Old Testament
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मत्ती 2:17 बाइबल पद का अर्थ और पद-दर-पद टीका
तब जो वचन यिर्मयाह भविष्यद्वक्ता के द्वारा कहा गया था, वह पूरा हुआ
मत्ती 2:17 पद-दर-पद बाइबल टीका
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मत्ती 2:17 समानांतर पद और संबंधित वचन
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मत्थईं 2:17 का अर्थ: यिर्मयाह के अनुसार पूरा हुआ शोक
सीधे शब्दों में इसका मतलब है: वह शोक और दुःख जो बालक बच्चा-यात्राओं में मथ्दी के परिवार पर टूटा, वह उन भविष्यवाणी-सूत्रों के अनुरूप आयी जिन्हें यिर्मयाह ने कहा था। इस पद के पीछे का सार यह है कि ईश्वर के प्रतिनिधि-युग में घटे दुख भी पूर्णतया शास्त्र के अनुसार चलेंगे और परमेश्वर की योजना का भाग होते हैं।
प्रसंगगत पृष्ठभूमि
येशू के जन्म के समय ईरान-रोम के साम्राज्य के भीतर इजराइल के बड़े भागों में राजनीतिक अशांति और सामाजिक उलटफेर था। मत्ती लेखक ने यह घटना उद्धरित कर यह दिखाने की कोशिश की है कि बाल-हत्याओं जैसी त्रासदियाँ भी परमेश्वर की पूर्व-निर्धारित योजना के भाग हैं, ताकि पवित्र शास्त्रों में जो लिखा गया था वह सच हो। यिर्मयाह जैसी नबी-प्रतिपादित भविष्यवाणी यहाँ पूर्ण होती है, जब बालकों की हत्या का शोक सुनसान क्षेत्रों में फैला।
मुख्य interpretive बिंदु
थीमगत छोटे बिंदु
अन्य प्रासंगिक पद पूछताछ (क्रॉस-रेफरेंस)
यिर्मयाह 31:15 — बालक-शवों के बीच रोना: यह भविष्यवाणी के रूपक के रूप में मत्ती के लेखन से मेल खाती है कि शिशुओं का कष्ट परमेश्वर की नीतियों के अनुसार था।
यहोशू 6:26 — प्रसिद्ध शास्त्र-उद्धरण: यह दिखाता है कि पूजा-कर्मों में विशेष चेतावनियाँ और कृत्यों के परिणाम समय-समय पर स्पष्ट होते हैं।
मत्ती 2:3-6 — राजा हरद का त्रास: मत्ती ने इस खंड में यह स्थापित किया कि वह दृश्य परिस्थिति भी यीशु के जन्म-कथानक के नये आयाम बताते हैं।
संक्षेपित निष्कर्ष
इस एक वाक्य में मत्ती का उद्देश्य है कि यीशु का जीवन पुराने भविष्यवाणी-ध्वनियों के साथ संगम बनाता है। शिशु-यात्रा के समय जिन बच्चों की हत्या का समाचार है, वे केवल दुख का कारण नहीं, बल्कि ईश्वर की सशक्त योजना का एक भाग हैं। यह याद दिलाता है कि शांति और उद्धार की राह में भी विपत्ति आती है, पर परमेश्वर की शुद्ध योजना अंततः सत्यापित होती है।
व्यावहारिक takeaway
हम यह सीखते हैं कि कठिन समय में भी ईश्वर के उद्देश्य पर अडिग रहें; दुख के क्षणों में भी वह हमारे साथ है और इतिहास की बारीकियों में वह समान्य से भी बड़ा काम कर रहा है।
उद्धरण संदर्भ: नीचे दिए गए विचार public-domain commentaries से प्रेरित हैं; जैसे Matthew Henry, Albert Barnes, और Adam Clarke के तात्पर्यगत शब्द यदि उपलब्ध हों, उसे उद्धृत किया गया है. स्पष्ट उद्धरण यदि किसी जगह आया हो, उसे नीचे दिया गया है:
कटाक्ष-उद्धरण (सीमित): “...उपर्युक्त विचारकों के शब्दों के संकेतन”