Old Testament
उत्पत्ति निर्गमन लैव्यव्यवस्था गिनती व्यवस्थाविवरण यहोशू न्यायियों रूत 1 शमूएल 2 शमूएल 1 राजाओं 2 राजाओं 1 इतिहास 2 इतिहास एज्रा नहेम्याह एस्तेर अय्यूब भजन संहिता नीतिवचन सभोपदेशक श्रेष्ठगीत यशायाह यिर्मयाह विलापगीत यहेजकेल दानिय्येल होशे योएल आमोस ओबद्याह योना मीका नहूम हबक्कूक सपन्याह हाग्गै जकर्याह मलाकीहोशे 4:8 बाइबल पद की व्याख्या
होशे 4:8 बाइबल पद का अर्थ और पद-दर-पद टीका
वे मेरी प्रजा के पापबलियों को खाते हैं, और प्रजा के पापी होने की लालसा करते हैं।
होशे 4:8 पद-दर-पद बाइबल टीका
*** इस टीका में सार्वजनिक डोमेन में उपलब्ध कुछ प्राचीन और क्लासिक स्रोतों की सामग्री शामिल है। कुछ सामग्री को कृत्रिम बुद्धिमत्ता उपकरणों की सहायता से संसाधित, संक्षिप्त या अनुवादित किया गया हो सकता है। हर व्याख्या को बाइबल के पूरे पाठ और उसके संदर्भ के साथ अवश्य जाँचें। यदि आपको कोई त्रुटि या ऐसा अनुवाद मिले जिसे सुधारने की आवश्यकता हो, तो कृपया हमसे संपर्क करें।
होशे 4:8 समानांतर पद और संबंधित वचन
उन बाइबल पदों को देखें जो विषय, शिक्षा या संदर्भ के आधार पर इस अंश से जुड़े हैं। समानांतर पदों की तुलना करने से इस वचन के संदर्भ और संदेश को अधिक गहराई से समझने में सहायता मिलती है। किसी चित्र को चुनें और संबंधित पद, उसकी व्याख्या तथा पद-दर-पद बाइबल टीका देखें।

यशायाह 56:11 (HINIRV) »
वे मरभूखे कुत्ते हैं जो कभी तृप्त नहीं होते। वे चरवाहे हैं जिनमें समझ ही नहीं*; उन सभी ने अपने-अपने लाभ के लिये अपना-अपना मार्ग लिया है।

मीका 3:11 (HINIRV) »
उसके प्रधान घूस ले लेकर विचार करते, और याजक दाम ले लेकर व्यवस्था देते हैं, और भविष्यद्वक्ता रुपये के लिये भावी कहते हैं; तो भी वे यह कहकर यहोवा पर भरोसा रखते हैं, “यहोवा हमारे बीच में है, इसलिए कोई विपत्ति हम पर न आएगी।”

लैव्यव्यवस्था 6:26 (HINIRV) »
जो याजक पापबलि चढ़ाए वह उसे खाए; वह पवित्रस्थान में, अर्थात् मिलापवाले तम्बू के आँगन में खाया जाए। (1 कुरि. 9:13)
होशे 4:8 का अर्थ सीधे शब्दों में
इस पथ के अनुसार, यह पद बताता है कि ईश्वर की स्मृति और न्याय के प्रति असफलता के कारण प्रजा के पाप उनके लिए भोजन बन जाते हैं—यानी पाप उनके जीवन का आहार बन गया है और वे इसके जाल में फँसते हैं। पाप के लिए “भोग” बनना खुद उनकी आदत बन गयी है; वे अपने पापों से तृप्त होते हैं और उसी के अनुरोध पर जीते हैं।
पृष्ठभूमि और संदर्भ
होशे की पुस्तक अ samya में एक प्रचलित विषय है: इस्राएल-यहोवा के बीच परम सम्बन्ध में दरार और राष्ट्र की आध्यात्मिक भूख, जो मूर्तिपूजा, शपथ-उल्लंघन और सामाजिक अन्याय से प्रकट होती है। हर अध्याय में, नबी खेत-खलिहान और मंदिर के बाहरी कर्मकांडों पर नहीं, बल्कि दिल के भीतर के पाप पर आवाज उठाते हैं।
व्याख्या के मुख्य बिंदु
संबंधित उद्धरण और अर्थ-व्याख्या
Matthew Henry के दृष्टिकोण से यह दिखता है कि पाप अकेला कर्म नहीं, बल्कि एक गहरी प्रवृत्ति है जो मनुष्य की आत्मा को खोखला कर देती है। Albert Barnes इसे परमेश्वर की स्मरण-शक्ति के अभाव के सन्देश के रूप में देखते हैं—कि पापी लोग अपनी आत्मा के आहार के लिए पाप को चुनते हैं। Adam Clarke इसे सामाजिक नीतियों के साथ जोड़ते हैं, जहाँ पापी लोग धार्मिक संस्थाओं को भी पाप के समर्थन के जैसे देखते हैं।
नोट: नीचे उद्धृत केवल संक्षेप है; पूर्ण पाठ उद्धरण के लिए संबंधित Commentary से परामर्श करें:
“Marred by the people’s appetite for sin, they feed on their own guilt.”
नोट: यह संक्षेप विचार विशिष्ट टिप्पणीकारों के विचार-रेखाओं का संक्षिप्त सार है; पूर्ण उद्धरण साइटेड नहीं किया गया है, ताकि पाठ के मूल अर्थ पर ध्या न रहे।क्रॉस-रेफरेंसेस और संक्षेप समझ
1) होशे 6:6 — ईश्वर के साथ प्रेम अधिक महत्व रखता है than पंक्ति-निष्ठ दर्शन; नबी स्पष्ट करते हैं कि रूप-आचरण से अधिक दिल की निष्ठा आवश्यक है।
2) होशे 7:6 — पाप की लालसा उनके दिलों का नियमन बन जाती है, और वे अपनी योजना से जुड़ जाते हैं।
3) होशे 10:1 — फल-गगन की तरह फलित पाप जिनका उत्पादन होता है, यह स्पष्ट करता है कि सामाजिक व्यवहार किस प्रकार पाप का बोझ बढ़ाते हैं।
संरचित हल्का निष्कर्ष
यहां मुख्य संदेश है: ईश्वर के साथ निष्ठा वही है जो जीवन का आहार बनकर हमारे निर्णयों को दिशा देती है; यदि पाप हमारे भोजन बन जाएं, तो समाज और आत्मा दोनों ही भूख से भटक जाते हैं। वास्तविक परिवर्तन दिल की पुनर्स्थापना से शुरू होता है—ईश्वर के प्रति सच्ची तड़प और व्यवहार में ईमानदार परिवर्तन से ही समाज में सत्य और धार्मिकता लौट सकती है।
कथन-सार: पाप की जड़ता को पहचानना और इसे तृप्त न होने दें; मन को परमेश्वर के अनुरूप ढालना ही उद्धार की दिशा है।