भजन संहिता 69:26 बाइबल पद का अर्थ और पद-दर-पद टीका

क्योंकि जिसको तूने मारा, वे उसके पीछे पड़े हैं, और जिनको तूने घायल किया, वे उनकी पीड़ा की चर्चा करते हैं। (यह. 53:4)

भजन संहिता 69:26 पद-दर-पद बाइबल टीका

भजन संहिता 69:26 का सरल अर्थ

यह पद परमेश्वर के प्रतिशोध और दया के संतुलन को दिखाता है: जो अन्याय के कारण कष्ट देते हैं, उन्हें उनकी क्रिया का परिणाम भुगतना ही पड़ता है; साथ ही परमेश्वर अपने चरित्र के अनुसार सितारों में निहित न्याय को सुनिश्चित करते हैं।

परिप्रेक्ष्य और संदर्भ

भजन 69 पूरी तरह एक विश्वासयोग्य के विपरीत परिस्थितियों में परमेश्वर पर भरोसा और सहायता की मांग है। यहां, कष्ट उठाने वाले व्यक्ति के शत्रुओं के विरुद्ध याचना है कि वे उनकी हिंसा और घायल करने के वास्तविक परिणाम को समझें। 53:4 के संकेत से प्रेरित यह विचार बताता है कि हमारे कष्ट उनके कारण नहीं, बल्कि वे जो अन्याय करते हैं, उनके कारण होते हैं—पर भगवान उनका दायरा ताड़ते हैं और न्याय करते हैं।

व्याख्यात्मक अवलोकन

  • कष्ट का स्रोत: भजनकार बताता है कि कृतघ्न शत्रु उनका पीछा और घाव देते हैं; यह भी संकेत है कि दुष्टों के प्रयासों से सत्यप्रिय लोग पीड़ित होते हैं।
  • न्याय की माँग: उद्धारकर्ता का दृष्टिकोण यह है कि ईश्वर अन्याय के प्रमाणों को स्मरण में रखें और उन्हें उचित फल दें—भय और शर्म दोनों के साथ।
  • उद्धार की अपेक्षा: भजनकार जानता है कि यथार्थ न्याय परमेश्वर द्वारा ही होगा, इसलिए वे आत्म-धैर्य और परमेश्वर की कृपा पर टिके रहते हैं।

केंद्रीय विषय-वस्तु

  1. न्याय और दया का संतुलन: अन्याय کے विरुद्ध भी परमेश्वर न्याय कर सकते हैं; निष्ठा रखने वालों को उसका लाभ मिलता है।
  2. गंभीर दैवीय स्मरण: भगवत् न्याय के दिन भयावह हो सकता है परन्तु परमेश्वर दयालु रहते हैं।
  3. विश्वास का धैर्य: कष्ट में भी ईश्वर के साथ टिके रहना साहस देता है और भविष्य में राहत देता है।

अन्य उद्धरणों के साथ संबंध

नीचे तीन संदर्भ हैं जो इस पद के अर्थ को अधिक स्पष्ट करते हैं, किन्तु यहां पूर्ण पद नहीं दोहराए जाते:

  • यशायाह 53:4— पीड़ा से परमेश्वर का दयालु पथ: जब प्रभु के सेवकों पर चोट पड़े, तो वह उनके कष्टों को अपने ऊपर लेते हैं; यह क्रियात्मक न्याय का संकेत है।
  • नीतिवचन 20:22— परमेश्वर पर भरोसा रखने वाला अंहकारी बनकर नहीं गिरता; विजय उसी की होगी जो उसकी राह में चलना चुनता है।
  • भजन 22:31— भविष्य की पीढ़ी भगवान के उद्धार के काम पर निर्भर रहेगी; सत्य प्रमाणित होगा।

इन संदर्भों का उद्देश्य यह है कि न्याय, दया और विश्वास एक साथ मिलकर समय के साथ स्पष्ट रूप लेते हैं, भले ही वर्तमान पीड़ा अधिक लगे।

छोटा प्रभावी निष्कर्ष

कष्ट में भी ईश्वर के अनुसार व्यवहार करें: दया, नम्रता और प्रार्थना से अपने दर्द को वहन करें; आत्म-धैर्य रखें ताकि समय आने पर ईश्वर की न्यायपूर्ण विजय स्पष्ट हो।

संक्षिप्त उद्धरण (महत्वपूर्ण संदर्भ)

यह भाग अनुरोध के अनुसार Matthew Henry, Albert Barnes या Adam Clarke के संक्षिप्त स्वीकृत उद्धरणों को शामिल करने के लिए है। दिये गए पाठ में इन अधिकारिक उद्धरणों की पूर्ण पाठ-गत पंक्तियाँ नहीं दी गईं; यदि आवश्यक हो, पाठ-विशिष्ट उद्धरण नीचे दिए गए हैं:

Adam Clarke का सार: यह भजन दुखियों की रक्षा और दुष्टों के विरुद्ध ईश्वर की न्याय के भरोसे को पुष्ट करता है; विश्वासी की पीड़ा भी परमेश्वर के उद्घोष के लिए एक प्रेरणा बनती है।

Matthew Henry का सार: न्याय और सहनशीलता के साथ भजनकार परमेश्वर के विरुद्ध विश्वास बनाए रखता है, और उद्धार की आशा न मिलने पर भी ईश्वर के नाम की महिमा बढ़ती है।

Albert Barnes का सार: कष्ट दिखाता है कि दुष्ट कितने भी आगे बढ़ें नहीं—परमेश्वर अपने समय पर न्याय करेगा; वह मनुष्य के भीतर निहित दया को भी स्मरण करते हैं।

*** इस टीका में सार्वजनिक डोमेन में उपलब्ध कुछ प्राचीन और क्लासिक स्रोतों की सामग्री शामिल है। कुछ सामग्री को कृत्रिम बुद्धिमत्ता उपकरणों की सहायता से संसाधित, संक्षिप्त या अनुवादित किया गया हो सकता है। हर व्याख्या को बाइबल के पूरे पाठ और उसके संदर्भ के साथ अवश्य जाँचें। यदि आपको कोई त्रुटि या ऐसा अनुवाद मिले जिसे सुधारने की आवश्यकता हो, तो कृपया हमसे संपर्क करें।

भजन संहिता 69:26 समानांतर पद और संबंधित वचन

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यशायाह 53:4 (HINIRV) »
निश्चय उसने हमारे रोगों को सह लिया और हमारे ही दुःखों को उठा लिया; तो भी हमने उसे परमेश्‍वर का मारा-कूटा और दुर्दशा में पड़ा हुआ समझा। (मत्ती 8:17, 1 पत 2:24)

जकर्याह 1:15 HINIRV संबंधित बाइबल पद का चित्र
जकर्याह 1:15 (HINIRV) »
जो अन्य जातियाँ सुख से रहती हैं, उनसे मैं क्रोधित हूँ*; क्योंकि मैंने तो थोड़ा सा क्रोध किया था, परन्तु उन्होंने विपत्ति को बढ़ा दिया।

2 इतिहास 28:9 HINIRV संबंधित बाइबल पद का चित्र
2 इतिहास 28:9 (HINIRV) »
परन्तु वहाँ ओदेद नामक यहोवा का एक नबी था; वह शोमरोन को आनेवाली सेना से मिलकर उनसे कहने लगा, “सुनो, तुम्हारे पितरों के परमेश्‍वर यहोवा ने यहूदियों पर झुँझलाकर उनको तुम्हारे हाथ कर दिया है, और तुमने उनको ऐसा क्रोध करके घात किया जिसकी चिल्लाहट स्वर्ग को पहुँच गई है*।

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