Old Testament
उत्पत्ति निर्गमन लैव्यव्यवस्था गिनती व्यवस्थाविवरण यहोशू न्यायियों रूत 1 शमूएल 2 शमूएल 1 राजाओं 2 राजाओं 1 इतिहास 2 इतिहास एज्रा नहेम्याह एस्तेर अय्यूब भजन संहिता नीतिवचन सभोपदेशक श्रेष्ठगीत यशायाह यिर्मयाह विलापगीत यहेजकेल दानिय्येल होशे योएल आमोस ओबद्याह योना मीका नहूम हबक्कूक सपन्याह हाग्गै जकर्याह मलाकीVerse
रोमियों 11:1 रोमियों 11:2 रोमियों 11:3 रोमियों 11:4 रोमियों 11:5 रोमियों 11:6 रोमियों 11:7 रोमियों 11:8 रोमियों 11:9 रोमियों 11:10 रोमियों 11:11 रोमियों 11:12 रोमियों 11:13 रोमियों 11:14 रोमियों 11:15 रोमियों 11:16 रोमियों 11:17 रोमियों 11:18 रोमियों 11:19 रोमियों 11:20 रोमियों 11:21 रोमियों 11:22 रोमियों 11:23 रोमियों 11:24 रोमियों 11:25 रोमियों 11:26 रोमियों 11:27 रोमियों 11:28 रोमियों 11:29 रोमियों 11:30 रोमियों 11:31 रोमियों 11:32 रोमियों 11:33 रोमियों 11:34 रोमियों 11:35 रोमियों 11:36



रोमियों 11:2 का एक सार्थक विस्फोट: परमेश्वर ने अपनी प्रजा को नहीं किया त्याग
मुख्य बिंदु: परमेश्वर अपने चुने हुए लोगों को कभी नहीं छोड़ते; यहाँ प्रेरित पौलुस यह प्रमाण देते हैं कि परमेश्वर ने एलिय्याह की कथा के माध्यम से यह स्पष्ट कर दिया है कि वह इस्राएल के विरुद्ध विनती के बावजूद भी उन्हें छोड़ नहीं देता। इस वचन में ईश्वर की रोग-रहित प्रतिबद्धता और उसकी अनुमति के भीतर भी उसकी रक्षा की योजना उजागर होती है।
कायदे और साहित्यिक संदर्भ
पौलुस ने “प्रभु ने अपनी उस प्रजा को नहीं त्यागा” कहकर यह स्थापित किया है कि परमेश्वर का.selection एक स्थिर, अविनाशी है; वह उन लोगों को नहीं छोड़ते जिन्हें उन्होंने पहले से जाना है। यह कथन भजन 94:14 से उद्धृत है, जिसमें परमेश्वर के विरुद्ध प्रार्थना करते समय यह बात उठती है कि दयालु भगवान उनकी सुरक्षा और न्याय के साथ साथ रहते हैं। यहाँ एलिय्याह की कथा एक उजागर दृष्टांत है: एलिय्याह निर्दय आत्म-संशय और एकांतता में परमेश्वर से विनती करते हैं, पर परमेश्वर उनके पीछे, उनके साथ, उनके इतिहास के साथ चलते हैं—यह दिखाता है कि परमेश्वर का प्रेम और प्रतिज्ञा कभी समाप्त नहीं होती।
पाठ-संदर्भ और संरचना
1) पाठवस्तु: रोमियों 11 में पौलुस इस बात पर विचार कर रहे हैं कि कैसे इस्राएल का अनुपातिक विरोध, परन्तु परमेश्वर ने उनके साथ वाचा बनाए रखी। 2) एलिय्याह की कथा: एलिय्याह ने इस्राएल के लिए विनती की, और परमेश्वर ने उसे निराश नहीं किया; यह दिखाता है कि ईश्वर का दयालु हृदय कौन से अस्त-स्थल पर भी रहते हैं। 3) परिणाम: विश्वासी-जगत के लिए आश्वासन—हम भी कभी-कभी अपने कठिन समय में अकेले नहीं होते; परमेश्वर अपनी प्रजा के साथ है और उनकी रक्षा करता है।
पृथक विचार: थीसिस और कार्य
- परमेश्वर की निर्विकल्प प्रतिज्ञा: उसकी व्यक्तिगत चयन और प्रेम अचल है; वह अपनी प्रजा को नहीं छोड़ते।
- परीक्षा में भी धैर्य और दयालुता: विनती के समय भी परमेश्वर की योजना आगे बढ़ती है; हमारी भागीदारी उसकी योजना में होती है।
- प्रेरित पौलुस का तर्क: यहूदियों के बारे में विशेष विधान के साथ, प्रकटन कि ईश्वर का चयन और चयनीत लोगों के लिए प्रेम बना रहता है, चाहे समय कैसे भी आये।
क्रॉस-रेफरेंस और संकेत
1) भज 94:14 — “प्रियतम, परमेश्वर अपनी प्रजा को त्याग नहीं देगा” के संदर्भ में। यह दर्शाता है कि परमेश्वर न्याय के साथ उनके साथ है।
2) इब्र 13:5 — “अपने आप को धनुषित न करना, क्योंकि मैं तुम्हारे साथ हूँ; तुम्हारा साथ छोड़ना नहीं।” यहास्पष्ट है कि परमेश्वर की स्थिरता विश्वासी के लिए एक सुरक्षा है।
3) 1 राजा 19:18 — एलीया के समय परमेश्वर के दयालु विरासत की पुष्टि: कितने मनुष्य मरे नहीं जाते, परमेश्वर अपनी योजना के साथ है।
विचार-विन्यास:reflection prompts
संक्षेप निष्कर्ष
रोमियों 11:2 में परमेश्वर की अडिगता की पुष्टि है—यद्यपि लोग विरोध और चुनौतियों का सामना करते हैं, परमेश्वर ने अपनी प्रजा को नहीं छोड़ा। एलिय्याह की कथा एक गाइड है कि कैसे विनती और अविश्वास के बीच भी ईश्वर की करुणा और वाचा सक्रिय रहती है। यह संदेश हम सभी के लिए है: ईश्वर की चूक नहीं होती; वह समय-समय पर अपने बच्चों के साथ खड़ा रहता है, और उनके लिए सुरक्षा, आशा और मार्ग बनाता है।