भजन संहिता 69:13 बाइबल पद का अर्थ और पद-दर-पद टीका

परन्तु हे यहोवा, मेरी प्रार्थना तो तेरी प्रसन्नता के समय में हो रही है; हे परमेश्‍वर अपनी करुणा की बहुतायात से, और बचाने की अपनी सच्ची प्रतिज्ञा के अनुसार मेरी सुन ले।

भजन संहिता 69:13 पद-दर-पद बाइबल टीका

भजन संहिता 69:13 (HINIRV) पर टिप्पणी

इस पद में द्भित होकर दातार, परमेश्वर से प्रार्थना करता है कि वह अपनी करुणा और सच्ची प्रतिज्ञा के अनुसार सुन ले—यही उसकी संकट के समय की अपेक्षा है। स्मरण रहे कि यह भजन गकर्ता के विपत्ति और आक्रांताओं के बीच ईश्वर के विरुद्ध विरोध के बीच भी उसकी आस्था का प्रदर्शन है; परमेश्वर के प्रति भरोसा उसे आत्म-समर्पण और निर्भयता प्रदान करता है।

केंद्रीय तात्पर्य

भजनकार प्रार्थना के समय में अपनी स्थिति स्पष्ट करते हैं—परन्तु हे यहोवा, मेरी प्रार्थना तेरी प्रसन्नता के समय में हो। वह जानता है कि ईश्वर विशेष प्रकार से सुनता है उन समयों में जब प्रार्थनाओं के लिए दिल साफ और विश्वासपूर्ण हो। यह भी संकेत है कि ईश्वर की करुणा और बचाने की प्रतिज्ञा वही आधार हैं जिन पर गायन और प्रार्थना की स्वीकार्यता टिकी है।

मुख्य विचार या थीम

  • परमेश्वर की मृदुहृदयी करुणा और उद्धार की सच्ची प्रतिज्ञा ही प्रार्थना का आधार हैं।
  • “प्रसन्नता के समय” में सुनवाई अपेक्षित है—यानी ईश्वर के समय और उसके उद्देश्य के अनुरूप उत्तर पाना।
  • आत्म-समर्पण और विश्वास के साथ ईश्वर के निर्णय को स्वीकारना, भले परिस्थितियाँ कैसी भी हों।

संलग्न उपदेश (ब्रिजिंग विचार)

1) पूर्ण आत्म-समर्पण: गाता अपनी विपत्ति के बीच भी यह मानता है कि ईश्वर सुन रहे हैं, और वह अपने आप को एकदम भीतर तक खोल देता है—यह भरोसे के साथ आवाज़ उठाने का संकेत है।

2) करुणा की प्रेरणा: यह बताता है कि ईश्वर की करुणा एक सक्रिय शक्ति है जो संकट के समय उसका साक्षात्कार कराती है।

3) प्रतिज्ञा की भूमिका: बचाने की ईश्वर की प्रतिज्ञा उसे आशा और धैर्य देती है कि उत्तर अवश्य आएगा, भले अभी दिखाई न दे।

संबद्ध वचनचित्र

• उपदेशक की निराभिमुख प्रार्थना का स्वर: यहूदा के समय के विपरीत परिस्थितियों में भी भक्त की निर्भय प्रार्थना कैसे गुञ्जित होती है।

• येशु के आगमन से पूर्व की प्रतीक्षा-आस्था का उदाहरण: भरोसे का दायरा भले बड़ा हो, पर परमेश्वर के इन-टाइमिंग के अनुसार उत्तर आते हैं।

• दीन-हीन और निष्कपट प्रार्थना का स्वर: विपरीत परिस्थितियों में भी आत्मा की गहनता और सत्य-विश्वास प्रकट होता है।

पढ़नीय संदर्भ

• भजन संहिता 22:27-28 — लोगों की दुआओं के जवाब और प्रभु की राज्य-प्रतिज्ञा का महत्त्व।

• इब्रानियों 4:16 — धमकियों के समय में विश्वासियों के लिए यूं ही नहीं, बल्कि सहज और दृढ़ प्रार्थना का अवसर।

• रोमियों 12:12 — संकट में स्थिर आशा के साथ प्रार्थना और प्रतीक्षा की exhortation।

व्यावहारिक विचार

आज स्वयं के कठिन अनुभवों के समय आप कैसे प्रार्थना करते हैं? अगर आपका कदम भय या क्रोध से डगमडा रहा है तो इस पद से प्रेरणा लें: अपने दिल की सारी अस्वस्थ धाराओं को ईश्वर के सामने खोल दें, उसकी करुणा और प्रतिज्ञा पर आँखें टिकाएँ, और साहसपूर्वक समय को स्वीकार करें।

संक्षिप्त निष्कर्ष

भजन 69:13 में प्रार्थना एक विश्वासशील व्यक्तित्व की अभिव्यक्ति है जो ईश्वर की करुणा और उसकी सत्य प्रतिज्ञा पर निर्भर है। यह संदेश देता है कि संकट के बीच भी ईश्वर सुनते हैं और समय के अनुसार उत्तर देते हैं—हमारी भूमिका है प्रार्थना, विश्वास और प्रतीक्षा के साथ।

*** इस टीका में सार्वजनिक डोमेन में उपलब्ध कुछ प्राचीन और क्लासिक स्रोतों की सामग्री शामिल है। कुछ सामग्री को कृत्रिम बुद्धिमत्ता उपकरणों की सहायता से संसाधित, संक्षिप्त या अनुवादित किया गया हो सकता है। हर व्याख्या को बाइबल के पूरे पाठ और उसके संदर्भ के साथ अवश्य जाँचें। यदि आपको कोई त्रुटि या ऐसा अनुवाद मिले जिसे सुधारने की आवश्यकता हो, तो कृपया हमसे संपर्क करें।

भजन संहिता 69:13 समानांतर पद और संबंधित वचन

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यहोवा यह कहता है, “अपनी प्रसन्नता के समय* मैंने तेरी सुन ली, उद्धार करने के दिन मैंने तेरी सहायता की है; मैं तेरी रक्षा करके तुझे लोगों के लिये एक वाचा ठहराऊँगा, ताकि देश को स्थिर करे और उजड़े हुए स्थानों को उनके अधिकारियों के हाथ में दे दे; और बन्दियों से कहे, 'बन्दीगृह से निकल आओ;' (भज. 69:13, 2 कुरि. 6:2)

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क्योंकि वह तो कहता है, “अपनी प्रसन्नता के समय मैंने तेरी सुन ली, और उद्धार के दिन* मैंने तेरी, सहायता की।” देखो; अभी प्रसन्नता का समय है; देखो, अभी उद्धार का दिन है। (यशा. 49:8)

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भजन संहिता 55:16 (HINIRV) »
परन्तु मैं तो परमेश्‍वर को पुकारूँगा; और यहोवा मुझे बचा लेगा।

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