रोमियों 11:5 बाइबल पद का अर्थ और पद-दर-पद टीका

इसी रीति से इस समय भी, अनुग्रह से चुने हुए कुछ लोग बाकी हैं*।

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रोमियों 11:5 पद-दर-पद बाइबल टीका

रोमियों 11:5 का तत्काल संदर्भ और गहराई

पद के पहले भाग में पवित्र शास्त्र बताता है कि आज की पवित्र योजना में कुछ लोग—अनुग्रह से चुने हुए—रहते हैं। यह प्रचारित शांत व्यवस्था संकेत करती है कि परमेश्वर की योजना विशिष्ट चयन और ईमानदार विश्वास पर आधारित है, न कि मानवीय योग्यता या कर्मों पर। रोमियों 11 अध्याय के संदर्भ में यह दृश्य उस समय के बाकी लोगों के साथ जुड़ता है जो ईश्वर की कृपा के जरिए उद्धार प्राप्त करने के उद्देश्य से चुने जाते हैं, भले ही उन्होंने पहले प्रतिरोध दिखाया हो।

ईश्वरीय चयन और विश्वास का पाठ

इस वाक्य में दो प्रमुख विचार उभरते हैं: पहला—'अनुग्रह से चुने हुए कुछ लोग'—यानी ईश्वर की असीम कृपा से वे जिन्हें उद्धार के लिए चना गया है; दूसरा—'बाकी'—जो इस समय तक, क्रमशः ईश्वर के मिशन में सहभागी बनने में थोड़ा कठिनाई अनुभव कर रहे थे। यह दिखाता है कि उद्धार का मार्ग सामाजिक घड़ियाँ या जियो-रिज़ेनों के कारण नहीं, बल्कि ईश्वर की कृपा से निर्धारित है।

महत्त्वपूर्ण शब्दों की समझ

  • अनुग्रह ( grace ) — वह दिव्य Dumneze की कृपा जो व्यक्ति को उद्धार के पथ पर अग्रसर करती है, विश्वास के माध्यम से।
  • चुने हुए (elect) — परमेश्वर द्वारा निश्चित योजना में चयनित समूह; यह दयालुता और वाचा के अनुसार है, न कि कर्म के बराबर।

संदर्भित ग्रंथ—समान विचार वाले संकेत

यह विचार रूमियों के साथ मेल खाते हैं कि उद्धार परमेश्वर की योजनात्मक कृपा से आता है, न कि मानवीय सिद्धियों से। नीचे के अन्य संदर्भ भी इस धारा की पुष्टि करते हैं:

  • रोमियों 9–11 के संदर्भ में चयन और निःसंदेह कृपा का स्पष्ट चित्रण मिलता है, जहां परमेश्वर की योजना अद्वितीय है।
  • याकूब 1:18 में कहा गया है कि परमेश्वर ने विश्व के उद्धार को उसकी इच्छानुसार आरम्भ किया—यह भी कृपा के द्वारा है।
  • 2 तीमुथियुस 1:9 बताता है कि उद्धार वह कार्य है जो पूर्वानुदार्ग के अनुसार किया गया, न कि हमारे कर्मों से।

एतिहासिक-आत्मिक पाठ

मथ्यू Henry, Barnes और Clarke जैसे प्रसिद्ध सार्वजनिक डोमेन प्रवचनों के अनुसार, यह वाक्य संकेत करता है कि ईश्वर की कृपा से ही वास्तविक परिवर्तन संभव है; कर्म के प्रदर्शन से उद्धार नहीं प्राप्त होता। Henry की टिप्पणी में कृपा की सार्वभौमिकता और चयन की सुरक्षा का उल्लेख मिलता है। Barnes कृपा द्वारा उद्धार के आरम्भ और विश्वास द्वारा उसे अपनाने की दिशा पर जोर देते हैं। Clarke भी इस संरचना को स्पष्ट करते हैं कि चयन का उद्देश्य भक्तों के समूह को पवित्रता के प्रति समर्पित करना है।

संयुक्त निष्कर्ष — आज के जीवन में क्या कहता है

यह वचन हमें यह सिखाता है कि देवकार्य की दिशा और गति ईश्वर के कृपापूर्ण नियोजन के अनुसार है।हमारा उत्तर केवल विश्वास में विश्राम नहीं, बल्कि ईश्वर की कृपा के अनुरोधीत्व के लिए जीवन का समर्पण है। उद्धार एक ऐसा दिव्य मार्ग है जिसे ईश्वर अनुग्रह से खोलते हैं, और हमारी भूमिका विश्वास को बनाए रखना, धैर्य रखना, और सामर्थ्य के साथ आत्म-उद्धार से काम लेना है।

संक्षिप्त Cross-References के संकेत

1) रोमियों 9:11–12 — चयन की स्वतंत्रता और कृपा का वास्तविक इरादा।

2) इफिसियों 2:8–9 — उद्धार अनुग्रह से है, न कि उपकारों से।

3) 2 तीमुथियुस 1:9 — उद्धार का कॉल पूर्वानुदार्ग के साथ है।

निष्कर्षतः, रोमियों 11:5 हमें आश्वस्त करता है कि ईश्वर की योजना में कुछ लोग अनुग्रह से चुने जाते हैं, और यह चयन हमारे सनातन उद्धार के मार्ग को दृढ़ करता है।

*** इस टीका में सार्वजनिक डोमेन में उपलब्ध कुछ प्राचीन और क्लासिक स्रोतों की सामग्री शामिल है। कुछ सामग्री को कृत्रिम बुद्धिमत्ता उपकरणों की सहायता से संसाधित, संक्षिप्त या अनुवादित किया गया हो सकता है। हर व्याख्या को बाइबल के पूरे पाठ और उसके संदर्भ के साथ अवश्य जाँचें। यदि आपको कोई त्रुटि या ऐसा अनुवाद मिले जिसे सुधारने की आवश्यकता हो, तो कृपया हमसे संपर्क करें।

रोमियों 11:5 समानांतर पद और संबंधित वचन

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