भजन संहिता 69:27 बाइबल पद का अर्थ और पद-दर-पद टीका

उनके अधर्म पर अधर्म बढ़ा; और वे तेरे धर्म को प्राप्त न करें।

भजन संहिता 69:27 पद-दर-पद बाइबल टीका

भजन संहिता 69:27 पर क्या अर्थ निकलता है

पद के अनुरोधं के अनुसार यह कवल लोकाचार के भीतर उन लोगों के बारे में बताता है जो अधर्म के मार्ग पर चलते हैं। पंक्ति बताती है कि उनके अपराध बढ़ते रहते हैं और वे ईश्वर के धर्म को नहीं अपनाते। यह एक कठोर पर स्पष्ट चेतावनी है कि परमेश्वर की पवित्रता के विरुद्ध चलना अंत तक अनदेखा नहीं किया जा सकता।

पद का निकटतम संदर्भ और भू-भूमिका

यह भजनकर्ता की पीड़ा और अन्याय के विरुद्ध रोने का भाग है। संदर्भ में प्रतिकूल समाज और शत्रुओं के दबावों के बीच भजनकार अपनी रक्षा के लिए ईश्वर से सहायता मांगता है। इस क्रम में अधर्म की बढ़ती बेमानी और धर्म के प्रति निरुपयोगी तिरस्कार उभरते हैं, जो उस समय के धार्मिक नेताओं और जनता के चरित्र को भी दर्शाते हैं।

ईश्वर और विश्वास के बारे में पाठ से क्या निकलता है

यह पद दिखाता है कि परमेश्वर हर दिल की चाल देखता है और न्याय के दिन सत्य-सत्यता की परीक्षा होगी। अधर्म के बढ़ते प्रभाव से社会 बिखरता है, परन्तु ईश्वर के धर्म को ठुकराने से मनुष्य अपनी आत्मा के मार्ग से विचलित होता है। यदि लोग धर्म के अनुरूप नहीं चलना चाहते, तो वे न सिर्फ ईश्वर के सामने अन्याय करते हैं, बल्कि अपने(string) समाज की स्थिरता को भी नुकसान पहुंचाते हैं।

महत्वपूर्ण शब्दों के अर्थ

  • — एक निरंतर पतन का चित्र; गलत मार्ग पर वृद्धि और बुराई की गति तेज होना।
  • — ईश्वर के धार्मिक विधान, सत्य, और पवित्र आचरण से विमुख होना; धर्म को स्वीकार नहीं करना।

संबंधित पाठ

1) भजन संहिता 109:7-8— अन्यायपूर्ण व्यक्तियों के लिए न्याय के दिन कसमसाहट और स्थान परिवर्तन की भविष्यवाणी।

2) भजन संहिता 130:3-4— कृपालु धैर्य और क्षमा के साथ, परमेश्वर के उद्धार की आशा।

3) रोमियों 2:8— अधिकार-न्याय के मार्ग से दूर रहने पर ईश्वर का राग डरावना प्रभाव डाल सकता है; धर्म के चिह्नों के साथ भिन्न व्यवहार के नतीजे स्पष्ट होते हैं।

오늘 की जीवन-प्रयोग

आज के संदर्भ में यह पाठ चेतावनी देता है कि नैतिकता और सत्य की दिशा से हटना समाज और आत्मा दोनों के लिए विनाशकारी हो सकता है। सामाजिक दबावों और पूर्वाग्रहों के बीच भी हम उन सिद्धांतों पर ठहरे रहें जो परमेश्वर के अनुसार सही हों: तरफदारी, दया, और सत्य का पालन। विचार करें कि अधर्म के विरुद्ध चुप्पी न बने, बल्कि साहसी नैतिकता और प्रेमपूर्ण सच्चाई से आगे बढ़ना सिखाती है।

कुछ संदर्भ-नोट

यह टिप्पणी Matthew Henry, Albert Barnes और Adam Clarke के सार्वजनिक-डोमेन विचारों से प्रेरित है, पर समेकित रूप से एक संयुक्त व्याख्या के रूप में प्रस्तुत है:

• Henry ने धर्म के कारणों के प्रति समर्पण और न्याय की आवश्यकता पर बल दिया है; • Barnes ने नीतिगत विक्षेप और दुष्कर्म के परिणामों को समझाने की कोशिश की है; • Clarke ने स्पष्ट किया है कि परमेश्वर के नियम से विमुख होना अंततः आत्मा को क्षति पहुंचाता है।

*** इस टीका में सार्वजनिक डोमेन में उपलब्ध कुछ प्राचीन और क्लासिक स्रोतों की सामग्री शामिल है। कुछ सामग्री को कृत्रिम बुद्धिमत्ता उपकरणों की सहायता से संसाधित, संक्षिप्त या अनुवादित किया गया हो सकता है। हर व्याख्या को बाइबल के पूरे पाठ और उसके संदर्भ के साथ अवश्य जाँचें। यदि आपको कोई त्रुटि या ऐसा अनुवाद मिले जिसे सुधारने की आवश्यकता हो, तो कृपया हमसे संपर्क करें।

भजन संहिता 69:27 समानांतर पद और संबंधित वचन

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और जब उन्होंने परमेश्‍वर को पहचानना न चाहा, इसलिए परमेश्‍वर ने भी उन्हें उनके निकम्मे मन पर छोड़ दिया; कि वे अनुचित काम करें।

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और उनका अधर्म तू न ढाँप, और न उनका पाप तेरे सम्मुख से मिटाया जाए; क्योंकि उन्होंने तुझे शहरपनाह बनानेवालों के सामने क्रोध दिलाया है।

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