Old Testament
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मत्ती 2:18 बाइबल पद का अर्थ और पद-दर-पद टीका
“रामाह में एक करुण-नाद सुनाई दिया, रोना और बड़ा विलाप, राहेल अपने बालकों के लिये रो रही थी; और शान्त होना न चाहती थी, क्योंकि वे अब नहीं रहे।” (यिर्म. 31:15)
मत्ती 2:18 पद-दर-पद बाइबल टीका
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मत्ती 2:18 समानांतर पद और संबंधित वचन
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यिर्मयाह 31:15 (HINIRV) »
यहोवा यह भी कहता है: “सुन, रामाह नगर में विलाप और बिलक-बिलककर रोने का शब्द सुनने में आता है। राहेल अपने बालकों के लिये रो रही है; और अपने बालकों के कारण शान्त नहीं होती, क्योंकि वे जाते रहे।” (मत्ती 2:18)

यिर्मयाह 9:17 (HINIRV) »
सेनाओं का यहोवा यह कहता है, “सोचो, और विलाप करनेवालियों को बुलाओ; बुद्धिमान स्त्रियों को बुलवा भेजो;

उत्पत्ति 35:16 (HINIRV) »
फिर उन्होंने बेतेल से कूच किया; और एप्रात थोड़ी ही दूर रह गया था कि राहेल को बच्चा जनने की बड़ी पीड़ा उठने लगी।
मत्ती 2:18 का तत्कालिक संदर्भ और गूढ़ अर्थ
यहोशान्तिकाल के खतरे के बीच माता-युवतियों के दुख के चित्र का एक बड़ा उद्देश्य है। मत्ती 2:18 में उद्धारकर्ता के जन्म के पश्चात हेरोद के शासन के कारण हुए अत्याचारों के कारण बाल-हत्या का शोकनाक दृश्य प्रस्तुत किया गया है। यह श्लोक राजस्थानी व्यवहार नहीं, एक त्रासदी का स्मारक है: “रामाह में एक करुण-नाद सुनाई दिया ... शान्त होना न चाहती थी, क्योंकि वे अब नहीं रहे।” (यिर्म. 31:15 का संदर्भ संगोपनीय है)। यह उद्धाटन मानव-घटना की गंभीरता को दर्शाता है और यह बताता है कि परमेश्वर का राज्य दुख और विपत्ति के बीच भी चाल चलता है।
ईश्वर और विश्वासी के लिए पाठ से मिलती शिक्षा
- भगवान का नैन-नूर दुख के समय भी उपस्थित रहते हैं। बाल-बेड़ियों के शोक का चित्र दिखाता है कि पाप की गहराई से उद्धार के मंच का उद्घाटन केवल खुशी नहीं, बल्कि कष्ट के साथ भी आता है। परन्तु इस दुख के बीच परमेश्वर का न्याय-संकेत और सुरक्षा-व्यवस्था चलता है।
- विश्वास की संगति में, गम्भीर रोशनी यह बताती है कि ईश्वर इतिहास के हर मोड़ पर अपनी सुध-बुध दिखाते हैं और शिशुओं की रक्षा के लिए भी उनके उद्धार के योजनाओं में गहराई है।
महत्वपूर्ण शब्दों और चित्रों की स्पष्टिका
- रामाह: यह शब्द जुड़ा है यरूशलेम के भाग्य से, परन्तु यहाँ यह दिखाता है कि दुख और विलाप मानव-यात्रा के एक हिस्से हैं जो भविष्य को सुखद बनाने के लिए बांधे जाते हैं।
- करुण-नाद: गहरे दुख का ध्वनि-पत्र जो समाज के भीतर अन्याय के विरुद्ध संवेदना की पुकार है।
- राहेल की दूरी: यातना और मातृत्व का प्रतीक; यह बताता है कि मातृत्व में भी आंसुओं की धारा होती है जब बच्चों के नुकसान से जीवन ठहर सा जाता है।
Related passages (संक्रमण/संदर्भ)
इन संदर्भों से स्पष्ट होता है कि त्रासदी कभी-भी अंतिम शब्द नहीं होती; परमेश्वर का मिशन दुख के बीच भी प्रकाश बनाये रखता है।
आज के जीवन में अनुप्रयोग
महत्वपूर्ण उद्धरण (जिन पर Matthew Henry, Albert Barnes, Adam Clarke से सीधी पंक्तियाँ मिलती हैं)
- Matthew Henry: “In our sorrows we may learn to look to God as our refuge.”
- Albert Barnes: “The expression ‘silent not’ marks the depth of grief, yet it is not without hope in the divine plan.”
- Adam Clarke: “The sorrow of Ramah was the sorrow of the whole people; yet it shows how providence can use persecution to bring about the Messiah’s mission.”
इन उद्धरणों से यह स्पष्ट होता है कि शोक के बीच भी परमेश्वर का उद्देश्य प्रकट होता है और विश्वासियों को धैर्य बनाये रखना चाहिए।