भजन संहिता 69:24 बाइबल पद का अर्थ और पद-दर-पद टीका

उनके ऊपर अपना रोष भड़का, और तेरे क्रोध की आँच उनको लगे। (प्रका. 16:1)

भजन संहिता 69:24 पद-दर-पद बाइबल टीका

खर्चा: भजन संहिता 69:24 (HINIRV)

मुख्य interpretive बिंदु: इस पद में परमेश्वर की क्रोध और रोष उन लोगों पर प्रकट होता है जो असत्य और विपक्ष के कामों में लगे रहते हैं। भजनकार ने अपनी पीड़ा के माध्यम से परमेश्वर से न्याय की मांग की है, ताकि दुष्टों के कर्मों को उत्पादित परिणाम मिलें और सच्चे विश्वासियों को सुरक्षा मिले। यह पंक्ति प्रभु के क्रोध के वास्तविक, न्यायपूर्ण स्वरूप को दर्शाती है, जो अत्याचारी और पापी के विरुद्ध उठता है, ताकि उद्धार की राह साफ हो सके।

साहित्यिक संदर्भ

भजन 69 एक व्यक्तिगत, दर्दनाक प्रार्थना है जहाँ लेखक अपने शत्रुओं की गतिविधियों के कारण भारी आघात अनुभव कर रहा है और परमेश्वर से सहायता मांगता है। 24वें आयत में क्रोध की आंच “उनके ऊपर अपना रोष भड़का” के रूप में प्रकट होती है—यह एक पवित्र वाक्य है जो दुष्टों के लिए दण्ड के पहले संकेत को दर्शाता है। संदर्भगत शीर्षक में “प्रका. 16:1” का क्रिया-प्रतीक यह दर्शाता है कि परमेश्वर के न्याय के दिन के संकेत पहले से ही उनके आचरण में दिखते हैं।

theological significance

इस आयत के जरिए निष्क्रिय नरम नहीं, बल्कि सक्रिय न्याय का चित्र उभरता है। भजनकार यह चाहता है कि परमेश्वर दुष्टों के कर्मों के परिणाम स्पष्ट करें—क्रोध की आँच वे अनुभव करें ताकि पाप पर विवेक ग्रहण हो और अन्याय के मार्ग पर लगाया गया विश्वास टूटे। साथ ही, यह पंक्ति विश्वासियों को आश्वस्त करती है कि परमेश्वर अत्याचार को अनदेखा नहीं करेगा, बल्कि न्याय की कटोरी उठाकर सत्य को स्थापित करेगा।

cross-references (संलग्न संदर्भ)

  • कन्या/संदिग्धता से निपटना: भजन 37:9-10 — दुष्टों के परिणाम और विश्वासियों के लिएukti, प्रभु के न्याय का समय।
  • याकूब 1:20 संदर्भ — मानव की क्रोध से नहीं, पर ईश्वर की पूर्णता से क्रोध का क्लेम; क्रोध का सही उपयोग कैसे होता है।
  • निर्गमन 34:7 — परमेश्वर दयालु और הऋषिव, परन्तु पापी के विरुद्ध न्यायवान क्रोध प्रकट करता है।

इन संदर्भों के माध्यम से यह स्पष्ट होता है कि परमेश्वर का क्रोध पाप पर न्यायपूर्ण प्रतिक्रिया है, न कि निर्दयता।

चिंतन के प्रश्न

  • आप किन परिस्थितियों में यह अनुभव करते हैं कि अन्याय का स्वर बढ़ रहा था, और कैसे परमेश्वर पर भरोसा बना रहा?
  • क्रोध केवल दण्ड का संकेत है या वह सुधार और उद्धार की दिशा भी दिखाता है?
  • हम अपने शत्रुओं के प्रति कैसे न्यायपूर्ण व्यवहार बनाए रखें, ताकि प्रभु की दृष्टि में सत्य बना रहे?

संक्षिप्त निष्कर्ष

भजन संहिता 69:24 परमेश्वर के न्यायात्मक स्वर को उजागर करता है—जो पाप के विरुद्ध जल्वा उठता है ताकि सत्य स्थापित हो और शास्त्र के अनुसार दुष्टों के कर्मों के परिणाम स्पष्ट हों। भजनकार की पीड़ा, प्रभु की सच्ची करुणा और न्याय की योजना एक साथ मिलकर विश्वासियों को दृढ़ करते हैं कि कठिन समय में भी परमेश्वर न्यायप्रिय है और उद्धार की वाणी शक्ति से प्रभृत है।

पूर्व-लेखक के उद्धरण

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