Old Testament
उत्पत्ति निर्गमन लैव्यव्यवस्था गिनती व्यवस्थाविवरण यहोशू न्यायियों रूत 1 शमूएल 2 शमूएल 1 राजाओं 2 राजाओं 1 इतिहास 2 इतिहास एज्रा नहेम्याह एस्तेर अय्यूब भजन संहिता नीतिवचन सभोपदेशक श्रेष्ठगीत यशायाह यिर्मयाह विलापगीत यहेजकेल दानिय्येल होशे योएल आमोस ओबद्याह योना मीका नहूम हबक्कूक सपन्याह हाग्गै जकर्याह मलाकीVerse
विलापगीत 5:1 विलापगीत 5:2 विलापगीत 5:3 विलापगीत 5:4 विलापगीत 5:5 विलापगीत 5:6 विलापगीत 5:7 विलापगीत 5:8 विलापगीत 5:9 विलापगीत 5:10 विलापगीत 5:11 विलापगीत 5:12 विलापगीत 5:13 विलापगीत 5:14 विलापगीत 5:15 विलापगीत 5:16 विलापगीत 5:17 विलापगीत 5:18 विलापगीत 5:19 विलापगीत 5:20 विलापगीत 5:21 विलापगीत 5:22



विलापगीत 5:7 का सहज अर्थ
इस पदांत में कहा गया है कि हमारे पुरखाओं ने पाप किया, और मर मिटे हैं; परन्तु उनके अधर्म के कामों का भार हमको उठाना पड़ा है। सरल शब्दों में यह लोक-व्यथा की पहचान है कि पsaved पीढ़ियाँ अपने पूर्वजों के अधर्मों के कारण वर्तमान पीढ़ी पर जो भार है, वह उसे भूले बिना भी उनके कर्मों के परिणाम स्वरूप आया है। यह भाव-वाचक विवरण चिंता और मानवीय जिम्मेदारी के बीच संतुलन दिखाता है: परिवार-समूह की नाकामियों के कारण आने वाली पीढ़ियाँ कुछ कर्तव्यों के बोझ को अनुभव करती हैं।
पृष्ठभूमि और संदर्भ
विलापगीत एक दुःख-संवेदी कविताब्ध है जहाँ इजराइल के लोग नव-नवोदित बंधन, पतन और पाप के कारण अपने राज्य के पतन के बारे में आंसुओं के साथ चर्चा करते हैं। यह पद, एक चेतावनी के रूप में भी समझा जाता है कि एका-तभी नहीं, बल्कि पीढ़ी-दर-पीढ़ी एक साझा इतिहास और परिणाम बनते हैं। यह उद्धरण यह संकेत करता है कि सामाजिक, पारिवारिक और सामूहिक पाप के कारण आने वाली विपत्तियाँ मानवीय अनुभव का हिस्सा बन जाती हैं; और यह भी कि प्रेरित-न्याय के साथ, दया और उद्धार की अपेक्षा बनी रहती है।
व्याख्यात्मक बिंदु
सूत्रधार पाठ के साथ सम्बन्ध (Cross-references)
1) निर्गमन/निर्भय इतिहास में समय-समय पर कसौटियाँ और दण्ड का विचार: यह संयुक्त विचार शीर्षक में दोनों जगह मिलते हैं—समूह के पाप से आने वाले परिणाम और व्यक्तिगत उत्तरदायित्व।
2) कंगालता और पश्चात्ताप: पवित्र ग्रंथ में बार-बार आग्रह है कि पीढ़ी-दर-पीढ़ी अपने गिरे हुए पापों से पश्चात्ताप करे और परमेश्वर की दया को माँगे।
3) उद्धार और करुणा की आशा: इतिहास के भार से मुक्त होने हेतु ईश्वर की कृपा और उद्धार की आशा बनी रहती है; यह संदेश विलापगीत के दुःख के बीच भी उम्मीद देता है।
अन्तिम निष्कर्ष और व्यवहारिक Takeaway
हम जानते हैं कि इतिहास के भार कभी-कभी आज की स्थितियों में भी स्पष्ट दिखते हैं। इस verses का संदेश यह है कि हमें अपने इतिहास से सीखना है—क्योंकि पाप के परिणाम समाज पर रहते हैं—पर साथ ही हम परमेश्वर की दया और सुधार की कृपा पर भरोसा रखें। व्यक्तिगत स्तर पर: गलतियों की जिम्मेदारी स्वीकार करें, उनके परिणामों से बचने के लिए सत्य और पवित्रता की दिशा में कदम उठाएं, और परिवार-समूह के लिए एक नैतिक वातावरण बनाए रखें।
सूक्त-उद्धरण और टिप्पणी
इस पंक्ति को स्पष्ट करते हुए हेन्ड्री-शैली टिप्पणीकारों का समेकित विचार दर्शाता है कि इतिहास के पन्नों में दया की संभावना भी नष्ट नहीं होती; परन्तु पारिवारिक पाप के भार से पूर्ण बचाव के लिए आस्था और नैतिक चयन आवश्यक है।