भजन संहिता 69:21 बाइबल पद का अर्थ और पद-दर-पद टीका

लोगों ने मेरे खाने के लिये विष दिया, और मेरी प्यास बुझाने के लिये मुझे सिरका पिलाया*। (मर. 15:23,36, लूका 23:36, यूह. 19:28-29)

भजन संहिता 69:21 पद-दर-पद बाइबल टीका

भजन संहिता 69:21—पीड़ा में विषाक्त अनुभव और सतर्क आत्म-खरच

मुख्य interpretive point: भजनकर्ता द्वारा प्रकट यह दुःखपूर्ण अनुभव दिखाता है कि बुरे लोग भी निरंकुश उपहास और विषाक्त आचरण से दूसरे के दर्द को बढ़ाते हैं, पर ईश्वर की रक्षा और उद्धार के विश्वास से ही अंधकार के बीच भी आशा बनी रहती है। यह आयत क्रूस-युग की स्थिति से मेल खाती है, जहाँ यीशु के प्रताड़ना-युग में भी मसीह की पीड़ा का अर्थ उन्नत किया गया है।

साहित्यिक संदर्भ

भजन 69 एक विराट भ्रातृत्व-यथा रुदन है जिसमें भजनकर्ता—एक विशेष पीड़ित की तरह—दुख और कुण्ठा के बीच ईश्वर की सहायता माँगता है। यहाँ दाहिना भाग अपराध-भाव नहीं, बल्कि शारीरिक पीड़ा के साथ सामाजिक अपमान का भी चित्र है: लोगों ने खाने के लिए विष दिया और प्यास बुझाने के लिए सिरका दिया। यह चित्रण एकदम चरम तक पहुँचता है, पर भजनकर्ता फिर भी ईश्वर के विरुद्ध नहीं खड़ा होता, बल्कि मदद माँगता है और परमेश्वर के लिए अपने विश्वास को बनाए रखता है। संदर्भ के तौर पर मरकु 15:23, 36; लूका 23:36; यूहन्ना 19:28-29 में यीशु की क्रूस-यात्रा के समय इस प्रकार की जल-जलपान और नमक-सी प्यास का उल्लेख मिलता है। यह जोड़ बताता है कि पुराने भजन के दुख की अनुभूति क्रूस-युग के पैग़ंबरियों के साथ खड़ी है।

theological significance

1) पीड़ा में विश्वास की स्थिरता: विष और सिरके जैसी अत्यंत प्रतिकूल चीज़ें भी व्यक्ति के विश्वास को परखे बिना नहीं रहतीं; भजनकर्ता ने अपनी पीड़ा में ईश्वर की नित्यता और मदद की आशा नहीं छोड़ी।

2) निंदात्मक अनुभव बनाम दया: प्रत्यक्ष शारीरिक असहायता के बजाय यह अनुभूति गहरे मानवीय दर्द को प्रकट करती है—जो कि ईश्वर की करुणा से उलझन में नहीं, बल्कि उसे स्पष्ट रूप से खोजती है।

3) मसीह-कार्य के रूपक: यीशु के क्रूस-युग में प्यास और जल-अपमान के अंकन, भजन 69 के वचन से जुड़ते हैं, जो स्पष्ट करता है कि पुरानी प्रतियाँ नई रोशनी में पूर्णता प्राप्त करती हैं।

cross-references और संक्षिप्त व्याख्या

  • मरकुस 15:23 — यीशु को भी क्रूस-Verse पर जलपान के पहले विषाक्त पेय दिये गए; यह दयालु-इनसानी पीड़ा का चित्रण है जो भजन की अनुभूति से संगत है।
  • लूका 23:36 — लोगों ने यीशु को तिरस्कार के साथ जल से भी रोका; पुनः प्यास की पीड़ा क्रूस-यात्रा के साथ जुड़ी है।
  • योहन्ना 19:28-29 — यीशु ने मूर्त रूप से प्यास के कारण जल-पेय की मांग की और यह संकेत देता है कि प्यासना मानवता की गहरी माँग है, जिसे मसीहा पूरा करता है।

विचार के लिए प्रश्न

  • आप अपनी पीड़ा के समय ईश्वर की सहायता को कैसे पहचानते हैं? क्या जीभ पर का विष क्रोध बन कर उभरता है या आत्म-खोज और अभय का मार्ग बन जाता है?
  • कहाँ-जहाँ अन्याय और उपहास दिखते हैं, वहाँ हम कैसे प्रेम, करुणा और ईश्वर-विश्वास बनाए रखते हैं?

संक्षिप्त निष्कर्ष

भजन 69:21 एक कड़वी घटना के बीच भी ईश्वर के साथ भरोसा बनाए रखने की सच्ची भाषा है। यह बताता है कि पीड़ा के पलों में भी ईश्वर की उपस्थिति नहीं टूटती, और पुराने पवित्र लेखों की भविष्यसूचकता नई रोशनी—पश्चात्ताप और उद्धार—की ओर संकेत करती है। यह संदर्भित करता है कि सत्य-विश्वास कठिन समय में भी जीवित रहता है और क्रूस-युग की वास्तविकता की ओर एक गहरी पुल बनती है।

नोट: Matthew Henry, Albert Barnes और Adam Clarke के विवरण की समुचित संक्षिप्त पंक्तियाँ नीचे उद्धृत हैं:

मैथ्यू हेनरी: “...कष्ट के समय परमेश्वर की सहायता का अभाव नहीं होता, बल्कि वह और उसकी कृपा स्पष्ट होती है।”

Albert Barnes: “कष्ट से भरे दिनों में ईश्वर की सुरक्षा और उद्धार की आशा स्थिर रहती है।”

Adam Clarke: “पीड़ा के इन संकेतों में भी यहूदियों के प्रति ईश्वर की निति और उद्धार की योजना उभरती है।”

इन टिप्पणियों से स्पष्ट होता है कि विष और सिरका की उपस्थिति एक तीखा चित्रण है, पर भक्त उनके भरोसे को कभी नहीं छोड़ते।

*** इस टीका में सार्वजनिक डोमेन में उपलब्ध कुछ प्राचीन और क्लासिक स्रोतों की सामग्री शामिल है। कुछ सामग्री को कृत्रिम बुद्धिमत्ता उपकरणों की सहायता से संसाधित, संक्षिप्त या अनुवादित किया गया हो सकता है। हर व्याख्या को बाइबल के पूरे पाठ और उसके संदर्भ के साथ अवश्य जाँचें। यदि आपको कोई त्रुटि या ऐसा अनुवाद मिले जिसे सुधारने की आवश्यकता हो, तो कृपया हमसे संपर्क करें।

भजन संहिता 69:21 समानांतर पद और संबंधित वचन

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उन्होंने पित्त मिलाया हुआ दाखरस उसे पीने को दिया, परन्तु उसने चखकर पीना न चाहा।

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सिपाही भी पास आकर और सिरका देकर उसका उपहास करके कहते थे। (भज. 69:21)

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उनमें से एक तुरन्त दौड़ा, और पनसोख्‍ता लेकर सिरके में डुबोया, और सरकण्डे पर रखकर उसे चुसाया।

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