Old Testament
उत्पत्ति निर्गमन लैव्यव्यवस्था गिनती व्यवस्थाविवरण यहोशू न्यायियों रूत 1 शमूएल 2 शमूएल 1 राजाओं 2 राजाओं 1 इतिहास 2 इतिहास एज्रा नहेम्याह एस्तेर अय्यूब भजन संहिता नीतिवचन सभोपदेशक श्रेष्ठगीत यशायाह यिर्मयाह विलापगीत यहेजकेल दानिय्येल होशे योएल आमोस ओबद्याह योना मीका नहूम हबक्कूक सपन्याह हाग्गै जकर्याह मलाकीमत्ती 2:14 बाइबल पद की व्याख्या
मत्ती 2:14 बाइबल पद का अर्थ और पद-दर-पद टीका
तब वह रात ही को उठकर बालक और उसकी माता को लेकर मिस्र को चल दिया।
मत्ती 2:14 पद-दर-पद बाइबल टीका
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मत्ती 2:14 समानांतर पद और संबंधित वचन
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मत्ती 2:20 (HINIRV) »
“उठ, बालक और उसकी माता को लेकर इस्राएल के देश में चला जा; क्योंकि जो बालक के प्राण लेना चाहते थे, वे मर गए।” (निर्ग. 4:19)

मत्ती 1:24 (HINIRV) »
तब यूसुफ नींद से जागकर परमेश्वर के दूत की आज्ञा अनुसार अपनी पत्नी को अपने यहाँ ले आया।

प्रेरितों के काम 26:21 (HINIRV) »
इन बातों के कारण यहूदी मुझे मन्दिर में पकड़कर मार डालने का यत्न करते थे।
मुख्य टिप्पणी बिंदु
मत्ती 2:14 में जो घटना वर्णित है, वह आशीर्वादी इतिहास की एक आरोहण-सीढ़ी है: ईस piger को पृथ्वी पर सुरक्षित रखने हेतु पवित्र परिवार मिस्र की ओर पलायन करता है। यह वाकया परमेश्वर की योजना की सतर्क सुरक्षा और भविष्य की परीक्षा-सम्बत योजनाओं की पुष्टि करता है। परमेश्वर अपने बालक को मानव इतिहास के अंधकार में भी प्रकाश बनाकर ले जाता है, ताकि उद्धार के मार्ग पर अग्रसर रहे।
काव्यात्मक कथा-संदर्भ (लिटरेरी_CONTEXT)
यहLECTION अपने पूर्ववेदना में मति के उत्तरदायित्व और ईश्वर के निर्देशों के पालन की प्रतीक है। राजा हरुद के पासागमन के समय बालकों के उद्धार हेतु ब्रह्मस्वर की आवाज़ ने माता-पिता की योग्यता और विश्वास को परखा। मग्न-प्रेरित न रहते हुए जो लोग इमानदारी से परमेश्वर की आज्ञाओं का पालन करते हैं, वे भीषण समय में भी कुटुम्ब के लिए सुरक्षा पा लेते हैं।
दर्शन-गंभीरता (Theological Significance)
मिस्र पलायन यह दर्शाता है कि यीशु का जन्म एक सामयिक राजनीतिक समरूपता से ऊपर उठकर एक दायित्वपूर्ण उद्धारक के रुप में जन्म लिया है। यह क्रमिक पालन से दिखाता है कि प्रभु का विधान समय के हिसाब से पूरा होता है: पिता की आज्ञा मानते हुए माता-पिता की देखरेख में बालक सुरक्षित रहता है। साथ ही, मिस्र की यात्रा एक नयी पहचान के आरम्भ का संकेत है—पथों की सुरक्षा और विश्वास की यात्रा।
अनुवादिक-सम्बन्ध (Cross-references)
इन संदर्भों में स्पष्ट है कि परमेश्वर अपने बच्चों के लिए सुरक्षा और मार्गदर्शन का स्थायी स्रोत है, जो विपत्ति के समय भी निरंतर रहते हैं।
पढ़न के लिए प्रश्न (Reflection Questions)
संक्षिप्त निष्कर्ष
मसीह-यात्रा के इस चरण में परमेश्वर की सुरक्षा और मार्गदर्शना स्पष्ट है: पिता की आज्ञा के अनुसार बालक और उसकी माता का पलायन एक नयी शुरुआत का संकेत है—रिश्तों की सुरक्षा, विश्वास की परीक्षा और उद्धार की तैयारी।
आर्ची-आइडेंट (Public-domain insights)
इस दृष्य में पुराने प्रचारक विचार यह रहे हैं कि पिता की आज्ञा मानना और तत्काल प्रतिक्रिया से ही परमेश्वर के उद्देश्य पूरे होते हैं। उदाहरणार्थ, प्रसिद्ध प्रचारक Matthew Henry, Albert Barnes और Adam Clarke ने इस पल को आध्यात्मिक सुरक्षा और ईश्वर-निर्देश की पालन-योग्यता के रूप में समझाया है—यहाँ उनके कभी-कभी सीमित उद्धरण नीचे स्रोतों के रूप में संक्षेपित हैं:
- Matthew Henry के अनुसार, विदेशी-यात्रा में भावी संचालकता और विश्वास-परिक्षण एक साथ मिलती है; यह पल एक प्रकार का दृढ़ता-उत्साह है। (सूचित सार)
- Albert Barnes ने इस स्थिति में माता-पिता की सावधानी और ईश्वर की आज्ञाओं की मान्यता को पहचानने योग्य कहा है। (सूचित सार)
- Adam Clarke ने पलायन को एक पवित्र-निर्देशन के साथ जुड़ा माना है, ताकि पालन में उद्धार योग्य हो सके। (सूचित सार)
नोट: ऊपर दिए गए लेखक-उद्धरण सीधे पूर्ण टेक्स्ट नहीं हैं; प्रयुक्त विचार उनके सार्वजनिक-डोमेन सहयोग से प्रेरित हैं, और संक्षेप में व्याख्यायित हैं।