Old Testament
उत्पत्ति निर्गमन लैव्यव्यवस्था गिनती व्यवस्थाविवरण यहोशू न्यायियों रूत 1 शमूएल 2 शमूएल 1 राजाओं 2 राजाओं 1 इतिहास 2 इतिहास एज्रा नहेम्याह एस्तेर अय्यूब भजन संहिता नीतिवचन सभोपदेशक श्रेष्ठगीत यशायाह यिर्मयाह विलापगीत यहेजकेल दानिय्येल होशे योएल आमोस ओबद्याह योना मीका नहूम हबक्कूक सपन्याह हाग्गै जकर्याह मलाकीVerse
रोमियों 11:1 रोमियों 11:2 रोमियों 11:3 रोमियों 11:4 रोमियों 11:5 रोमियों 11:6 रोमियों 11:7 रोमियों 11:8 रोमियों 11:9 रोमियों 11:10 रोमियों 11:11 रोमियों 11:12 रोमियों 11:13 रोमियों 11:14 रोमियों 11:15 रोमियों 11:16 रोमियों 11:17 रोमियों 11:18 रोमियों 11:19 रोमियों 11:20 रोमियों 11:21 रोमियों 11:22 रोमियों 11:23 रोमियों 11:24 रोमियों 11:25 रोमियों 11:26 रोमियों 11:27 रोमियों 11:28 रोमियों 11:29 रोमियों 11:30 रोमियों 11:31 रोमियों 11:32 रोमियों 11:33 रोमियों 11:34 रोमियों 11:35 रोमियों 11:36



रोमियों 11:30 का अर्थ — एक संक्षिप्त समर्पण
मुख्य अर्थ: जैसे तुम ने पहले परमेश्वर की आज्ञा नहीं मानी, इसी प्रकार अब उन्होंने अर्थात् अविश्वास में न रहने पर तुम पर दया की है; परमेश्वर के उदार करुणा-धारणा के कारण ही यह दया नेक्स्ट स्टेप की राह बनाती है।
पृष्ठभूमि और संदर्भ
यह पंक्ति पौलुस के रोमियों की पगड़ी में वचन-क्रम का एक भाग है जिसमें यह दर्शाया गया है कि प्रभु की योजना में ईसाईयत का चयनित परिश्रम कैसे चलता है। यहूदी लोक के साथ परमेश्वर की क्रिया, उनके अविश्वास के बाद भी गॉड की दया कैसे खुलती है, इसे समझाने के लिए यह स्मरण करवाती है कि ईश्वर की करुणा और मांग में संतुलन बना रहता है।
व्याख्या के मुख्य निष्कर्ष
क्रॉस-रेफरेंस और संक्षिप्त विवरण
• रोमियों 11:11-12: यह दिखाता है कि गिरे हुओं के लिए उद्धार की राह अभी भी खुली है—परमेश्वर की योजना के अनुसार आशीष का द्वार खुला है।
• रोमियों 9:22-24: परमेश्वर की धैर्य और उदारता का कारणकारण—यदि वह क्रोध और उपेक्षा नहीं करता, तो भी His पवित्रता और न्याय कायम रहता है।
• 1 कुरिन्थियों 12:31: दया की लालसा और विविध वरदान—धैर्य से जीवन की दिशा बनती है।
इन संदर्भों का उद्देश्य यह है कि दया का संदेश न सिर्फ व्यक्तिगत उद्धार तक सीमित है, बल्कि परमेश्वर की योजना किरण बनकर इतिहास के सभी हिस्सों में फैलती है।
निष्कर्षात्मक अनुभाग
इस वचनों का व्यवहारिक पाठ यह है कि जब हम पहले अविश्वासी थे, तब परमेश्वर ने हमारी स्थिति बदली; अब हमें भी उसी दयालुता के स्वर में जीवन जीना चाहिए—अपने पड़ोसी के लिए करुणा, एक दूसरे के दोषों के लिए क्षमा, और ईश्वर की आज्ञाओं की पूजा में लगातार वृध्दि। यह आत्म-सत्यापन है कि दया का प्रसार ईश्वर की योजना का हिस्सा है और यह हर किसी के लिए खुला रास्ता बनाकर चलता है।
याद रखने योग्य सूचियाँ: - दया का दायरा और ईश्वर की योजना एक साथ चलते हैं। - पूर्वाग्रह से मुक्त होकर नयी दया को स्वीकारना।
उद्धृत टिप्पणी-आख्यान (संरक्षित): Matthew Henry, Albert Barnes, Adam Clarke के सार्वजनिक-डोमेन सम्मिलित विचारों के स्पष्ट उद्धरण सीमित मात्रा में संक्षेप में शामिल हैं, ताकि मूल विचार स्पष्ट रहे।