Old Testament
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होशे 5:12 बाइबल पद का अर्थ और पद-दर-पद टीका
इसलिए मैं एप्रैम के लिये कीड़े के समान और यहूदा के घराने के लिये सड़ाहट के समान हूँगा।
होशे 5:12 पद-दर-पद बाइबल टीका
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होशे 5:12 समानांतर पद और संबंधित वचन
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यशायाह 51:8 (HINIRV) »
क्योंकि घुन उन्हें कपड़े के समान और कीड़ा उन्हें ऊन के समान खाएगा; परन्तु मेरा धर्म अनन्तकाल तक, और मेरा उद्धार पीढ़ी से पीढ़ी तक बना रहेगा।”

अय्यूब 13:28 (HINIRV) »
और मैं सड़ी-गली वस्तु के तुल्य हूँ जो नाश हो जाती है, और कीड़ा खाए कपड़े के तुल्य हूँ।

नीतिवचन 12:4 (HINIRV) »
भली स्त्री अपने पति का मुकुट* है, परन्तु जो लज्जा के काम करती वह मानो उसकी हड्डियों के सड़ने का कारण होती है।
होशे 5:12 का सरल अर्थ
यह वाक्य कहता है: मैं Ephraim के लिए कीड़े के समान और यहूदा के घराने के लिए सड़ाहट के समान हूँगा। यहाँ परमेश्वर अपने चुने हुए लोगों के प्रति बंधन-भंग के परिणामस्वरूप उनके दमन की चेतावनी दे रहा है; जब वे पाप में डूबे रहते हैं, तब उनका उद्धारकर्ता उनके बीच से दूरी बनाते हैं और उनका प्रायश्चित्त रोके नहीं जाते।
पृष्ठभूमि और संदर्भ
होशे का नाम यहूदी-प्राकृत में “यहोशू-हेश” से मिलता है, जिसका अर्थ है “यहोवा छुड़ाने वाला है।” होशे के संदेश में इस्राएलियों के पाप, विशेषकर इंद्रियों के मूर्तिपूजकत्व और अन्यायपूर्ण व्यवहार, के कारण वे परमेश्वर के कराह के पात्र बनते हैं। Ephraim और यहूदा—दो प्रमुख उत्तर-जातियाँ—अपनी-अपनी एकाकीर्ता, विश्वासघात और अपराध के चलते दंड के पथ पर खड़े हैं।
दार्शनिक अवलोकन
कौमिक्ष्ट विचार और क्रियात्मक अनुपात
अनुदेशात्मक क्रॉस-रेफरेंसे
कथा-जोड़: न्याय के साथ दया के मिश्रण की आवश्यकता दो जगह दिखती है—यशायाह की किताब में जहाँ पाप के परिणाम स्पष्ट होते हैं, और यिर्मयाह में पश्चाताप की प्रेरणा. नीतिवचन में भी सही समय पर सावधानी और विश्वास का महत्व है।
संक्षिप्त व्यावहारिक निष्कर्ष
हम कैसे आत्म-निरीक्षण करें? जो लोग पथ से भटक जाते हैं, उन्हें याद रखना चाहिए कि प्रभु की कड़वी सजा तभी बदली जा सकती है जब दिल पूरी तरह से पश्चाताप करे और फिर वही विश्वास के साथ लौटे।
मूल पाठ से जुड़े संकेत
पवित्र स्वभाव के अनुसार, दंड के वादे एक चेतावनी हैं ताकि लोग सचेत हों और परमेश्वर के पथ पर लौटें।
अनुशंसित अध्ययन संकेत
1) होशे 6:1-3: पश्चाताप और पुनर्स्थापन की उम्मीद। 2) होशे 4:1-2: सामाजिक असमानताएँ और पाप। 3) यशायाह 1:4-6: पाप के परिणाम और पुर्नस्थापन की आवश्यकता।
छोटे निष्कर्ष के रूप में: परमेश्वर का गुस्सा तब तक कठोर रहता है जब तक आवश्यक पश्चाताप नहीं होता; परन्तु सचेत और नम्र मन के साथ लौटना उद्धार की दिशा में पहला कदम है.
महत्वपूर्ण उद्धरण: होशे 5:12 की प्रकृति के लिए नीचे दिए गए उद्धरण डेढ़-शब्दों में भी माने जाते हैं: “कीड़े के समान” और “सड़ाहट के समान”। (ध्यान दें: नीचे उद्धृत केवल संदर्भ-उद्धरण हैं; पूर्ण ग्रंथ नहीं दिए जाते।)