रोमियों 11:31 बाइबल पद का अर्थ और पद-दर-पद टीका

वैसे ही उन्होंने भी अब आज्ञा न मानी कि तुम पर जो दया होती है इससे उन पर भी दया हो।

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रोमियों 11:31 पद-दर-पद बाइबल टीका

रोमियों 11:31 — दया की व्यापक पुनरावलोकन

मुख्य interpretive बिंदु: पवित्रशास्त्र में दिखती यह पंक्ति बताती है कि परमेश्वर ने पहले गैडों को अस्वीकृत किया था, ताकि अब वे दया के कारण भी परस्पर पुनः प्राप्त हों। यह दया और अवज्ञा के क्रम में मित्रीशक्ति के सिद्धांत को दिखाता है: ईश्वर की योजना सार्वजनिक रूप से उजागर होती है जब वह गैर-याक्त व्यक्तियों पर दया दिखाते हैं ताकि वे भी दया के पात्र बनें। यह पाठ हमें यकीन दिलाता है कि न तो किसी को एकदम बाहर किया गया माना जाना चाहिए, न ही किसी को अंततः दया से बाहर रखा गया; सब पर परमेश्वर की दया की मेहरबानी काम करती है।

लिटरेरी संदर्भ (लक्षित पाठ्य-संदर्भ की संरचना)

पात्र: रोमियों 11 अध्याय में पॉल यह दर्शाते हैं कि ईश्वर की योजनाओं में यहूदी और गैर-यहूदी सभी भागीदार हैं। वासना और अविश्वास के बावजूद, वे दया के गूदे में हैं। verse 31 इस क्रम का मोड़ है: पहले उन्होंने भी आज्ञा नहीं मानी कि तुम पर जो दया होती है उससे उन पर भी दया हो।

महत्त्वपूर्ण विचार: यह वाक्य गैण के रूप में एक दायरे को खोलता है—जो लोग पहले अस्वीकार्य माने गए थे, वे अब दया के पात्र बन रहे हैं, ताकि पूरे समुदाय में परमेश्वर की दया प्रकाशित हो सके।

धार्मिक-परिप्रेक्ष्य (तेहमीक महत्त्व)

1) यहूदी और गैर-यहूदी के बीच एक दया-संलग्नता है; परिवर्तन का उद्देश्य एक नई एकता है, जो कि परमेश्वर की योजना के अनुसार है।

2) नर-नर और निर्णयों के बीच, दया का केंद्र परमेश्वर के करुणा-भाव में है, न कि मानवीय श्रेष्ठता में।

बाइबल cross-references और उनके संक्षेप अर्थ

  • रोमियों 9:24-26 — परमेश्वर अत्यंत दयालु हैं और न कि मनुष्यों के भाव पर निर्भर करते हैं; यह व्यवस्था यहूदियों और अन्य राष्ट्रों के बीच दया के समान्तर क्रम दिखाती है।
  • यहोशू 6:26 (उद्धरण संदर्भ के लिए) — यहूदी-वचनों में दया और चेतावनी के बीच संतुलन पर प्रकाश डालता है कि परमेश्वर के निर्णय कभी टलते नहीं हैं।
  • 1 कुरिन्थियों 12:13 — सभी लोगों को एक ही Spirit से एक शरीर में जोड़ा गया है; यह दया के सार्वभौम संदेश का निहितार्थ समर्थन करता है।

संक्षेप व्याख्या: एक ही परमेश्वर, जो सभी पर दया और न्याय को समान रूप से लागू करते हैं, वह नये प्रकार के एकता निर्माण के लिए पुरानी अस्वीकृति को भी मार्ग बनाते हैं।

चिंतन के प्रश्न

  • क्या मैं इस बात को समझ पाता/पाती हूँ कि दया परमेश्वर की स्‍वामित्व-योजना का हिस्सा है, चाहे मैं किसी पारस्परिक समूह से क्यों न जुड़ा हूँ?
  • क्या मैं दूसरों के लिए दया के उपहार को स्वीकारने के लिए तैयार हूँ, ताकि पूरे समुदाय के लिए ईश्वर की कृपा उजागर हो सके?
  • क्या मेरी अपेक्षाओं की सीमा परमेश्वर की दया के फैलाव से बढ़कर है?

संक्षिप्त निष्कर्ष

रोमियों 11:31 में उद्धृत दया का पाठ यह सन्देश देता है कि यह प्रभु की योजना की एक गतिशीलता है: जिसने पहले अवज्ञा की, वे भी दया से आच्छादित होंगे; और जिन्हें पहले दया मिली, वे अब भी दया के पात्र बनते हैं, ताकि सम्पूर्ण विश्व में ईश्वर की दया विस्तारित हो सके। यह एकता और करुणा का धर्मग्रंथ है—यह बताता है कि दया कभी एकांत नहीं रहती; वह सभी को भागीदार बनाती है और परमेश्वर की महान योजना को साकार करती है।

*** इस टीका में सार्वजनिक डोमेन में उपलब्ध कुछ प्राचीन और क्लासिक स्रोतों की सामग्री शामिल है। कुछ सामग्री को कृत्रिम बुद्धिमत्ता उपकरणों की सहायता से संसाधित, संक्षिप्त या अनुवादित किया गया हो सकता है। हर व्याख्या को बाइबल के पूरे पाठ और उसके संदर्भ के साथ अवश्य जाँचें। यदि आपको कोई त्रुटि या ऐसा अनुवाद मिले जिसे सुधारने की आवश्यकता हो, तो कृपया हमसे संपर्क करें।

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