Old Testament
उत्पत्ति निर्गमन लैव्यव्यवस्था गिनती व्यवस्थाविवरण यहोशू न्यायियों रूत 1 शमूएल 2 शमूएल 1 राजाओं 2 राजाओं 1 इतिहास 2 इतिहास एज्रा नहेम्याह एस्तेर अय्यूब भजन संहिता नीतिवचन सभोपदेशक श्रेष्ठगीत यशायाह यिर्मयाह विलापगीत यहेजकेल दानिय्येल होशे योएल आमोस ओबद्याह योना मीका नहूम हबक्कूक सपन्याह हाग्गै जकर्याह मलाकीVerse
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विलापगीत 5:1 का तात्पर्य और व्याख्या
यह पंक्ति विलापगीत के बीच के दुखद स्मरण से उभरती है: परमेश्वर से चाहत है कि स्मरण किया जाए कि दशा कितनी दयनीय है, और हमारी दृष्टि हमारी नामधराई की ओर मोड़ दी जाए। यह उद्घोषणा पाठकों को यह संकेत देता है कि गरिमा से भरी आस्था के साथ ही वास्तविकता की कड़वाहट को स्वीकारना भी आवश्यक है।
ईश्वरीय स्मरण और विश्वास की दृष्टि
विलापगीत के इस अंश में लेखक यह बताता है कि परमेश्वर ध्यान दे रहे हैं—न केवल व्यापक इतिहास के पन्नों पर, बल्कि हर एक व्यक्ति के जीवन में भी। “याद कर” कहना युक्ति है किहमारे कष्टों के बीच भी परमेश्वर की स्मृति सतर्क है। यह न सिर्फ स्मरण की भावना है, बल्कि परिवर्तन के लिए आह्वान भी है: स्मरण से ही हमें अपनी दशा की वास्तविक्ता और बचाव की उम्मीद सूझती है।
महत्वपूर्ण शब्द और चित्र
संदर्भित साक्ष्य: अन्य पाठ
इस भाव के निकट कुछ समकक्ष विचार हमें अन्य भागों में भी मिलते हैं:
2-3 क्रॉस-रेफरेंसेस (संक्षेप)
− पवित्र ग्रंथ के अन्य भागों में दुख के बीच परमेश्वर के स्मरण का महत्व वर्णन है; − उद्धार और दया के मार्ग के संकेत मिलते हैं; − सामुदायिक स्मरण और व्यक्तिगत आस्था का संकेतन मिलता है।
आज की दृष्टि और अनुप्रयोग
आज के पाठक के लिए यह स्पष्ट संकेत है कि कटु अनुभवों के बीच भी हमारा पहला कदम दयालु परमेश्वर के समक्ष नम्रता से प्रार्थना करना है—यह वह क्षण है जब हमें अपनी अस्मिता और स्थिति के बारे में स्पष्ट होना चाहिए और विश्वास के साथ परमेश्वर की स्मृति पर टिकना चाहिए। संतुष्टि तब मिलती है जब हम अपनी ज़रूरतें और असफलताओं को ईश्वर के वादों के साथ जोड़ कर देखते हैं।
संক্ষेप में: गरिमा, स्मरण और भरोसा—ये तीनों मिलकर इस संकट-घड़ी में भी हमारी आस्था को उजागर करते हैं कि परमेश्वर हमारी नामधराई को देखते हैं और हमें फिर से स्थापित करने की योजना रखते हैं।
संक्षिप्त नोट्स
यह पंक्ति पुराने आराधना-गीतों की स्मृति में है; इसका संदेश यह है कि कठिन समय में भी ईश्वर का ध्यान और उद्धार की राह बनती है।
नोट: नीचे उद्धरण नहीं, पर Matthew Henry, Albert Barnes और Adam Clarke के सार्वजनिक-domain पाठों से मिलते-जुलते सार समाहित किया गया है; विशेष रूप से स्मरण और पहचान के संकेतों पर वे प्रकाश डालते हैं।