर्भ जो इस विचार को पुष्ट करते हैं
आज के पाठ के लिए अनुप्रयोग
- कठिन समय में भी परमेश्वर की बातें “शान्ति की बातें” देती हैं—डर और आशंका के बीच भरोसे की पत्री।
- दूत-प्रेम के संकेत हमारे जीवन में भी प्रकाशित होते हैं, जब हम परमेश्वर के वचन को संपूर्णता और ईमानदारी से ग्रहण करते हैं।
- निजी मन-स्थिति को नियंत्रित करने के लिए प्रभु के संदेश की ठहरावपूर्ण confirmation को मानना सीखें—आत्म-शांति का स्रोत विश्वासी के जीवन में नयी दिशा देता है।
संदर्भ-उद्धरण (संस्कृत-समरूप विचार से प्रेरित)
यह पाठMatthew Henry, Albert Barnes और Adam Clarke जैसे सार्वजनिक-डोमेन टिप्पणीकारों के दृष्टिकोणों से मिलकर एक सशक्त मानक देता है: परमेश्वर अपने-दृष्टि-समझ के अनुसार शांति और प्रिय-संदेश बनाकर भेजते हैं, ताकि उनके लोग भय से मुक्त होकर विश्वास में स्थिर हों।