भजन संहिता 69:22 बाइबल पद का अर्थ और पद-दर-पद टीका

उनका भोजन उनके लिये फंदा हो जाए; और उनके सुख के समय जाल बन जाए।

भजन संहिता 69:22 पद-दर-पद बाइबल टीका

भजन संहिता 69:22 – उनके भोजन उनके लिये फंदा हो जाए; और उनके सुख के समय जाल बन जाए

तत्व-संदर्भ और पृष्ठ-स्थिति

यह भजन संहिता का एक भाग है जहाँ लेखक, आमोस नहीं, बल्कि दावीद के प्रतीकात्मक यातना-आहत जीवन के बीच परमेश्वर की न्यायपूर्ण क्रिया और प्रतिशोध को स्मरण कराते हैं। यह पंक्ति न सिर्फ उन लोगों के लिए पराक्रमपूर्ण चेतावनी है जो प्रत्यक्ष या परोक्ष रूप से कष्ट पहुंचाते हैं, बल्कि यह विश्वासयोग्य पाठक को दिखाती है कि स्वीकार्य और अस्वीकार्य व्यवहार के परिणाम प्रकृति के विधान के अनुसार होते हैं।

देवता-विश्वास और पाठ का प्रमुख साक्ष्य

कथन में भोजन और सुख को “फंदा” और “जाल” के रूप में दिखाया गया है—यानी जो प्रेम, साझा-जीवन और आशीषों के स्रोत होते हैं, वे प्रतिद्वंद्वी की नीयत से विषाक्त हो जाते हैं। यह चित्रण एक վտանգसूचक चेतावनी है कि अन्याय से संचालित व्यवहार अपने ही मार्ग में गिरावट लाते हैं और दिन-प्रतिदिन के आशीर्वाद धीमे-धीमे काटे जाते हैं। भजनकार यह दर्शाते हैं कि परमेश्वर के साथ जीवित संपर्क के प्रति अविश्वास, विद्रोह या दमनकारी प्रवृत्ति अंततः व्यक्ति के लिए अस्थिर और विनाशकारी परिणाम उत्पन्न करती है।

शब्दों और छवियों के अर्थ स्पष्ट करना

  • : यहाँ दैनिक आहार, राहत और समृद्धि के स्रोत के रूप में प्रतीक है—परमेश्वर के आशीर्वाद का सामान्य अर्थ।
  • : शारीरिक या नैतिक कमी, अन्यायपूर्ण चालें या शत्रुवचन पथ जिन्हें लोग अपनाते हैं, जो अंततः उनके लिए विपत्ति बन जाते हैं।

अन्वेषणीय पंक्तियाँ—अनुसंधान संबंधी दायरा

यह विचारधारा पवित्र-ग्रंथ के कुछ अन्य उद्धारणों से संलग्न है जहाँ अधिकार-न्याय और क्रूरतापूर्ण कृत्यों के परिणाम स्पष्ट होते हैं:

  • क्लेम-उद्धरण: अन्याय करने वालों को उनके भ्रष्ट मार्ग से परावर्तित किया जाएगा; परमेश्वर का न्याय अंततः सामने आता है।
  • यही असामंजस्य अन्य स्थलों पर भी मिलती है जहाँ प्रभु का स्मरण कराते हुए कहा गया है कि पाप के फल मौत की ओर ले जाते हैं।

प्रसंग-सहयोगी अन्य आयतें (संक्षिप्त संदर्भ)

• प्रयोजन के अनुसार न्याय के सिद्धांत को दर्शाती अन्य आयतें जो बताती हैं कि गलत व्यवहार स्वयं को नष्ट करता है।

• आशीर्वाद और दया के स्रोत के रूप में परमेश्वर की पवित्रता का पुनः स्मरण

आज की अनुप्रयोग-जीवन के लिए

1) अपने आचरण की जाँच: क्या हम किसी को नुकसान पहुँचाने के लिए योजनाबद्ध तरीके से हलचल कर रहे हैं या हमारे शब्द और व्यवहार दूसरों के लिए फंदा बन रहे हैं?

2) आशीर्वाद की रक्षा: नियंत्रण, स्थान-भेद और अन्याय की प्रवृत्ति से प्रेरित आचरण से बचें ताकि परिवार, समुदाय और विश्वास-सम्प्रदाय में विश्वासघात न हो।

3) प्रार्थना और विवेक: परमेश्वर की न्यायपूर्णता में विश्वास बनाकर, अपने सुख-दुख के स्रोत को सही दिशा दें, ताकि जीवन एक सही-समझ के साथ आगे बढ़े।

सार-संयोजन

भगवान के न्याय के संदर्भ में इस पंक्ति का संदेश है: जो लोग दूसरों के लिये फंदे बनते हैं, वे अपने ही सुखों के समय में जाल में फंस जाते हैं। यह याद दिलाता है कि दया, सत्य और समानता से प्रेरित जीवन ही स्थिर आशीषों का आधार है।

कॉन्टेक्स्ट-क्रॉस रेफरंस

• दाऊद की अन्य भजनावली से यह प्रेरणा मिलती है कि अन्याय के फल समय-समय पर नकारात्मक आते हैं।

• पवित्र ग्रंथ के उद्धार-न्याय के विषय से जुड़ी अन्य आयतें भी यह दर्शाती हैं कि ईश्वर असत्य और दमन के विरुद्ध सक्रिय रहते हैं।

नोट: नीचे उपलब्ध शॉर्ट-उद्धरण केवल Matthew Henry, Albert Barnes या Adam Clarke से वास्तविक शब्दों की सीमित प्रस्तुति के लिए हैं; पूर्ण टेक्स्ट उद्धृत नहीं किया गया है।

*** इस टीका में सार्वजनिक डोमेन में उपलब्ध कुछ प्राचीन और क्लासिक स्रोतों की सामग्री शामिल है। कुछ सामग्री को कृत्रिम बुद्धिमत्ता उपकरणों की सहायता से संसाधित, संक्षिप्त या अनुवादित किया गया हो सकता है। हर व्याख्या को बाइबल के पूरे पाठ और उसके संदर्भ के साथ अवश्य जाँचें। यदि आपको कोई त्रुटि या ऐसा अनुवाद मिले जिसे सुधारने की आवश्यकता हो, तो कृपया हमसे संपर्क करें।

भजन संहिता 69:22 समानांतर पद और संबंधित वचन

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जैसा लिखा है, “परमेश्‍वर ने उन्हें आज के दिन तक* मंदता की आत्मा दे रखी है और ऐसी आँखें दी जो न देखें और ऐसे कान जो न सुनें।” (व्य. 29:4, यशा. 6:9-10, यशा. 29:10, यहे. 12:2)

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क्योंकि अज्ञानियों का भटक जाना, उनके घात किए जाने का कारण होगा, और निश्चिन्त रहने के कारण मूर्ख लोग नाश होंगे;

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और वह शरणस्थान होगा*, परन्तु इस्राएल के दोनों घरानों के लिये ठोकर का पत्थर और ठेस की चट्टान, और यरूशलेम के निवासियों के लिये फंदा और जाल होगा। (रोम. 9:32,33)

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