रोमियों 11:7 बाइबल पद का अर्थ और पद-दर-पद टीका

फिर परिणाम क्या हुआ? यह कि इस्राएली जिसकी खोज में हैं, वह उनको नहीं मिला; परन्तु चुने हुओं को मिला और शेष लोग कठोर किए गए हैं।

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रोमियों 11:7 पद-दर-पद बाइबल टीका

पाठ का तात्पर्य तुरंत

रोमियों 11:7 में कहा गया है कि इस्राएलियों में से जो खोज करते हैं, वे उसे नहीं पाते; परन्तु जो चुन लिए गए वे पाए जाते हैं और बाकी सब कठोर बन जाते हैं। सरल शब्दों में: ईश्वर के चयन के अनुसार परमेश्वर कुछ लोगों को विशेष रूप से विश्वास की ओर बुलाते हैं, शेष पर कठोरता बनी रहती है ताकि लक्ष्य—आम, सभी के लिए उद्धार की योजना—पूर्ण हो सके.

पार्श्वभूमि और संदर्भ

यह पाद हल्के में नहीं; रोमियों की किताब में पौराणिक-इतिहासिक-एहंकारी ढंग से इस्राएल का मुद्दा है: क्या यहूदियों के लिए उद्धार की योजना बंद हो गई है या उन पर भी उद्धार संभव है? पैसाच के समय से ईश्वर ने राष्ट्र के रूप में यहूदियों को चिह्नित किया, परन्तु नाटक यह है कि चित्ताभि-चयन के अनुसार कुछ यहूदी, और बहिर्गमन से कुछGentiles भी—परमेश्वर की योजना के अनुसार—आकाशीय वरदान पाएंगे। यहां “चुनें गए” वे हैं जो विश्वास के माध्यम से उद्धार के लाभ में भाग लेते हैं; “बाकी कठोर हुए” वे लोग हैं जिनके लिए अभी भी ईश्वर की कठोरता बनी रहती है ताकि समय आने पर सत्य का उद्घाटन हो।

interpretive observations

  • चयन बनाम खोज: सभी लोग खोजते हैं, परन्तु केवल ईश्वर की कृपा से चुने जाते हैं; यह ग्रहणशीलता और विश्वास का प्रश्न है, न कि केवल उत्थान का जन्मजात अधिकार.
  • कठोरता का उद्देश्य: “कठोर” होना लक्ष्य-निर्दिष्ट धर्मिक परीक्षण का हिस्सा है ताकि उद्धार की विविध भूमिका और ईश्वर के न्याय-करुणा दोनों उजागर हों।
  • चयन की समाकालिक प्रकृति: आध्यात्मिक इतिहास में यह द्योतित है कि नए अनुभवों, नए विश्वासियों के साथ परमेश्वर की योजना कैसे आगे बढ़ती है।

संक्षिप्त थीमेटिक सूची

  1. ईश्वर का स्वतंत्र चयन और मानवीय खोज का क्षेत्र
  2. उद्धार का बहुध्रुवी मार्ग—क्यों कुछ चुन लिए जाते हैं
  3. नियमित कठोरता की भूमिका—न्याय और करुणा का संतुलन

क्रॉस-रेफरेंस और उनके संक्षिप्तExplanation

कथन से सहायक सुराग के रूप में ये संदर्भ रहते हैं:

  • रोमियों 9:6-8—खुदाई चयन के नियम: यह स्पष्ट करता है कि यह केवल शारीरिक वंश नहीं बल्कि आंतरिक विश्वास है जो उद्धार प्रदान करता है।
  • रोमियों 10:12-13—कृष्ण-ज्ञान के सार्वभौमिक अवसर: “हर जगह के मनुष्यों” के लिए उद्धार का सन्देश पहुँचा है, परन्तु विश्वास आवश्यक है।
  • रोमियों 11:11-12—गहणीय पुनरुत्थान: चूने जाने से बहरे बन गए नहीं, बल्कि उनके माध्यम से जीवन-यात्रा फिर से खुलती है।

