रोमियों 10:21 बाइबल पद का अर्थ और पद-दर-पद टीका

परन्तु इस्राएल के विषय में वह यह कहता है “मैं सारे दिन अपने हाथ एक आज्ञा न माननेवाली और विवाद करनेवाली प्रजा की ओर पसारे रहा।” (यशा. 65:1-2)

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रोमियों 10:21 पद-दर-पद बाइबल टीका

रोमियों 10:21 का तत्काल संदर्भ और उसका अर्थ

पद में प्रेरित पौलुस यह उद्धृत करते हैं कि ईश्वर इस्रायल के बारे में कहता है कि वह “दिन भर अपने हाथ एक आज्ञा न माननेवाली और विवाद करनेवाली प्रजा की ओर पसारे रहा।” यह अभिव्यक्ति यशायाह की किताब से लिया गया है (यशायाह 65:1-2) और दिखाती है कि परमेश्वर का उद्गठन तथा Anthro-भावना कैसे प्रकट होती है—वह उन लोगों के लिए भी उपलब्ध रहा जो चुपके से ईश्वर के प्रति प्रतिक्रियात्मक न बनकर, खुलकर नहीं मानना चाहते थे। रोमियों 10 का यह भाग विशेषकर यह दिखाता है कि विश्वास के लिए ईश्वर की उपस्थिति सभी के लिए खुली थी, पर इस्राएल ने अपने स्वभाव और धार्मिकता के बिना उसे स्वीकार नहीं किया।

ईश्वर और विश्वास के संबंध में पाठ का संकेत

यहाँ ईश्वर का धैर्य और उदारता स्पष्ट है—उसने आम लोगों के लिए भी अपने मार्ग खोल दिये, पर अवज्ञा और गुरुतर आत्म-स्वार्थ के कारण लोग उसे नहीं पहचान सके। इसका निहित संदेश है कि ईश्वर की कृपा विश्व के लिए है, और विश्वास के मार्ग पर दिल खोलकर लौटना ही सच्चा धर्म है।

quitting शब्दावली और छवि पर स्पष्टता

“हाथ पसारे” की छवि से प्रेरित होकर कहा गया है कि ईश्वर ने बारम्बार अपने आप को उपलब्ध कराया, परंतु उन लोगों ने अपनी जड़ता और जबरदस्त निष्ठा के कारण उसे नहीं पाया। “आज्ञा न माननेवाली और विवाद करनेवाली प्रजा” से प्रतीत होता है कि धार्मिकता के ढांचे में भी व्यक्तियों के मन के भीतर स्वार्थ और अस्वीकृति रहती है, जो शख्स के ईश्वर तक पहुँचने में बाधक बनती है।

related passages (संक्षेप)

  • यशायाह 65:1-2 — परमेश्वर ने प्रत्यक्ष मार्गों से प्रजा को बुलाया, पर वे न मानकर विरोध दिखाते रहे। यह उद्धरण रोमियों 10 के संदर्भ को पुष्ट करता है कि ईश्वर की सच्ची खोज पूरे समुदाय के लिए है, न कि केवल जड़ मानने वालों के लिए।
  • यीशु के समय का अभिज्ञापन — ईश्वर का घरभाव सभी के लिए खुला रहा, पर विरोध और आचार-संहिता के अनुसार मन न बदलना पवित्रता के मार्ग को रोकता है।
  • कुलीन धार्मिक व्यवस्था बनाम आत्मिक आस्था — बाहरी धर्म के बजाय दिल की बझना आवश्यक है ताकि विश्वास सच्चे रूप में प्रकट हो सके।

पुरुषार्थी और आज का अनुप्रयोग

हम में से जो संदेश स्वीकार करते हैं, उन्हें ईश्वर के पास आने और उद्धार परレス करने के लिए खुला अवसर मिलता है। आज के समय में इसका मतलब है—धार्मिक रीति-रिवाजों के पीछे न जाकर, दिल से परमेश्वर को पहचानना, और उनकी कृपा को अपने जीवन का केंद्र बनाना। संकीर्ण मन और पूर्वाग्रह के बजाय विनम्रता के साथ ईश्वर की आवाज को सुनना आवश्यक है।

सीधियाँ और संक्षिप्त टिप्पणियाँ (संदर्भानुसार)

यह पाठ हमारे विश्वास-यात्रा में यह याद दिलाता है कि उद्धार का रास्ता सभी के लिए खुला है, पर वह केवल उसी की प्राप्ति है जो ईश्वर के प्रति पूरी तरह से समर्पण करता है।

संदर्भ-विवेच: यशायाह 65:1-2 में स्पष्ट है कि ईश्वर ने प्रजा को सरके रूप से बुलाया, फिर भी लोग उसे न पहचान पाये।

*** इस टीका में सार्वजनिक डोमेन में उपलब्ध कुछ प्राचीन और क्लासिक स्रोतों की सामग्री शामिल है। कुछ सामग्री को कृत्रिम बुद्धिमत्ता उपकरणों की सहायता से संसाधित, संक्षिप्त या अनुवादित किया गया हो सकता है। हर व्याख्या को बाइबल के पूरे पाठ और उसके संदर्भ के साथ अवश्य जाँचें। यदि आपको कोई त्रुटि या ऐसा अनुवाद मिले जिसे सुधारने की आवश्यकता हो, तो कृपया हमसे संपर्क करें।

रोमियों 10:21 समानांतर पद और संबंधित वचन

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मैं तुम्हारे पास अपने सारे दास नबियों को बड़ा यत्न करके यह कहने को भेजता आया हूँ, 'अपनी बुरी चाल से फिरो, और अपने काम सुधारो, और दूसरे देवताओं के पीछे जाकर उनकी उपासना मत करो तब तुम इस देश में जो मैंने तुम्हारे पितरों को दिया था और तुमको भी दिया है, बसने पाओगे।' पर तुमने मेरी ओर कान नहीं लगाया न मेरी सुनी है।

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