Old Testament
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मत्ती 2:15 बाइबल पद का अर्थ और पद-दर-पद टीका
और हेरोदेस के मरने तक वहीं रहा। इसलिए कि वह वचन जो प्रभु ने भविष्यद्वक्ता के द्वारा कहा था पूरा हो “मैंने अपने पुत्र को मिस्र से बुलाया।” (होशे 11:1)
मत्ती 2:15 पद-दर-पद बाइबल टीका
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मत्ती 2:15 समानांतर पद और संबंधित वचन
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होशे 11:1 (HINIRV) »
जब इस्राएल बालक था, तब मैंने उससे प्रेम किया, और अपने पुत्र को मिस्र से बुलाया। (मत्ती 2:15)

निर्गमन 4:22 (HINIRV) »
और तू फ़िरौन से कहना, 'यहोवा यह कहता है, कि इस्राएल मेरा पुत्र वरन् मेरा पहलौठा है,

गिनती 24:8 (HINIRV) »
उसको मिस्र में से परमेश्वर ही निकाले लिए आ रहा है; वह तो जंगली सांड के समान बल रखता है, जाति-जाति के लोग जो उसके द्रोही हैं उनको वह खा जाएगा, और उनकी हड्डियों को टुकड़े-टुकड़े करेगा, और अपने तीरों से उनको बेधेगा।
मत यीशु का बचपन: मत्ती 2:15 का अर्थ
सीधे शब्दों में कहा जाए तो मत्ती 2:15 में कहा गया है कि यीशु फिर मिस्र में रहे, जब तक हरोदेस की मौत नहीं हो गई। इसका लक्ष्य यह है कि प्रभु के भविष्यवक्ता के अनुसार सच हुआ कि “मैंने अपने पुत्र को मिस्र से बुलाया।”
प्रसंगिक पृष्ठभूमि
यहोशेप्ल पुत्रों के जन्म के समय य़िशु का जन्म जुदा-जहाँ में हुआ था। हरोदेस ने नवजात राजकुमार को खत्म करने के लिए एक योजना बनाई, ताकि उसका शासन खतरे में न पड़े। मिस्र की यात्रा का उद्देश्य प्रभु की योजना के अनुरूप था: जब तक कि खतरा न टल जाए, तब तक यीशु वहीं रहे और फिर घर लौट आए जब प्रभु की सुरक्षा और सही समय हो। यह घटनाक्रम पुराने नियम के अवसर-चक्र के साथ जुड़ता है, जिसमें मिस्र से लौटना और पुत्र-कार्य की शुरूआत का संकेत मिलता है।
व्याख्यात्मक अवलोकन
संक्षिप्त थीमैटिक सूची
अनুचित क्रॉस-रेफरेंसेस (संशोधित सार)
होशे 11:1 का संदर्भ: “मैंने अपने पुत्र को मिस्र से बुलाया”—यह पुरानी वाचा के उद्धार-योजना को नए कथानक के साथ जोड़ता है, जैसे कि परमेश्वर अपने नये सेवक को भी पुराने इतिहास में स्थापित कर रहा है।
यशायाह 11:1-2 जैसी विचारधारा: प्रभु की पवित्र आत्मा और प्रेरणा के साथ राजा का आगमन एकत्रित होता है, जो उद्धार का काम करता है।
यूहन्ना 1:14: शब्द बनकर आना—पवित्र शिशु के जन्म की आरोही महिमा की याद दिलाता है कि परमेश्वर ने अपने पुत्र को मानव-रूप में बुलाया ताकि उद्धार संभव हो। (संकेतार्थक संदर्भ)
व्यावहारिक takeaway
हमें यह सीख मिलती है कि खतरे और अंधकार के समय भी परमेश्वर की सुरक्षित योजना गतिविध है। विश्वासयोग्य लोग जो आज भी विपरीत परिस्थितियों में रहते हैं, वे प्रभु के मार्गदर्शन और सुरक्षा पर भरोसा रखें, क्योंकि वह अपने समय पर सत्य को पूरा करता है।