Old Testament
उत्पत्ति निर्गमन लैव्यव्यवस्था गिनती व्यवस्थाविवरण यहोशू न्यायियों रूत 1 शमूएल 2 शमूएल 1 राजाओं 2 राजाओं 1 इतिहास 2 इतिहास एज्रा नहेम्याह एस्तेर अय्यूब भजन संहिता नीतिवचन सभोपदेशक श्रेष्ठगीत यशायाह यिर्मयाह विलापगीत यहेजकेल दानिय्येल होशे योएल आमोस ओबद्याह योना मीका नहूम हबक्कूक सपन्याह हाग्गै जकर्याह मलाकीमत्ती 2:4 बाइबल पद की व्याख्या
मत्ती 2:4 बाइबल पद का अर्थ और पद-दर-पद टीका
और उसने लोगों के सब प्रधान याजकों और शास्त्रियों* को इकट्ठा करके उनसे पूछा, “मसीह का जन्म कहाँ होना चाहिए?”
मत्ती 2:4 पद-दर-पद बाइबल टीका
*** इस टीका में सार्वजनिक डोमेन में उपलब्ध कुछ प्राचीन और क्लासिक स्रोतों की सामग्री शामिल है। कुछ सामग्री को कृत्रिम बुद्धिमत्ता उपकरणों की सहायता से संसाधित, संक्षिप्त या अनुवादित किया गया हो सकता है। हर व्याख्या को बाइबल के पूरे पाठ और उसके संदर्भ के साथ अवश्य जाँचें। यदि आपको कोई त्रुटि या ऐसा अनुवाद मिले जिसे सुधारने की आवश्यकता हो, तो कृपया हमसे संपर्क करें।
मत्ती 2:4 समानांतर पद और संबंधित वचन
उन बाइबल पदों को देखें जो विषय, शिक्षा या संदर्भ के आधार पर इस अंश से जुड़े हैं। समानांतर पदों की तुलना करने से इस वचन के संदर्भ और संदेश को अधिक गहराई से समझने में सहायता मिलती है। किसी चित्र को चुनें और संबंधित पद, उसकी व्याख्या तथा पद-दर-पद बाइबल टीका देखें।

प्रेरितों के काम 23:9 (HINIRV) »
तब बड़ा हल्ला मचा और कुछ शास्त्री जो फरीसियों के दल के थे, उठकर यह कहकर झगड़ने लगे, “हम इस मनुष्य में कुछ बुराई नहीं पाते; और यदि कोई आत्मा या स्वर्गदूत उससे बोला है तो फिर क्या?”

1 इतिहास 24:4 (HINIRV) »
एलीआजर के वंश के मुख्य पुरुष, ईतामार के वंश के मुख्य पुरुषों से अधिक थे, और वे यों बाँटे गए: अर्थात् एलीआजर के वंश के पितरों के घरानों के सोलह, और ईतामार के वंश के पितरों के घरानों के आठ मुख्य पुरुष थे।

2 इतिहास 36:14 (HINIRV) »
सब प्रधान याजकों ने और लोगों ने भी अन्यजातियों के से घिनौने काम करके बहुत बड़ा विश्वासघात किया, और यहोवा के भवन को जो उसने यरूशलेम में पवित्र किया था, अशुद्ध कर डाला*।
मत्ती 2:4 का मुख्य interpretive बिंदु
फिलहाल पाठ इस बात को उजागर करता है कि शासन-प्रशासन के भीतर भी मसीह के जन्म की खबर संतोषजनक और ठोस आर्थिक-राजनैतिक संसार से कैसे टकराती है। प्रधान याजकों और शास्त्रियों से यह सवाल किया गया: मसीह कहाँ जन्म लेना चाहिए? यह युग-निर्णय नहीं था, बल्कि नियम-स्थिति की कसौटी थी: कौन-सी जगह लेकर वे इस ग्रहण और शासन की व्यवस्था के भीतर मसीह की वास्तविकता को प्रमाणित कर पाएंगे? यहाँ न केवल जन्म स्थान की चर्चा है, बल्कि धार्मिक नेतृत्व की जिम्मेदारी और आस्था के मानदंडों की पड़ताल भी है।
पुस्तक-परिप्रेक्ष्य ( literary context )
यह विवरण मत्ती के Gospel के आरम्भिक भाग का एक कोना दर्शाता है, जहाँ प्रभु यीशु का जन्म-प्रस्ताव और उसके बाद के घटनाक्रम क्रमबद्ध होते हैं। तत्कालीन याजक-शास्त्री व्यवस्था से यह स्पष्ट संकेत है कि मसीह की उपस्थिति एक विवेकशील खोज का विषय बनी रहेगी; धर्म-नेतृत्व उसे पहचानने के लिए गंभीरता से विचार करेगा, पर उनके विचार सत्ता-आधारित निर्णयों से प्रभावित हो रहे हैं।
आध्यात्मिक महत्व (theological significance)
इस प्रश्न से यह निष्कर्ष मिलता है कि मसीह का जन्म सिर्फ एक व्यक्तिगत घटना नहीं, बल्कि राष्ट्र-प्रशासन और धार्मिक व्यवस्था के सामने एक परीक्षण है: क्या वे आस्था के मानदंडों के अनुसार उत्तरायेंगे? मसीह की चाल अभी से विश्व के इतिहास के पन्नों में अपनी जगह बना रही है, और मानव-निर्णय यह दिखाते हैं कि सत्य की खोज कभी-कभी सांसारिक सत्ता के रास्ते से भिन्न दिशा लेती है।
अन्य स Schrift-आख्यानों से संबंध (cross-references)
आत्मिक अभ्यास के लिए प्रश्न (reflection questions)
संक्षिप्त निष्कर्ष (conclusion)
यह आयाम दर्शाता है कि मसीह का जन्म एक ऐसी स्थिति से होता है जहाँ सत्ता और पवित्रता के बीच एक कठिन परिघटना चलती है। शास्त्र-संघर्ष में भी परमेश्वर की योजना अग्रसर रहती है, और विश्वासियों के लिए यह प्ररेणा है कि सच्ची खोज हर समय ईश्वर के निर्देशों के अनुसार होनी चाहिए, न कि केवल राजनीतिक या सामाजिक दबावों के अनुरूप।
पूर्ववर्ती अनुभागों से उद्धरण (quote notes)
यदि आप Matthew Henry, Albert Barnes या Adam Clarke के सार्वजनिक-डायरेक्ट उद्धरण देखना चाहें, तो नीचे स्पष्ट उद्धरण-रेखा मिलती है — ध्यान दें कि यहाँ केवल संक्षिप्त संदर्भ दिए गए हैं:
“The chief priests and scribes” आदि लेकर वे मसीह के जन्म-स्थान के बारे में त्वरित निर्णय की कोशिश करते हैं।
नोट: नीचे कोई पूर्ण पाठ उद्धरण नहीं दिया गया है; केवल सार्वजनिक-डायरेक्ट विचार-रेखाएं उद्धृत हैं, ताकि मूल टिप्पणीकारों के दृष्टिकोण का संरक्षित आभास बने.