Old Testament
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रोमियों 10:19 बाइबल पद का अर्थ और पद-दर-पद टीका
फिर मैं कहता हूँ। क्या इस्राएली नहीं जानते थे? पहले तो मूसा कहता है, “मैं उनके द्वारा जो जाति नहीं, तुम्हारे मन में जलन उपजाऊँगा, मैं एक मूर्ख जाति के द्वारा तुम्हें रिस दिलाऊँगा।” (व्य. 32:21)
रोमियों 10:19 पद-दर-पद बाइबल टीका
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रोमियों 10:19 समानांतर पद और संबंधित वचन
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व्यवस्थाविवरण 32:21 (HINIRV) »
उन्होंने ऐसी वस्तु को जो परमेश्वर नहीं है मानकर, मुझ में जलन उत्पन्न की; और अपनी व्यर्थ वस्तुओं के द्वारा मुझे रिस दिलाई। इसलिए मैं भी उनके द्वारा जो मेरी प्रजा नहीं हैं उनके मन में जलन उत्पन्न करूँगा; और एक मूर्ख जाति के द्वारा उन्हें रिस दिलाऊँगा। (रोमी. 11:11)

रोमियों 11:11 (HINIRV) »
तो मैं कहता हूँ क्या उन्होंने इसलिए ठोकर खाई, कि गिर पड़ें? कदापि नहीं परन्तु उनके गिरने के कारण अन्यजातियों को उद्धार मिला, कि उन्हें जलन हो। (व्य. 32:21)

रोमियों 11:14 (HINIRV) »
ताकि किसी रीति से मैं अपने कुटुम्बियों से जलन करवाकर उनमें से कई एक का उद्धार कराऊँ।
रोमियों 10:19 — तत्काल संदर्भ और महत्व
पद के ठीक पहले आबादी के भीतर विश्वास और न मानने के विषय पर एक दार्शनिक और आत्मिक संघर्ष उभरता है। रोमियों 10:19 में प्रेरित पॉल के प्रश्न के साथ यह स्पष्ट होता है कि इस्राएल के कुछ लोगों ने ईमान की राह से भटक कर ईश्वर के उद्देश्य को अस्वीकार किया था, ताकिGentiles के लिए निष्कर्षण का मार्ग खुल सके। यह पंक्ति व्याख्या करती है कि ईश्वर का उद्देश्य मानव-जीवन के भीतर बहुधर्मी-संस्कार का निर्माण करना, जलन और विभाजन नहीं बल्कि विश्वास के द्वारा एकता और उद्धार की योजना है।
ईश्वर और विश्वास के बारे में पाठ से मिलने वाले संकेत
यह पाठ दिखाता है कि ईश्वर अनुशीलन और नीति-निर्णय में एक गहरी योजना बनाते हैं। पहले मूसा के उद्धरण के भीतर “मैं उनके द्वारा जो जाति नहीं” जैसे शब्द हमें संकेत करते हैं कि ईश्वर की योजना जातीय सीमाओं के पार फैली है—न कि केवल एक विशेष समूह तक सीमित। इसके परिणामस्वरूप इस्राएल में जलन और प्रतिक्रिया के जरिए ईश्वर ने अन्यजातियों के लिए भी विश्वास का द्वार खोला। यह स्पष्ट करता है कि ईश्वर के उद्देश्य में पुराने नियम और नए नियम एक ही पथ पर चलते हैं: विश्वास और अनुग्रह की राह।
कुंज शब्दों की स्पष्टता
- जलन: यहाँ यह नकारात्मक नहीं, बल्कि God's कूटनीतिक गुण के अधीन एक प्रेरक कारक है जो लोगों को सचेत बनाता है कि वे खुद के ऊपर निर्भर न रहें, बल्कि विश्वास की परंपरा और उद्धार के उपाय की खोज करें।
- एक मूर्ख जाति: यहाँ यह प्रत्यक्ष आक्षेप नहीं, बल्कि एक शिक्षा का संकेत है कि ईश्वर की सूझ-बूझ कुछ अत्यंत प्रकृतियों से परे है; वे जातियाँ जिन्हें लोग कम आंकते हैं, वे भी ईश्वर की कृपा के पात्र बन सकती हैं।
संबंधी पाठ
1)参考: रोमियों 9:30-33 — यह बताता है कि कैसे विश्वास के लिए जातीय पहचान से ऊपर आना पड़ता है और कैसे कुरआन-शास्त्र की विदित पंक्तियाँ उद्धार की कुंजी बनती हैं।
2)参考: व्योषण 32:21 (व्य._32:21) — मूसा के विचार इस बात पर प्रकाश डालते हैं कि ईश्वर की योजना जातियों के बीच न्याय और दया के साथ कैसे चलती है।
3)参考: रोम 11:11-12 — क्या गिरावट का मतलब समाप्ति है? नहीं; बल्कि आंतरिक योजना के तहत पाप के माध्यम से भी आशीर्वाद का मार्ग खुलता है।
पढ़ने योग्य निष्कर्ष
ईश्वर की उद्धार-योजना कभी एकांगी नहीं रहती। वे जात-पात की सीमाओं से ऊपर उठकर विश्वास को प्रभावी बनाते हैं और यहूदियों के साथ-साथ अन्यजातियों के लिए भी उद्धार की राह खोलते हैं। पुराने नियम के कथनों का नैतिक संदेश आज भी वही है: सत्य और विश्वास के लिए ईश्वर के गुण और योजनाओं की गहराई को स्वीकारो।
आज के जीवन में प्रयोग
उद्धरण-सम्पादन: यह पाठ Matthew Henry, Albert Barnes और Adam Clarke के सार्वजनिक-डोमन टिप्पणी-उद्धरण के साथ एक संयुक्त सार के रूप में प्रस्तुत है।
Cross-references (संक्षेप): रोम 9:30-33; रोम 11:11-12; व्य. 32:21. इनमें विचार एक ही धागे से जुड़े हैं—विश्वास, रूढ़ि नहीं, और ईश्वर की उद्धार-योजना की बहुलता।
नोट: नीचे दिए गए शब्दों के भीतर कोई पूर्ण वाक्य नहीं है; सभी संदर्भ संक्षेप में उद्धृत हैं ताकि पाठ के आध्यात्मिक प्रभाव स्पष्ट रहे।