Old Testament
उत्पत्ति निर्गमन लैव्यव्यवस्था गिनती व्यवस्थाविवरण यहोशू न्यायियों रूत 1 शमूएल 2 शमूएल 1 राजाओं 2 राजाओं 1 इतिहास 2 इतिहास एज्रा नहेम्याह एस्तेर अय्यूब भजन संहिता नीतिवचन सभोपदेशक श्रेष्ठगीत यशायाह यिर्मयाह विलापगीत यहेजकेल दानिय्येल होशे योएल आमोस ओबद्याह योना मीका नहूम हबक्कूक सपन्याह हाग्गै जकर्याह मलाकीमत्ती 2:5 बाइबल पद की व्याख्या
मत्ती 2:5 बाइबल पद का अर्थ और पद-दर-पद टीका
उन्होंने उससे कहा, “यहूदिया के बैतलहम में; क्योंकि भविष्यद्वक्ता के द्वारा लिखा गया है :
मत्ती 2:5 पद-दर-पद बाइबल टीका
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मत्ती 2:5 समानांतर पद और संबंधित वचन
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रूत 1:1 (HINIRV) »
जिन दिनों में न्यायी लोग न्याय करते थे* उन दिनों में देश में अकाल पड़ा, तब यहूदा के बैतलहम का एक पुरुष अपनी स्त्री और दोनों पुत्रों को संग लेकर मोआब के देश में परदेशी होकर रहने के लिए चला।

यूहन्ना 7:42 (HINIRV) »
क्या पवित्रशास्त्र में नहीं लिखा कि मसीह दाऊद के वंश से और बैतलहम गाँव से आएगा, जहाँ दाऊद रहता था?” (यशा. 11:1, मीका 5:2)

रूत 2:4 (HINIRV) »
और बोआज बैतलहम से आकर लवनेवालों से कहने लगा, “यहोवा तुम्हारे संग रहे,” और वे उससे बोले, “यहोवा तुझे आशीष दे।”
मत्ती 2:5 पर टिप्पणी (HINIRV)
परोक्ष संदर्भ में यह पद यीशु का जन्म कथा से जुड़ा है, जब ज्ञानियों के मार्गदर्शन से वे यरूशलेम लौटते हैं और यहूदिया के राजा हिरण्यों के समय में बालक के बारे में जानकारी मांगते हैं। पाठ में यह स्पष्ट किया गया है कि बालक के जन्म की सूचना बैतलहम के भीतर एक भविष्यवाक के अनुसार दी गई थी; यह दर्शाता है कि यीशु—जो आगे चलकर मसीह के रूप में प्रकट होंगे—प्रचीन धर्मग्रंथों के पूर्ण निर्देश के अनुसार जन्म लेते हैं।
केंद्रीय अर्थ
यह verse बताता है कि बचपन में ही यीशु का जन्म स्थान एक प्राचीन भविष्यवाणी के साथ जुड़ा है। लोग यह मानते हैं कि मसीह का जन्म अवश्य कहीं बैतलहम में ही होना था, जैसा कि पुरानी पैग़भती में लिखा गया है। और राजा के संदेशों के पीछे भी यह संकेत है कि परमेश्वर की योजना इतिहास के केंद्र में है और वह अपने उद्धारकर्ता पर प्रकाश डालते हैं।
मुख्य विषय
संलग्न क्रॉस-रेफरेंसे]
1) मत्ती 2:1-6 में वही विचार दोहराये जाते हैं, जहाँ मग धनुष और यशायाह की भविष्यवाणी से यह दिखता है कि जन्म स्थान की चर्चा कैसे भविष्य के उद्धारक का संकेत बनती है।
2) माइकल 5:2 भी बैतलहम के महत्त्व को मसीह के जन्म के साथ जोड़ता है, जो स्पष्ट रूप से यह दिखाता है कि घड़ी-घड़ी घटनाओं के भीतर परमेश्वर का विधान होता है।
3) प्रेरितों के काम 13:22-23 में क्रिस्तय जन्म के संदर्भ में उद्धारकर्ता का समय और जन्म स्थान फिरसे उजागर होता है, जिससे यह कल्पना मजबूत होती है कि इतिहास में उद्धार का क्रम एक नियत योजना के अनुसार चलता है।
व्यावहारिक चिंतन
पहचान: हमारे जीवन में छोटी-छोटी घटनाओं में भी परमेश्वर की योजना के संकेत मिल सकते हैं। विश्वास रखना कि परमेश्वर का समय बिल्कुल सही होता है, हमें धैर्य और आशा देता है।
संक्षेप निष्कर्ष
यह verse दिखाता है कि मसीही इतिहास में यीशु का जन्म बैतलहम में हुआ था—एक भविष्यवाणी के अनुसार—जो यह कि परमेश्वर की उद्धार योजना सच और नि:संदेह समय पर पूरी होती है। यह विश्वास के लिए प्रेरणा है कि परमेश्वर की योजना मानवीय भ्रम के बावजूद संचालित होती है।