Old Testament
उत्पत्ति निर्गमन लैव्यव्यवस्था गिनती व्यवस्थाविवरण यहोशू न्यायियों रूत 1 शमूएल 2 शमूएल 1 राजाओं 2 राजाओं 1 इतिहास 2 इतिहास एज्रा नहेम्याह एस्तेर अय्यूब भजन संहिता नीतिवचन सभोपदेशक श्रेष्ठगीत यशायाह यिर्मयाह विलापगीत यहेजकेल दानिय्येल होशे योएल आमोस ओबद्याह योना मीका नहूम हबक्कूक सपन्याह हाग्गै जकर्याह मलाकीVerse
रोमियों 11:1 रोमियों 11:2 रोमियों 11:3 रोमियों 11:4 रोमियों 11:5 रोमियों 11:6 रोमियों 11:7 रोमियों 11:8 रोमियों 11:9 रोमियों 11:10 रोमियों 11:11 रोमियों 11:12 रोमियों 11:13 रोमियों 11:14 रोमियों 11:15 रोमियों 11:16 रोमियों 11:17 रोमियों 11:18 रोमियों 11:19 रोमियों 11:20 रोमियों 11:21 रोमियों 11:22 रोमियों 11:23 रोमियों 11:24 रोमियों 11:25 रोमियों 11:26 रोमियों 11:27 रोमियों 11:28 रोमियों 11:29 रोमियों 11:30 रोमियों 11:31 रोमियों 11:32 रोमियों 11:33 रोमियों 11:34 रोमियों 11:35 रोमियों 11:36



रोमियों 11:14 पर केंद्रित व्याख्या
मुख्य interpretive बिंदु: प्रेरित पौलुस इस Verse के माध्यम से ईश्वर के योजना के अनुसार गैर-इस्रायली लोगों के साथ उनके उद्धार की प्रक्रिया के महत्व को दिखाते हैं। वह इस रीति से अपनी राष्ट्रीय कुटुंब के प्रति जलन उत्पन्न कर शेष कुटुंबियों के उद्धार की इच्छा रखता है—ताकि विद्यमान विश्वासीयों के भीतर जागृति और विश्वास की नई दिशा बन सके। यह जलन उद्धार के गुणात्मक फल की दिशा में एक प्रेरक है, न कि पक्षपाती प्रतिस्पर्धा का कारण।
साहित्यिक संदर्भ और पाठ के आंतरिक ढांचा
रोमियों की रचना में अध्याय 9–11 का भाग ईश्वरीय चयन, अनुग्रह और इस्राइल की प्रतिक्रिया के चक्र को खोलता है। अध्याय 11:14 खास तौर पर यह बताता है कि गैर-यहूदियों के साथ पवित्र उद्धार की प्रक्रिया में इस्राइल के प्रति प्रेरित की इच्छा किस प्रकार महत्वपूर्ण है। यह उद्धार की बहुलता में एक संतुलन बनाता है: ईश्वर की कृपा सभी पर खुली है, परन्तु वह यह चाहता है कि प्रतिभाशाली मांसिक-धाराएं उद्धार के लिए प्रेरित हों।
धार्मिक महत्व
यह वचन यह सीख देता है कि ईश्वर के उद्धार के कार्यक्रम में चिह्नित क्रमों को समझना चाहिए—पहचान, जलन और उद्धार का क्रम। जलन, यदि सही रूप में जागरूक हो, तो यह न तो ईश्वर के प्रति प्रतिद्वंद्विता है और न ही राष्ट्र-विशेष के सम्मान के लिए आग्रह, बल्कि यह उद्धार के लक्ष्य को स्पष्ट करता है कि किस प्रकार निर्बलता भी एक उदाहरण बन सकती है ताकि लोग ईश्वर की कृपा के सामने समर्पण करें।
पवित्रशास्त्रीय संबंध– Cross references
संकेतित cross references के सार यह है कि उद्धार का मार्ग केवल एक देश तक सीमित नहीं है, बल्कि इसमें विश्वास का बोध, प्रेरणा और परिणाम सभी शामिल हैं—ताकि मुस्कान और सम्मान के साथ लोग प्रभु के सामने प्रस्तावित हों।
विचार-चर्चा के प्रश्न
संक्षिप्त निष्कर्ष
रोमियों 11:14 हमें यह सिखाता है कि ईश्वर के उद्धार की योजना में मानवीय प्रतिक्रियाएं एक महान संघटक हैं। गरीबों में से उभर कर भी उद्धार पाने की संभावना है, और यह प्रक्रिया इस्राइल के प्रति रुचि, पर्यवेक्षण और प्रेरणा सभी को एक साथ जोड़ती है। हमारी भूमिका यह है कि हम कृपा के मार्ग पर चलें, सत्य को धारण करें और परमेश्वर की योजना की जयकार करें, ताकि सभी जातियाँ उद्धार के सम्मुख एक समान आकर से आ सकें।
सूक्ष्म उद्धरण उपलब्धता
नीचेMatthew Henry, Albert Barnes, Adam Clarke के सार्वजनिक-domain टिप्पणीकारों के स्पष्ट शब्द-उद्धरण मौजूद हैं यदि उपलब्ध हों:
अगर किसी उद्धरण में इन टिप्पणीकारों के यथार्थ वाक्य मिलें, उन्हें उद्धृत करने की अनुमति है।