Old Testament
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मत्ती 2:11 बाइबल पद का अर्थ और पद-दर-पद टीका
और उस घर में पहुँचकर उस बालक को उसकी माता मरियम के साथ देखा, और दण्डवत् होकर बालक* की आराधना की, और अपना-अपना थैला खोलकर उसे सोना, और लोबान, और गन्धरस की भेंट चढ़ाई।
मत्ती 2:11 पद-दर-पद बाइबल टीका
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मत्ती 2:11 समानांतर पद और संबंधित वचन
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यशायाह 60:6 (HINIRV) »
तेरे देश में ऊँटों के झुण्ड और मिद्यान और एपा देशों की साँड़नियाँ इकट्ठी होंगी; शेबा के सब लोग आकर सोना और लोबान भेंट लाएँगे और यहोवा का गुणानुवाद आनन्द से सुनाएँगे। (भज. 72:10, मत्ती 2:11)

भजन संहिता 72:10 (HINIRV) »
तर्शीश और द्वीप-द्वीप के राजा भेंट ले आएँगे, शेबा और सबा दोनों के राजा उपहार पहुँचाएगे।

मत्ती 2:2 (HINIRV) »
“यहूदियों का राजा जिसका जन्म हुआ है, कहाँ है? क्योंकि हमने पूर्व में उसका तारा देखा है और उसको झुककर प्रणाम करने आए हैं।” (गिन. 24:17)
मत्थि 2:11 का अर्थ और पृष्ठभूमि
इस पाठ में बतौर महत्त्वपूर्ण घटना: जेम्स के पुत्र यीशु का जन्म एक नन्हे घर में हुआ और वहाँ वे तीन आगंतुक महामान्वित लोग—तीन साधु—उनके पास आकर बालक को दण्डवत् कर उसका पूर्ण सम्मान करते हैं। वे सोना, लोबान और गन्धरस की भेंट चढ़ाते हैं। यह बताता है कि यीशु का जन्म एक विशिष्ट दैवीय उद्देश्य के साथ है और लोक-सभ्यता से ऊपर उठकर उसकी महिमा माननी होगी।
पृष्ठभूमि और संदर्भ
पूर्वकथा में प्रभु यीशु का जन्म बेतलेहम के भीतर एक घऱ में हुआ, जहाँ माता मरियम और पलित पुत्र यीशु थे। इस्त्राईल के जीवन-चक्र में यह आशीर्वादमंडल घटना है—तीन यात्रा करके आये होनहार पुरुष उनके लिए प्रतीकात्मक रूप से प्रतिनिधि हैं कि नयी दुनिया के उद्धारकर्ता का आगमन किनके लिए है और उनकी मान्यता कैसे होगी।
व्याख्या के नमूनेदार विचार
त्वरित थीम-सूचीय मार्गदर्शक विचार
क्रॉस-रेफरेंसेस और उनका छोटा संकेत
1) मत्ती 2:2 – यीशु के जन्म के समय रोशनी से भरे राजाओं का आगमन; 2) लूका 2:11 – उद्धारकर्ता का जन्म अभिलाषित नगर में; 3) यशायाह 60:6 – जातियों के समर्पण और स्वर्ण-सम्पदा के प्रतीकात्मक संकेत। इन संदर्भों से एक स्पष्ट विचार निकलता है: यीशु का आगमन वैश्विक प्रकाश और उद्धार का शीर्ष है, न कि केवल एक देश-विशिष्ट घटना।
संक्षेपित व्यावहारिक निष्कर्ष
हमारा विश्वास यह कहता है कि उद्धारकर्ता का जन्म सभी लोगों के लिए है। हमारे नियम-उत्पादन, हमारी समृद्धि और हमारी जिंदगी में यीशु के प्रभाव को स्वीकारना और अपनी आध्यात्मिक यात्रा में उनकी आज्ञाओं के अनुसार चलना, ईमानदारी और श्रद्धा से जुड़ा हुआ है।
नोट: इस पाठ के साथ उपलब्ध पुरानी व्याख्या-उद्धरणों में, यदि सीधे उद्धरण दिए गए हों, तो नीचे उद्धृत हैं: मार्थेनी हेनरी, अल्बर्ट बार्न्स, और एडम क्लार्क के छोटे-छोटे उद्धरणों को आवश्यकतानुसार सम्मिलित किया गया है।