Old Testament
उत्पत्ति निर्गमन लैव्यव्यवस्था गिनती व्यवस्थाविवरण यहोशू न्यायियों रूत 1 शमूएल 2 शमूएल 1 राजाओं 2 राजाओं 1 इतिहास 2 इतिहास एज्रा नहेम्याह एस्तेर अय्यूब भजन संहिता नीतिवचन सभोपदेशक श्रेष्ठगीत यशायाह यिर्मयाह विलापगीत यहेजकेल दानिय्येल होशे योएल आमोस ओबद्याह योना मीका नहूम हबक्कूक सपन्याह हाग्गै जकर्याह मलाकीVerse
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रोमियों 11:16 पर व्याख्या: प्रारम्भिक पवित्रता की समानता और डालियों की स्थिति
मुख्य व्यावहारिक बिंदु: ईश्वर के विधान के अनुसार जिस तरह पहला पेड़ा पवित्र हो जाने पर आटे की सारी गूँध भी पवित्र मानी जाती है, उसी प्रकार चयापन्न (याकूबन) लोगों के संकेतन में जो मूलस्था (जड़) पवित्र है, डालियाँ भी पवित्र मानी जाती हैं। यह पद वसीयत-सम्बन्धी एकता और आशा पर बल देता है कि यहूदी और आदमीयों के समुदाय में ईश्वर के पुराने वादे का सिद्धत्व कायम रहता है, जब उनका धैर्य और विश्वास गतिशील रहता है।
साहित्यिक संदर्भ (लिटरेचर Context)
यह पद रोमियों के अध्याय 11 में वृत्तांत की उस धारा का भाग है जो यहूदियों औरGentiles के बीच ईश्वर की योजना को उजागर करता है। पौलुस बतलाते हैं कि विश्वसनीयता और आश्वासन की गवाही वह है कि अगर जड़ पवित्र है, तो डालियाँ भी पवित्र मानी जाती हैं; और यदि कोई डालियाँ शाखा से काटी जाएँ, तो उद्धार का प्रावधान टकराहट से मुक्त रहता है—क्योंकि यह योजना एक एकता पर टिकी है, जिसमें परमेश्वर का उद्धार-कार्य निरंतर चलता रहता है।
THEOLOGICAL SIGNIFICANCE (दर्शनशास्त्रीय अर्थ)
इस वचन के अनुसार पवित्रता का स्रोत एक है—यहोवा का वाद और उसकी चिरस्थायी विश्वासयोग्यता। पहला पेड़ा पवित्र ठहरने से आटा भी पवित्र माना गया, यह दर्शाता है कि परमेश्वर की वस्तुओं में एक केंद्रीय स्थिति है: जो कुछ शुरू में पवित्र है, वह क्रमशः पूरी व्यवस्था में प्रभाव डालती है। यहाँ जड़ और डालियाँ शब्द-चिन्हनात्मक रूप से यह दिखाते हैं कि यहूदी समुदाय (जड़) औरGentiles (डालियाँ) एक ही मुकाम पर आते हैं, जब वे विश्वास के माध्यम से ईश्वर के वादों से जुड़ते हैं।
पवित्रता और विश्वास: मिसालें (Cross-Connections)
संक्षेप में यह तीन-तरफा संबंध बताता है: पवित्र शुरुआत, विश्वास से जुड़ना, और समुदाय-धारणा का चमकना।
आत्मनिरीक्षण के प्रश्न
संक्षिप्त निष्कर्ष
रोमियों 11:16 हमें बताता है कि ईश्वर की योजना में एक पवित्रता का मूल सिद्धांत है: जो कुछ पहले पवित्र हुआ, वह सब कुछ पवित्र में परिणत होता है। यह जड़-डालियाँ का प्रतीकात्मक दृश्य हमें स्मरण कराता है कि व्यक्ति-समुदाय के उद्धार और योगदान के लिए विश्वास-आधार ही केंद्र में है।
पूर्व-संदर्भ उद्धरण (शब्दशः उद्धरण की पहली पंक्ति)
पहला पेड़ा पवित्र ठहरा, तो पूरा गूँधा हुआ आटा भी पवित्र है; और जब जड़ पवित्र ठहरी, तो डालियाँ भी ऐसी ही हैं।