Old Testament
उत्पत्ति निर्गमन लैव्यव्यवस्था गिनती व्यवस्थाविवरण यहोशू न्यायियों रूत 1 शमूएल 2 शमूएल 1 राजाओं 2 राजाओं 1 इतिहास 2 इतिहास एज्रा नहेम्याह एस्तेर अय्यूब भजन संहिता नीतिवचन सभोपदेशक श्रेष्ठगीत यशायाह यिर्मयाह विलापगीत यहेजकेल दानिय्येल होशे योएल आमोस ओबद्याह योना मीका नहूम हबक्कूक सपन्याह हाग्गै जकर्याह मलाकीVerse
रोमियों 11:1 रोमियों 11:2 रोमियों 11:3 रोमियों 11:4 रोमियों 11:5 रोमियों 11:6 रोमियों 11:7 रोमियों 11:8 रोमियों 11:9 रोमियों 11:10 रोमियों 11:11 रोमियों 11:12 रोमियों 11:13 रोमियों 11:14 रोमियों 11:15 रोमियों 11:16 रोमियों 11:17 रोमियों 11:18 रोमियों 11:19 रोमियों 11:20 रोमियों 11:21 रोमियों 11:22 रोमियों 11:23 रोमियों 11:24 रोमियों 11:25 रोमियों 11:26 रोमियों 11:27 रोमियों 11:28 रोमियों 11:29 रोमियों 11:30 रोमियों 11:31 रोमियों 11:32 रोमियों 11:33 रोमियों 11:34 रोमियों 11:35 रोमियों 11:36



मुख्य अभिपादन
रोमियों 11:23 में कहा गया है कि यदि वे अविश्वास में न रहें, तो वे भी साटे जाएँगे; अर्थात परमेश्वर उन्हें फिर से लगेगा और उनकी अविश्वास के कारण उनकी स्थिति बदलेगी। लेखक पौलुस के संदर्भ में यह पाठ यह दर्शाता है कि ईसाई कानूनी-युग से बाहर आकर भी चूंकि ईश्वर की कसौटी और कृपा के अनुसार बदलाव कर सकता है, इसलिए यह आश्वासन देता है कि इस्राएली ईश्वर की योजना में फिर से शामिल हो सकते हैं, যদি वे विश्वास के मार्ग पर लौटें। यह हिन्दू-समाप्ति नहीं, बल्कि ईश्वर की करुणा और निष्ठा की गारंटी है — अविश्वास के बावजूद भी परमेश्वर की योजना अस्थिर नहीं है।
कथात्मक संदर्भ (साहित्यिक परिप्रेक्ष्य)
पौलुस Romans 11 में इस प्रश्न-उत्तर के रूप में दिखाते हैं कि किस प्रकार यहूदी औरGentile दोनों ईश्वर के मोड़-परिवर्तन के योग्य हैं। 11:23 उस इकाई का हिस्सा है जो यह बताती है कि ईश्वर नेचुरल शाखाओं के साथ अपना विधान बनाये रखा है; यदि वे अविश्वास में रहते, तो वे काट दिए जाते; परंतु यदि वे अविश्वास छोड़ दें और विश्वास में लौट आएं, तो वे फिर से लगाये जा सकते हैं। यह एक दया और न्याय की रेखा है, जिसमें परमेश्वर की इच्छा सभी को उद्धार की ओर मोड़ती है।
धार्मिक महत्त्व ( theology )
यह वचन परमेश्वर की सार्वभौमिक योजना और उसकी करुणा का प्रमाण है। अविश्वास के बावजूद उसका चुनाव और फिर से संयोजन संभव है। यहूदी-गेंटाइल रिश्ते में भी एक सन्तुलन दिखता है: परमेश्वर की सच्चाई और वचन का पालन करते हुए, विश्वास से लौटना ही उद्धार का मार्ग है। साथ ही, यह चेतावनी भी है कि अविश्वास में स्थिर रहना परिणाम-रूपक हो सकता है; विकल्पों के बीच ईश्वर के कार्य-योजना की दिशा का एहसास ज़रूरी है।
पवित्र शास्त्र से सम्बन्ध (Cross-references)
इन संदर्भों में दिखता है कि परमेश्वर की करुणा अविश्वास के कारण जल्दी-जल्दी अस्वीकार नहीं करती, बल्कि विश्वास के मार्ग पर वापस आने की आशा देता है।
ध्यान में रखने योग्य प्रश्न (Reflection questions)
सार निष्कर्ष
रोमियों 11:23 एक उम्मीद भरी घोषणा है: परमेश्वर अविश्वास में पड़े लोगों को भी वापस बुलाने की ताकत रखते हैं। यह वचन ईश्वर की अटल सच्चाई और अनंत करुणा का संकेत देता है कि वे सबके उद्धार के लिए योजना बनाते रहते हैं। यदि हम विश्वास में लौटें, तो परमेश्वर उन्हें फिर से लगाना शुरू कर देंगे—यह किसी व्यक्ति की योग्यता नहीं, पर उसकी कृपा पर निर्भर है।
टिप्पणियाँहित उद्धरण (आउटपुट में स्पष्ट):
Matthew Henry से कोई स्पष्ट उद्धरण यहाँ नहीं दिया गया है; Albert Barnes और Adam Clarke के छोटे-से-चयनित टिप्पणी-रेखाओं के साथ, समान विचारधारा के संकेत मिलते हैं कि अविश्वास के कारण काटना संभव है, पर विश्वास से फिर लगना भी सम्भव है।