Old Testament
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जकर्याह 3:9 बाइबल पद का अर्थ और पद-दर-पद टीका
उस पत्थर को देख जिसे मैंने यहोशू के आगे रखा है, उस एक ही पत्थर के ऊपर सात आँखें बनी हैं, सेनाओं के यहोवा की यह वाणी है, देख मैं उस पत्थर पर खोद देता हूँ, और इस देश के अधर्म को एक ही दिन में दूर कर दूँगा।
जकर्याह 3:9 पद-दर-पद बाइबल टीका
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जकर्याह 3:9 समानांतर पद और संबंधित वचन
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जकर्याह 4:10 (HINIRV) »
क्योंकि किस ने छोटी बातों का दिन तुच्छ जाना है? यहोवा अपनी इन सातों आँखों से सारी पृथ्वी पर दृष्टि करके साहुल को जरुब्बाबेल के हाथ में देखेगा, और आनन्दित होगा।” (नीति. 15:3)

यशायाह 28:16 (HINIRV) »
इसलिए प्रभु यहोवा यह कहता है, “देखो, मैंने सिय्योन में नींव का पत्थर रखा है, एक परखा हुआ पत्थर, कोने का अनमोल और अति दृढ़ नींव के योग्य पत्थर: और जो कोई विश्वास रखे वह उतावली न करेगा। (रोम. 9:33,1 कुरि. 3:11 इफि. 2:20, 1 पत. 2:4,6)

यिर्मयाह 50:20 (HINIRV) »
यहोवा की यह वाणी है, कि उन दिनों में इस्राएल का अधर्म ढूँढ़ने पर भी नहीं मिलेगा, और यहूदा के पाप खोजने पर भी नहीं मिलेंगे; क्योंकि जिन्हें मैं बचाऊँ, उनके पाप भी क्षमा कर दूँगा।
जकरिया 3:9 — पत्थर और दिव्य आशीष का संकेत (HINIRV)
इस पद को जकरियाह nabi के दृश्य-यात्रा में पढ़ने पर, यरूशलेम का पुरोहित येशू-ताड़ (यहोशू) और राज्य-प्रभु आज के समय में धूसर-आशा के बीच खड़े दिखाई देते हैं। परमेश्वर यह कहता है कि वह एक पवित्र पत्थर रख रहा है, जिस पर सात आँखें बनी हैं—यह दिव्य निरीक्षण और पूर्ण अधिकार के प्रतीक हैं। वचन स्पष्ट करते हैं कि अधर्म एक दिन में मिट जाएगा, क्योंकि यह पत्थर परमेश्वर की योजना में आवश्यक क्रिया-उर्जा लेकर आता है।
ईश्वर और विश्वास के बारे में जो पाठ बतलाता है
यहाँ ईश्वर की souverainता (स्वामित्व) और क्षमा-योजना उजागर है। पत्थर का उद्देश्य यह है कि वह पुराने-धर्म के भय और टूटेपन के स्थान पर नयी आस्था का आधार बने। सात आँखें प्रतीक हैं: एकात्म विचार, जागरूकता, और प्रभु के सार्थक लोकतंत्र—यानी परमेश्वर सब कुछ देख रहा है और उसके निर्णय में कोई रोक-टोक नहीं। साथ ही यह एक दिन के भीतर धर्म-हृदय को दूर करने की गारंटी देता है, जो कि क्रियात्मक रूप से उद्धार का पूर्णता-प्रत्यय है।
महत्वपूर्ण शब्दों और चित्रों की व्याख्या
संबंधित पवित्र ग्रंथ
1) यिर्मयाह 31:34 के वादे के साथ प्रेरणा मिलती है कि परमेश्वर अपने लोगों को स्मरण-योग्य और हृदय से जोड़े रखेगा।
2) दानियेल 2:34-45 में पत्थर की मूर्ति के समान एक परमात्मा-राज्य की प्रतिमा मिलती है—जो अस्थिर मानव साम्राज्यों पर विजय पाता है।
3) प्रेरितों के कार्य 3:19-21 में पवित्र-आत्मा से परिवर्तन और विश्वास में पुनःस्थापना का संदेश जुड़ता है।
आज के संदर्भ में आवेदन
- अस्थिर राजनीतिक या सामाजिक धारणाओं के बजाय अपने जीवन की नींव को परमेश्वर के पत्थर पर रखें। जब आप अपने दिल के डर और दोषों को ईश्वर के सामने लाते हैं, तो वह समस्त अधर्म को दूर कर सकता है और एक नई आशा दे सकता है।
- विश्वास के साथ कदम बढ़ाएं: सात आँखों जैसे सतर्क भगवान आपके जीवन की every detail को देख रहा है और सही निर्णय देता है।
संयुक्त विचार
यह उद्धार-दृष्टि हमें एक साथ गूंजाती है कि भगवान की योजना में दोषपूर्ण मानव-योजना का कोई स्थान नहीं है, क्योंकि एक पवित्र पत्थर की उपस्थिति से ही सभी ध्वस्त हो जाते हैं। Matthew Henry, Albert Barnes और Adam Clarke के सार्वजनिक-डायनंपर टिप्पणी-रेखा से प्रेरणा मिलती है कि ईश्वर की पवित्रता और उसकी चटाइयों के समक्ष हमारे अहंकार नहीं टिकते; और अन्ततः उसका राज्य दृढ़ रहता है। “उस पत्थर को देख जिसे मैंने यहोशू के आगे रखा है...” इस वाक्यांश में ईश्वर अपने नये मंदिर-योजनाके लिए एक अचल आधार रचता है।
उद्धरण-रचना (MH/Barnes/Clarke): यदि उपलब्ध हो, तो नीचे संक्षेपित यही पंक्तियाँ उद्धरण-रूप में प्रस्तुत हैं: - Matthew Henry: “...” - Albert Barnes: “...” - Adam Clarke: “...” नोट: उपरोक्त अनुभाग में संक्षेपित उद्धरण सार्वजनिक-डायनामा पर आधारित टिप्पणी-रेखा के अनुरूप हैं; विस्तृत पाठ उद्धृत नहीं किया गया है।