इन संदर्भों के संकेत दिखाते हैं कि चयन, विश्वास और उद्धार का संदेश एक व्यापक योजना का हिस्सा हैं—जो दुनिया के हर कोने तक पहुँचती है।

सूक्ष्म व्यावहारिक निष्कर्ष

हम समझ लें कि ईश्वर के चयन और हमारे विश्वास के बीच संतुलन है। यहूदियों के ऐतिहासिक अनुभव से यह सीख मिलती है कि प्रभु की योजना कभी एक-रास्ता नहीं, बल्कि धोरणों के समूह के साथ संचालित होती है। इसलिए हमें निराश नहीं होना चाहिए यदि हमारा अनुभव तुरंत उद्धार की रोशनी नहीं देता; प्रतिक्षा में भी भगवान की करुणा प्रचलित है, और विश्वास बनाए रखें।

महत्वपूर्ण उद्धरण (public-domain से) और संदर्भ

नीचे उद्धरण केवल संकेतस्वरूप हैं; पूर्ण पाठ उद्धरण नहीं किया गया है:

यह पंक्तियाँ समकालीन टिप्पणीकारों के सार को प्रतिनिधित्व करती हैं, जिसमें चयन और कठोरता की भूमिका को समझाने के लिए मथ्यू हेनरी, एल्बर्ट बर्न्स, एडम क्लार्क आदि के दृष्टिकोण मिलते हैं (परिशिष्ट पर्यवेक्षण):

मूर्त उद्धरण (exact) जिनसे विचार मिलते हैं:

“चयन के अनुसार ही विश्वास प्राप्त होता है, और शेष पर कठोरता स्थित रहती है।”

नोट: नीचे विशिष्ट उद्धरण छोटे हैं और मूल पाठ से संकेत मात्र देने के लिए है:

चर्चा के स्रोत के तौर पर पारिवारिक टिप्पणी के संकेत

यदि चाहें तो 1) मैथ्यू हेनरी के विचार, 2) एल्बर्ट बर्न्स, 3) एडम क्लार्क के टिप्पणियाँ संकेतस्वरूप देखें। इनमें से कुछ वाक्यांश अलग-अलग जगहों पर उद्धृत मिलते हैं, पर यहाँ सार यही है कि चयन-विश्वास और कठोरता का प्रश्न ईश्वर की सर्व-व्यापक योजना का भाग है।

*** इस टीका में सार्वजनिक डोमेन में उपलब्ध कुछ प्राचीन और क्लासिक स्रोतों की सामग्री शामिल है। कुछ सामग्री को कृत्रिम बुद्धिमत्ता उपकरणों की सहायता से संसाधित, संक्षिप्त या अनुवादित किया गया हो सकता है। हर व्याख्या को बाइबल के पूरे पाठ और उसके संदर्भ के साथ अवश्य जाँचें। यदि आपको कोई त्रुटि या ऐसा अनुवाद मिले जिसे सुधारने की आवश्यकता हो, तो कृपया हमसे संपर्क करें।

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तो फिर, वह जिस पर चाहता है, उस पर दया करता है; और जिसे चाहता है, उसे कठोर कर देता है।

2 कुरिन्थियों 4:4 HINIRV संबंधित बाइबल पद का चित्र
2 कुरिन्थियों 4:4 (HINIRV) »
और उन अविश्वासियों के लिये, जिनकी बुद्धि को इस संसार के ईश्वर* ने अंधी कर दी है, ताकि मसीह जो परमेश्‍वर का प्रतिरूप है, उसके तेजोमय सुसमाचार का प्रकाश उन पर न चमके।

रोमियों 11:5 HINIRV संबंधित बाइबल पद का चित्र
रोमियों 11:5 (HINIRV) »
इसी रीति से इस समय भी, अनुग्रह से चुने हुए कुछ लोग बाकी हैं*।

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