Old Testament
उत्पत्ति निर्गमन लैव्यव्यवस्था गिनती व्यवस्थाविवरण यहोशू न्यायियों रूत 1 शमूएल 2 शमूएल 1 राजाओं 2 राजाओं 1 इतिहास 2 इतिहास एज्रा नहेम्याह एस्तेर अय्यूब भजन संहिता नीतिवचन सभोपदेशक श्रेष्ठगीत यशायाह यिर्मयाह विलापगीत यहेजकेल दानिय्येल होशे योएल आमोस ओबद्याह योना मीका नहूम हबक्कूक सपन्याह हाग्गै जकर्याह मलाकीमत्ती 2:21 बाइबल पद की व्याख्या
मत्ती 2:21 बाइबल पद का अर्थ और पद-दर-पद टीका
वह उठा, और बालक और उसकी माता को साथ लेकर इस्राएल के देश में आया।
मत्ती 2:21 पद-दर-पद बाइबल टीका
*** इस टीका में सार्वजनिक डोमेन में उपलब्ध कुछ प्राचीन और क्लासिक स्रोतों की सामग्री शामिल है। कुछ सामग्री को कृत्रिम बुद्धिमत्ता उपकरणों की सहायता से संसाधित, संक्षिप्त या अनुवादित किया गया हो सकता है। हर व्याख्या को बाइबल के पूरे पाठ और उसके संदर्भ के साथ अवश्य जाँचें। यदि आपको कोई त्रुटि या ऐसा अनुवाद मिले जिसे सुधारने की आवश्यकता हो, तो कृपया हमसे संपर्क करें।
मत्ती 2:21 समानांतर पद और संबंधित वचन
उन बाइबल पदों को देखें जो विषय, शिक्षा या संदर्भ के आधार पर इस अंश से जुड़े हैं। समानांतर पदों की तुलना करने से इस वचन के संदर्भ और संदेश को अधिक गहराई से समझने में सहायता मिलती है। किसी चित्र को चुनें और संबंधित पद, उसकी व्याख्या तथा पद-दर-पद बाइबल टीका देखें।

इब्रानियों 11:8 (HINIRV) »
विश्वास ही से अब्राहम जब बुलाया गया तो आज्ञा मानकर ऐसी जगह निकल गया जिसे विरासत में लेनेवाला था, और यह न जानता था, कि मैं किधर जाता हूँ; तो भी निकल गया। (उत्प. 12:1)

सीधा अर्थ
मत्ती 2:21 का सरल संदेश यह है कि यूसुफ ने स्वर्गदूत के निर्देशानुसार नाज़रेथ लौटने का निर्णय लिया, और इसराइल के देश में—खासकर नाज़रेथ—यीशु और उसकी माता मरियम के साथ आ बसे। यह वचन दर्शाता है कि शिशु मसीह का बचपन अब मिस्र से लौटकर उस देश में स्थापित होना है जहाँ उसका पालन-पोषण होगा।
प्रसंगिक पृष्ठभूमि
पिछले अध्यायों में हमने देखा कि हेरोदेस के क्रूर शासन से बचाने के लिए स्वर्गदूत ने यूसुफ को दीप-वाणी दी और उन्होंने मरियम व बालक को लेकर मिस्र भाग लिया था (मत्ती 2:13–15)। हेरोदेस की मृत्यु के बाद एक अन्य स्वपन-निर्देश आया जो बताता है कि अब समय आया है वापसी का। यह वचन जन्म-परिकल्पना और नबीयता के पूरे सेटिंग में आता है, जहाँ पुरातन भविष्यवाणियाँ और दैवी निर्देश बच्चों के भविष्य को सुरक्षित बनाते हैं।
व्याख्यात्मक टिप्पणियाँ
1) "वह उठा"—यह वाक्यांश यूसुफ के तत्काल आज्ञापालन और निष्क्रिय न रहने को दर्शाता है; स्वर्गदूत के शब्द सुनने के बाद उन्होंने तुरंत क्रिया की।
2) "इस्राएल के देश में आया"—यह व्यापक शब्द है; पवित्र कहानी नाज़रेथ के आसपास के क्षेत्र में उनके बसने की ओर संकेत करती है, और इससे यह भी जुड़ा है कि यीशु को "नाज़र" कहा जाना था।
3) पारस्परिक सुरक्षा और नियति—मिस्र से वापसी एक ऐतिहासिक सिद्धांत की तरह नहीं, बल्कि दैवी मार्गदर्शिता एवं भविष्यवाणियों के पूरा होने का संकेत है। यूसुफ का पालन-पोषण करते हुए मरियम तथा बालक के साथ लौटना परिवारिक जिम्मेदारी और विश्वास की अभिव्यक्ति दोनों है।
सामयिक संदर्भ और भाषा
उन दिनों यात्रा कठिन थी; इसलिए यह वापसी साहस, व्यवस्था और भरोसे की मिसाल है। यही वचन पाठक को यह भी याद दिलाता है कि परमेश्वर अपने योजना के अनुसार लोगों और परिवारों को निर्देश देता है और वे जो आज्ञाकारिता दिखाते हैं, उसके माध्यम से योजना पूरी होती है।
थीमेटिक सूची
प्रासंगिक संदर्भ (क्रॉस-रेफरेंस)
1) मत्ती 2:14–15 — मिस्र में रहने और फिर से "उठने" के विवरणों से यह वचन जुड़ा है; वहां बताया गया कि यह सब परमेश्वर के आदेश से हुआ।
2) ओशाया 11:1 तथा मिकाह 5:2 — ये भविष्यवाणियाँ मसीह की जड़ों और स्थान के बारे में पृष्ठभूमि प्रदान करती हैं; मत्ती अक्सर पुराने नियम के संदर्भों से यह दिखाने की कोशिश करता है कि यीशु की घटना नबीयता के अनुसार हुई।
3) लूका 2:39 — यहाँ भी पेरिपाटी का एक समान विचार मिलता है जहाँ यूसुफ और मरियम घर लौटते हैं; दोनों सुसमाचारों के मेल से बचपन वर्णन को पुष्ट किया जा सकता है।
हैन्मैथ्यू हेनरी / बार्न्स / क्लार्क से संक्षिप्त उद्धरण
यहाँ कोई लंबा उद्धरण न लेकर केवल संक्षिप्त उद्धरण शामिल किए जा रहे हैं: मैथ्यू हेनरी ने कहा, "उपदेश सुनकर यूसुफ ने शीघ्रता से पालन किया",—यह वाक्य यूसुफ की तत्परता को रेखांकित करता है। (मैथ्यू हेनरी, सार्वजनिक डोमेन संदर्भ)
आचार्यात्मक निष्कर्ष और उपयोगी शिक्षा
मत्ती 2:21 हमें दिखाता है कि परमेश्वर के निर्देशों पर विश्वास और तत्पर आज्ञाकारिता परिवार और जीवन की दिशा बदल सकती है। यूसुफ का नम्र और सक्रिय व्यवहार आज के पाठक के लिए उदाहरण है: भय के समय भी विश्वासपूर्वक कदम उठाना चाहिए। इसी प्रकार, ईश्वरीय समय और मार्गदर्शन को पहचानकर जीवन की योजनाएँ इसके अनुरूप समायोजित करनी चाहिए।