Old Testament
उत्पत्ति निर्गमन लैव्यव्यवस्था गिनती व्यवस्थाविवरण यहोशू न्यायियों रूत 1 शमूएल 2 शमूएल 1 राजाओं 2 राजाओं 1 इतिहास 2 इतिहास एज्रा नहेम्याह एस्तेर अय्यूब भजन संहिता नीतिवचन सभोपदेशक श्रेष्ठगीत यशायाह यिर्मयाह विलापगीत यहेजकेल दानिय्येल होशे योएल आमोस ओबद्याह योना मीका नहूम हबक्कूक सपन्याह हाग्गै जकर्याह मलाकीVerse
विलापगीत 5:1 विलापगीत 5:2 विलापगीत 5:3 विलापगीत 5:4 विलापगीत 5:5 विलापगीत 5:6 विलापगीत 5:7 विलापगीत 5:8 विलापगीत 5:9 विलापगीत 5:10 विलापगीत 5:11 विलापगीत 5:12 विलापगीत 5:13 विलापगीत 5:14 विलापगीत 5:15 विलापगीत 5:16 विलापगीत 5:17 विलापगीत 5:18 विलापगीत 5:19 विलापगीत 5:20 विलापगीत 5:21 विलापगीत 5:22



विलापगीत 5:20 पर विचार
यह पाठ विलापगीत की बिखरी हुई रिक्तियों और आहों से भरे अध्यायों में एक गहरी प्रश्नोत्तर ध्वनि प्रस्तुत करता है। मिसाल के तौर पर, यह संसारिक संकटों के बीच मानवता की धड़कन को उभारता है—क्या परमेश्वर हमारी पीड़ा के बीच में नहीं है? इस छोटे-करेब पाठ में यातना के गहराई के बावजूद उम्मीद की चिंगारी भी घायल आत्माओं के लिए बनी रहती है।
पद का संदर्भ और अध्याय के भीतर भूमिका
विलापगीत 5 का यह पंक्ति उन भावनात्मक क्षणों को दर्शाती है जब पाठक अपने अस्तित्व और विश्वास के बीच सवाल उठाते हैं। यह पुस्तक, जो बाबेल के बाद की स्मृतियों से जुड़ी है, दुख की अनुभूति को भाषा के माध्यम से व्यक्त करती है—घोर संकट के समय में भी पूर्व की सभ्यता, सुरक्षा और आशीर्वाद की कमी का अनुभव करती है।
मुख्य आध्यात्मिक पाठ
अन्य बाइबिल तुलनात्मक संदर्भ
यह संदेश कुरआन-उद्धृत नहीं, बल्कि बाइबिल के समानालाप की रस्सी से जुड़ता है:
प्रायोगिक अनुप्रयोग
आप अगर किसी भारी संकट में हैं, तो यह पंक्ति याद दिलाती है कि शिकायत के साथ भी ईश्वर की उपस्थिति की ज़रूरत है। शांत मन से अपनी पीड़ा को प्रस्तुत करें, परन्तु साथ ही यह भी मानें कि विश्वास-यात्रा में चील-सी ऊँचाई संभव है जब हम परमेश्वर के निष्ठापूर्ण मार्ग को आज भी अपनाते हैं।
क्रॉस-रेफरेंसेस और उनके संक्षेप
1) हल्विया की पुस्तक या अन्य विलापगीतों के समान भाव: दुख के समय भी ईश्वर के प्रति सुलह-आह्वान की भूमिका।
2) स्तोत्र 13:1–2 की तरह: भक्तगण पाप या देहकी पीड़ा के बीच भी ईश्वर की सहायता के लिए पुकारते हैं; यह पाठ भी ऐसी अनुभूति का हिस्सा है।
3) याकूब 1:2–4: परीश्रम में धैर्य बनाये रखने की महत्ता एवं चरित्र निर्माण का पाठ।
संक्षेप में निष्कर्ष
विलापगीत 5:20 में एक सरल, पर गहन प्रश्न है—“तूने क्यों हमको सदा के लिये भुला दिया है, और क्यों बहुत काल के लिये हमें छोड़ दिया है?” यह शब्द तत्काल पीड़ा की गहराई को प्रकट करते हैं, पर साथ ही इस अनुभूति से सीख मिलती है कि विश्वास की यात्रा में प्रभु के साथ ईमानदार संवाद और धैर्य एक साथ रहते हैं। यह पाठ हमें याद दिलाता है कि दुःख के बीच भी ईश्वर की देह-सम्बन्धी कृपा के लिए आशा बना रहनी चाहिए और समुदाय के सहारे उद्धार की दिशा मिलती है।
नोट: इस पाठ के लिए मैथ्यू हेनरी, एल्बर्ट बार्न्स और एडाम क्लार्क के सार्वजनिक-डायरेक्ट टिप्पणियों से मिले छोटे उद्धरण स्रोत-रूप में संकेतित किए जा सकते हैं; परन्तु यहाँ हमने मुख्यतः एक समन्वित हिंदी व्याख्या प्रस्तुत की है ताकि पाठक एकीकृत समझ पाएं।