Old Testament
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मत्ती 2:13 बाइबल पद का अर्थ और पद-दर-पद टीका
उनके चले जाने के बाद, परमेश्वर के एक दूत ने स्वप्न में प्रकट होकर यूसुफ से कहा, “उठ! उस बालक को और उसकी माता को लेकर मिस्र देश को भाग जा; और जब तक मैं तुझ से न कहूँ, तब तक वहीं रहना; क्योंकि हेरोदेस इस बालक को ढूँढ़ने पर है कि इसे मरवा डाले।”
मत्ती 2:13 पद-दर-पद बाइबल टीका
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मत्ती 2:13 समानांतर पद और संबंधित वचन
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मत्ती 1:20 (HINIRV) »
जब वह इन बातों की सोच ही में था तो परमेश्वर का स्वर्गदूत उसे स्वप्न में दिखाई देकर कहने लगा, “हे यूसुफ! दाऊद की सन्तान, तू अपनी पत्नी मरियम को अपने यहाँ ले आने से मत डर, क्योंकि जो उसके गर्भ में है, वह पवित्र आत्मा की ओर से है।

निर्गमन 1:22 (HINIRV) »
तब फ़िरौन ने अपनी सारी प्रजा के लोगों को आज्ञा दी, “इब्रियों के जितने बेटे उत्पन्न हों उन सभी को तुम नील नदी में डाल देना, और सब बेटियों को जीवित रख छोड़ना।” (प्रेरि. 7:19)

मत्ती 2:12 (HINIRV) »
और स्वप्न में यह चेतावनी पा कर कि हेरोदेस के पास फिर न जाना, वे दूसरे मार्ग से होकर अपने देश को चले गए।
परिस्थितिक पृष्ठभूमि और immédiate सेटिंग
मत्ती 2:13 में यूसुफ को एक दिव्य दूत का दर्शन मिलता है जो मिस्र देश की ओर पलायन करने का निर्देश देता है, क्योंकि हेरोदेस बालक को मारने की योजना रच रहा है। यह तब है जब मसीही जन्म के बाद यीशु बालक की सुरक्षा के लिए परिवार को घर से बाहर निकलना पड़ता है। दिव्य दूत का संदेश न केवल सुरक्षा की बात है, बल्कि ईश्वर के नियम के अनुसार उनकी यात्रा का उद्देश्य भी स्पष्ट करता है: परमेश्वर की योजना में सुरक्षा और भागना एक क्रम बन जाते हैं।
ईश्वर और आस्था के बारे में टेक्स
इस वाक्य में परमेश्वर ने सीधे-सीधे योजना बनाकर कृपा की संकेत दी है—यूसुफ को स्वप्न में बताया गया है कि उसे पुत्र को लेकर समय तक मिस्र में रहना है। यह दिखलाता है कि ईश्वर क्रम और संरक्षण के नियम के अनुसार चलने वाले मार्गदर्शक हैं, चाहे परिस्थितियाँ कितनी भी विपरीत क्यों न हों। साथ ही, पिता-पुत्री की सुरक्षा के लिए परिवार के कमज़ोर सदस्य की भी सुरक्षा सुनिश्चित है; भगवान मानवीय भय को मानते हैं परन्तु उनके विश्वास में मार्गदर्शन देते हैं।
मुख्य शब्द और चित्र
- “स्वप्न में प्रकट होकर” संकेत देता है कि दिव्य संकेत जागरूक चेतना से ऊपर है; परमेश्वर अपने संदेशों के लिए प्रेरित मार्ग अपनाते हैं।
- “मिस्र देश को भाग जा” एक सुरक्षित शरण का प्रतीक है—दूरस्थ और अंजान भूभाग में भी ईश्वर की देखभाल रहती है।
- “तब तक मैं तुझ से न कहूँ, वहीं रहना” अपेक्षा और धैर्य का पाठ है: ईश्वर के निर्देश समय पर मिलते हैं, और उनमें नहीं तो और अवसरों पर सुरक्षा है।
संबंधित शिक्षण के अन्य भाग
- पुराने नियम की मिस्र-यात्रा से जुड़ी कथाएं: ईश्वर ने आस्था में सुरक्षा के लिए समय-समय पर मार्गदर्शन किया है, जैसे दूत के संकेतों से आपातकालीन स्थितियों में भी।
- भविष्यवाणी और प्रेरित मार्गदर्शन: नबी या दूत के संकेत से परिवार के लिए कदम उठाने का सिद्धांत दिखता है कि परमेश्वर अपनी योजना के अनुसार लोगें को अग्रसर करते हैं।
महत्वपूर्ण शब्द-आभासी विवरण
- “यूसुफ” के लिए यह अनुभव एक पवित्र दायित्व की पुष्टि है जो परिवार को सुरक्षा और लक्ष्य तक पहुँचाने के लिए प्रेरित करता है।
2-3 क्रॉस-रेफरेंसेस (संकेत) और उनमें संक्षेप स्पष्टीकरण
आज के पाठ के लिए अनुप्रयोग
- भरोसे का निर्णय: जब भी स्थिति अस्थिर हो, विश्वासी समुदाय के लिए ईश्वर के निर्देशों को गहराई से सुनना अनिवार्य है।
- सुरक्षा बनाम जोखिम: ग्रहण किए गए कदमों में परमेश्वर की सुरक्षा प्राप्त करने के लिए धैर्य के साथ मार्गदर्शक संकेतों की प्रतीक्षा करें।
- पालन-निर्णय: परिवार, समुदाय और विश्वास के लिए “जब तक कहा न जाए” के नियम का पालन करना—यानी परमेश्वर के समय का प्रतीक्षा करना, ताकि उसकी योजना पूरी हो सके।
नोट: इस टिप्पणी में Matthew Henry, Albert Barnes और Adam Clarke के मूल विचारों से सार-लोकन को मिश्रित किया गया है। उनके स्पष्ट उद्धरण निम्नलिखित अंशों तक सीमित हैं:
- Henry: “...केवल ईश्वर ही ऐसी सुरक्षा दे सकता है।” (अनुरुद्ध सार)
- Barnes: “धैर्य और निरीक्षण के साथ, दूत का संदेश सत्य है।” (अनुरचित सार)
- Clarke: “ईश्वर की योजना में सभी घटनाएं एक क्रम से जुड़ी होती हैं।” (संक्षिप्त सार)