Old Testament
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रोमियों 11:27 का सरल अर्थ
यह पद कहता है कि परमेश्वर पाप के कारण होने वाले फटाफटपन को दूर कर देगा और उनकी वाचा को उनके साथ पुनः स्थापित करेगा; अर्थात् यह कहा गया है कि यह हमारे लिए एक नया, पक्का संबंध है जो उनकी पापों को दूर करने पर आधारित है। यह उद्धार का दायरा यहूदियों के लिए भी खुला है और भविष्य में पूरी तरह से यरूशलेम में सम्पन्न होगा।
प्रसंगिक पृष्ठभूमि
रोमियों के अध्याय 9–11 में पौलुस यह प्रश्न उठाते हैं कि इज़राइल क्यों अब पूरी तरह से आशीर्वाद नहीं पा रहा है, जबकि परमेश्वर की चुनाव-योजना स्थिर है। यहाँ रोमियों 11:27 में यह संकेत है कि पाप-मोक्ष का नवीनीकरण, जोशेया की किलेबंदी नहीं बल्कि दयालुता और नये नियम के अनुसार किया जाएगा। संदर्भ के अनुसार यह उद्धार एक नए करार के अंतर्गत है जो पूर्ववर्ती पापों को दूर कर के इस्राइल के साथ पुनर्संयोजन की गारंटी देता है, जैसा कि भविष्यवाणी की गई है।
interpretive observations
थीमेटिक सार
समानुभाव से जुड़े अन्य पद
यशया की कुछ प्रमुख भविष्यवाणियाँ—यशा 27:9 और 43:25—संकेत देती हैं कि बहिर्गमन के बिना भी पाप-निवारण और पथ-निर्माण संभव है; यह उद्धारपूर्ण योजना परमेश्वर की करुणा पर केंद्रित है।
प्रायोगिक निष्कर्ष
हमें यह स्मरण रखना चाहिए कि परमेश्वर की यह वाचा व्यक्तिगत जीवन में भी क्रियाशील है: वह हमारे पापों को दूर कर के एक नया संबंध देता है। यह केवल इस्राइल तक सीमित नहीं, पर संसार के सभी विश्वासियों के लिए उद्धार का मार्ग खोलता है—खासकर जब हम उसकी कृपा पर भरोसा करें।
संक्षिप्त क्रॉस-रेफरेंस और उनके सार
नोट: माउंटेद महापुरुषों के टिप्पणी-स्रोतों से मिलती-जुलती धारणाओं के अनुसार, मैथ्यू हेनरी, आर्थर बार्न्स और एडम क्लार्क के सार्वजनिक-डाक परिभाषित विचार यहाँ समाहित किये गए हैं, परन्तु इनमें से किसी एक के पूर्ण वाक्यों को यहाँ पूर्ण उद्धृत नहीं किया गया है; केवल संक्षिप्त संकेत दिए गए हैं।
मुख्य takeaway: परमेश्वर की पवित्र वाचा से पाप दूर होते हैं और हमारे भीतर एक नया, स्थायी संबंध जन्म लेता है; यह उद्धार का विराट दायरा हर विश्वासी के लिए खुला है, और यह भविष्य की महिमा में पूर्णता पाएगा।