Old Testament
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होशे 5:6 बाइबल पद का अर्थ और पद-दर-पद टीका
वे अपनी भेड़-बकरियाँ और गाय-बैल लेकर यहोवा को ढूँढ़ने चलेंगे, परन्तु वह उनको न मिलेगा; क्योंकि वह उनसे दूर हो गया है।
होशे 5:6 पद-दर-पद बाइबल टीका
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होशे 5:6 समानांतर पद और संबंधित वचन
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मीका 6:6 (HINIRV) »
“मैं क्या लेकर यहोवा के सम्मुख आऊँ, और ऊपर रहनेवाले परमेश्वर के सामने झुकूँ? क्या मैं होमबलि के लिये एक-एक वर्ष के बछड़े लेकर उसके सम्मुख आऊँ?

नीतिवचन 1:28 (HINIRV) »
उस समय वे मुझे पुकारेंगे, और मैं न सुनूँगी; वे मुझे यत्न से तो ढूँढेंगे, परन्तु न पाएँगे।

यूहन्ना 7:34 (HINIRV) »
तुम मुझे ढूँढ़ोगे, परन्तु नहीं पाओगे; और जहाँ मैं हूँ, वहाँ तुम नहीं आ सकते।”
होशे 5:6 पर Commentary (HINIRV)
होशे के संदर्भ में यह verse उन नेताओं और जनसमुदाय के लिए चेतावनी है जो धार्मिक रीति-रिवाजों पर निर्भर रहते हुए ईश्वर की निकटता को दुहरा-डुप्लीकेट ढूँढ़ते हैं, परन्तु सत्य आस्था के मार्ग से विचलित हो जाते हैं। यहां यह कहा गया है कि वे अपने पशुधन के साथ यहोवा को ढूँढ़ेंगे, लेकिन वह उनके साथ नहीं होगा, क्योंकि वह उनसे दूर चला गया है। यह बताता है कि परमेश्वर की निकटता केवल बाहरी कर्म से नहीं मिलती, बल्कि आंतरिक विश्वास, समर्पण और पवित्र जीवन से जुड़ी होती है।
केंद्रीय अर्थ
ईश्वर अपने चुने हुओं के साथ एक अंश-हद तक दूरी बनाते हैं जब लोग औपचारिकता और आडंबर में जकड़कर आत्मा की आवश्यकता और नैतिक प्रश्नों को छोड़ देते हैं। यहूदी धार्मिक व्यवस्था में भेड़-बकरियाँ और गाय-बैल जैसे पशुधन का बलिदानी प्रतीकात्मकता के लिए है। पर यहाँ निष्कर्ष यह है कि केवल पूजा-उपासना से ईश्वर का मानवीय सन्निकट होना संभव नहीं; उसे अनुभव करने के लिए दिल में ईमान, न्याय और भलाई का परिवर्तन आवश्यक है।
मुख्य थीम
रचित cross-references (संक्षेप में)
व्यावहारिक चिंतन
यदि आप देखते हैं कि धार्मिक गतिविधियाँ बिना आंतरिक परिवर्तन के चल रही हैं, तो ईश्वर से गहरे सवाल करें: क्या मेरा हृदय उसे पूर्ण रूप से समर्पित है? क्या मैं पाप से मुँह मोड़कर उसे अपने जीवन का साझा नेता मानता हूँ? प्रार्थना और अध्ययन के साथ साथ व्यवहार में भी दया, न्याय और सत्य का अभ्यास करें।
संक्षिप्त समापन
यह verse एक सचेत स्मरण कराता है कि धार्मिक कर्मा-क्रिया से परे ईश्वर की निकटता आत्मा की परिवर्तन-यात्रा पर निर्भर है। भीतर के विश्वास, प्रायश्चर्य और जीवन के नैतिक नमूने ही वह रास्ते हैं जिनसे हमारे साथ परमेश्वर का वास्तविक सम्बद्ध बन पाता है।
उद्धृत करने योग्य पारंपरिक टिप्पणीकारों की संक्षिप्त नैतिकता (यदि आवश्यक हो): Matthew Henry, Albert Barnes, Adam Clarke के विचारों से संगत संकेत मिलते हैं जो बताते हैं कि बाहरी पूजा नहीं, बल्कि दिल की स्थिति परमेश्वर के निकट आने का रास्ता है।