Old Testament
उत्पत्ति निर्गमन लैव्यव्यवस्था गिनती व्यवस्थाविवरण यहोशू न्यायियों रूत 1 शमूएल 2 शमूएल 1 राजाओं 2 राजाओं 1 इतिहास 2 इतिहास एज्रा नहेम्याह एस्तेर अय्यूब भजन संहिता नीतिवचन सभोपदेशक श्रेष्ठगीत यशायाह यिर्मयाह विलापगीत यहेजकेल दानिय्येल होशे योएल आमोस ओबद्याह योना मीका नहूम हबक्कूक सपन्याह हाग्गै जकर्याह मलाकीVerse
रोमियों 11:1 रोमियों 11:2 रोमियों 11:3 रोमियों 11:4 रोमियों 11:5 रोमियों 11:6 रोमियों 11:7 रोमियों 11:8 रोमियों 11:9 रोमियों 11:10 रोमियों 11:11 रोमियों 11:12 रोमियों 11:13 रोमियों 11:14 रोमियों 11:15 रोमियों 11:16 रोमियों 11:17 रोमियों 11:18 रोमियों 11:19 रोमियों 11:20 रोमियों 11:21 रोमियों 11:22 रोमियों 11:23 रोमियों 11:24 रोमियों 11:25 रोमियों 11:26 रोमियों 11:27 रोमियों 11:28 रोमियों 11:29 रोमियों 11:30 रोमियों 11:31 रोमियों 11:32 रोमियों 11:33 रोमियों 11:34 रोमियों 11:35 रोमियों 11:36



रोमियों 11:9 का अर्थ – दाऊद की अभिप्रेरणा
सीधे शब्दों में, इस पद में दाऊद की एक भविष्यदर्शी कल्पना उद्धृत है—वे यह कहते हैं कि परमेश्वर की योजना के प्रति असंतोषजनक और अविश्वासी प्रवृत्ति लोगों के दैनिक भोजन तक में बाधा बन जाती है, ताकि वे फंदे में पड़ें और दंड को सहन करें। यह उद्धार हेतु चयनित जाति के भीतर जड़ें जमा चुकी नास्तिकता और आत्म-विश्वास की प्रतिक्रिया है, जो अंततः उनको गिराने वाली बन जाती है।
संदर्भ-पृष्ठभूमि
रोमियों की पंक्तियाँ नीतिशास्त्र और उद्धार-योजना पर केंद्रित हैं। एपोस्टल पॉल बताते हैं कि ईश्वर की चुनाव-योजना में जाटिवांध (जैसी कि इस्राएल के भीतर) प्रतिघात, अविश्वास, और तथाकथित “आत्म-ज्ञान” के कारण वे बाँध में पड़ जाते हैं। दाऊद की यह प्रार्थना उक्त मानसिक स्थिति का परिणाम है—मनुष्य की मौन-अपेक्षा, वे जो भोजन और जीवन के साधनों को भी ठेस पहुँचाने वाले जाल बनाते हैं, ताकि वे दण्ड के अधिकारी बनें।
व्याख्या के मुख्य बिंदु
- दाऊद की भाषा चित्रण करती है कि भोजन और दैनिक आवश्यकताएं कभी-कभी आत्म-निष्ठा की कमी और भगवत-आग्रह के कारण फंदे बन जाती हैं।
- इस प्रकार के अनुभव से लोगों में दण्ड और पाप का घेरा बनता है—उन्हें स्वयं अपनी रणनीति में फँसना पड़ता है।
- यह नाटकात्मक स्वर पूर्व-निर्धारित परिणामों की चेतावनी है कि परमेश्वर की कठोरता नहीं, बल्कि नि:, सन्तुष्टता और विश्वास की कमी से नुकसान होता है।
सारगर्भित निष्कर्ष (थीम-फ्लैग)
अनुदिष्ट क्रॉस-रेफरेंसेस (संक्षेप)
यहोशू 7 और 1 कुरिन्थियों 10 जैसे स्थान संकेत करते हैं कि उन्मुक्तता में यहूदी-जातियों के भीतर भी क्या-क्या फंदे बन जाते हैं, और प्रेरित पॉल के व्याख्यान में इस्राएल की अस्वीकृति को कैसे संभाला गया है।
वास्तविक अनुप्रयोग
जीवन के दैनिक व्यवहार में, हमें भोजन, सफलता और सफलता-आकांक्षा के प्रति संतुलन बनाए रखना चाहिए। परमेश्वर की योजना के अनुरूप चलना भय, क्रोध या अविश्वास के बजाय विश्वास और नम्रता निभाने से संभव है।
टीका-संशोधन (पुनरावलोकन)
मार्थ्वा हल्की-फुल्की व्याख्या में दाऊद की यह चर्चा मानती है कि लोगों के भीतर छिपी असंतुष्टियाँ उन्हें पथ-भ्रष्ट कर देती हैं। ऐतिहासिक दृष्टि से यहूदियों में लंबे समय तक ईश्वर-निष्ठा के विरुद्ध अस्वीकार की प्रवृत्ति का संकेत है, जिसे उद्धार के नवीन मार्ग में परिवर्तन की आवश्यकता है।
कथन-योग
यह पंक्ति याद दिलाती है कि ईश्वर किसी को हार-जीत के आचरण से नहीं, बल्कि उसकी समर्पण-विश्वास से आशीर्वाद देते हैं। जीवन के भोजन-स्रोतों के माध्यम से भी हमें अपनी हृदय-स्थिति जांचनी चाहिए—क्या हम परमेश्वर पर निर्भर हैं, या अपनी योजनाओं में फँस जाते हैं?
उद्धृत हिस्से के संकेत
इस पाठ के संदर्भ में, कुछ प्रमुख टीकाकारों के विचारों के संकेत पंक्तियों में समाहित होते हैं। अगर आवश्यक हो, तो मैंMatthew Henry, Albert Barnes, Adam Clarke के संक्षिप्त विश्लेषणों के सत्यापित उद्धरणों का उल्लेख कर सकता हूँ।