Old Testament
उत्पत्ति निर्गमन लैव्यव्यवस्था गिनती व्यवस्थाविवरण यहोशू न्यायियों रूत 1 शमूएल 2 शमूएल 1 राजाओं 2 राजाओं 1 इतिहास 2 इतिहास एज्रा नहेम्याह एस्तेर अय्यूब भजन संहिता नीतिवचन सभोपदेशक श्रेष्ठगीत यशायाह यिर्मयाह विलापगीत यहेजकेल दानिय्येल होशे योएल आमोस ओबद्याह योना मीका नहूम हबक्कूक सपन्याह हाग्गै जकर्याह मलाकीVerse
रोमियों 11:1 रोमियों 11:2 रोमियों 11:3 रोमियों 11:4 रोमियों 11:5 रोमियों 11:6 रोमियों 11:7 रोमियों 11:8 रोमियों 11:9 रोमियों 11:10 रोमियों 11:11 रोमियों 11:12 रोमियों 11:13 रोमियों 11:14 रोमियों 11:15 रोमियों 11:16 रोमियों 11:17 रोमियों 11:18 रोमियों 11:19 रोमियों 11:20 रोमियों 11:21 रोमियों 11:22 रोमियों 11:23 रोमियों 11:24 रोमियों 11:25 रोमियों 11:26 रोमियों 11:27 रोमियों 11:28 रोमियों 11:29 रोमियों 11:30 रोमियों 11:31 रोमियों 11:32 रोमियों 11:33 रोमियों 11:34 रोमियों 11:35 रोमियों 11:36



रोमियों 11:12 का महत्त्व और संदर्भ
यह वाक्य प्रेरित पौलुस के विस्तृत विचार-विमर्श का हिस्सा है जिसमें वह यह बताने का प्रयास करते हैं कि यहूदी और अन्यजातियों के बीच ईश्वर की योजना कैसे संचालित हो रही है। जब गिरना किसी की तपस्या बनकर विश्व के लिये धन बन गया है, तब उनकी भरपूरी से कितना अधिक लाभ मिलेगा, यह प्रश्न बताता है कि परमेश्वर की स्पष्ट कृपा कैसे बहुधा विरोधाभासों के बीच काम करती है।
पारंपरिक संदर्भ और मूल संदेश
पौलुस यह तर्क दे रहा है कि यदि इस्राइल के अस्वीकृत होने से Gentiles का रूपांतर और विश्वास में प्रवेश हुआ है, तो इस गिरावट की कीमत को देखते हुए उनके पुनः विश्वास तथा उनकी भरपूर भागीदारी से विश्व भर में कितनी बड़ी कृपा और संपदा प्राप्त होगी। यहाँ “गिरना” से आशय यह नहीं कि लोगों का अंत, बल्कि यहूदियों के लिए एक विशेष पहलू है जिसमें परमेश्वर का विकल्प कुछ समय के लिए अन्यजातियों के लिये खुल गया। इस घटना से ईश्वर के कार्यक्रम की बहुविधता और उनके उद्धार के सर्वव्यापी लाभ स्पष्ट होते हैं।
मुख्य संदेश और थीम
पूर्ववर्ती शिक्षाएं और क्रॉस-रेफरेंस
खास तौर पर नीचे दिए संदर्भ इस विचार को पुष्ट करते हैं कि कैसे निर्बलता और असफलता भी ईश्वर की महान योजना में भागीदार बन सकते हैं:
पवित्र पवित्रता और पिता की योजना
पौलुस का उद्देश्य यह है कि विश्वास और आशा का पूरक संबंध बने। गिरावट के बावजूद, परमेश्वर की कृपा और चिरस्थायी वचन की पुष्टि है—जो सभी के लिये उद्धार का मार्ग खोलती है। यह exhortation हमें चेतावनी के बजाय आशा और लगन के साथ जीवन बिताने के लिए प्रेरित करती है कि हम अपने भाइयों के लिये प्रार्थना और-परोपकार को पहली प्राथमिकता दें।
व्यावहारिक अनुप्रयोग
- बाइबल के भीतर एकता का संदेश: विश्वास के विविध रूपों को स्वीकारना और एक ही उद्धारपरक स्रोत को मानना।
- उदारता और नम्रता: दूसरों के लाभ के लिये अपने पक्ष के तर्कों से ऊपर उठना।
संक्षिप्त देवotional विचार
जब गिरना संसार के लिये धन बन गया, तो हम देखते हैं कि परमेश्वर कैसे अपनी कृपा के अवसर खोलते हैं। हमारे जीवन में भी जब कुछ विपरीत लगता है, तब ईश्वर की योजना हमें नई आशा और बहुमूल्य अवसर देती है। प्रत्येक प्रयास जिसमें हम ईश्वर के ग्राही मानते हैं, वह विश्व के लिये वरदान बन सकता है।
cross-reference सारांश
और परिचित बाइबल पड़ाव जो इस संदेश को गहराई देते हैं:
व्याख्यात्मक टिप्पणी के अनुसार, इस वचन में परमेश्वर की सार्वभौमता और करुणा स्पष्ट रूप से उद्घाटित होती है—कि हर गिरावट अंततः उसकी योजना के अनुसार फल देती है, और यही कारण है कि हम आशा से जीते हैं।
कठोर किन्तु परस्पर पूरक साक्ष्य: “यह गिरना जगत के लिये धन और उनकी घटी अन्यजातियों के लिये सम्पत्ति का कारण हुआ”—यहाँ शाब्दिक अंश से बचते हुए, यह विचार पाया जाता है कि अवरोधों के बीच भी ईश्वर की कृपा गतिशील रहती है, और इस तर्क से विश्वासियों को विनम्रता और ग्रहणशीलता की सीख मिलती है।