Old Testament
उत्पत्ति निर्गमन लैव्यव्यवस्था गिनती व्यवस्थाविवरण यहोशू न्यायियों रूत 1 शमूएल 2 शमूएल 1 राजाओं 2 राजाओं 1 इतिहास 2 इतिहास एज्रा नहेम्याह एस्तेर अय्यूब भजन संहिता नीतिवचन सभोपदेशक श्रेष्ठगीत यशायाह यिर्मयाह विलापगीत यहेजकेल दानिय्येल होशे योएल आमोस ओबद्याह योना मीका नहूम हबक्कूक सपन्याह हाग्गै जकर्याह मलाकीVerse
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विलापगीत 4:22 का तत्कालीन सेटिंग और अर्थ
यह पद विलापगीत का अंतरे में आता है जहाँ परमेश्वर की न्याय-सत्यता और दया का संतुलन उभरता है। सिय्योन की पुत्री के लिए दण्ड का समाप्त होना बताता है कि दंड एक समय तक ही सीमित रहता है, और वह समय अब आ चुका है जब दुष्कर्मों का परिणाम अंततः साफ हो गया है। इसके विपरीत एदोम की पुत्री के लिए कहा गया है कि उसका दण्ड वह दे देगा, अर्थात् प्रतिउत्तर रूप से अन्याय का जिम्मेदार-स्वरूप उसकी अपनी भूमि और लोग उजागर होंगे। संक्षेप में, यह घोषणा करती है कि परमेश्वर के न्याय के घड़ी में गलतियों के परिणामियाँ वेक़्त-लघु नहीं रहते और पाप के कारण होने वाला दण्ड सत्यापित रहता है।
यह पाठ परमेश्वर के बारे में क्या बताता है
- परमेश्वर न्याय करता है और साथ ही उसकी दयालुता भी समय-समय पर उद्धार की राह दिखाती है। विलापगीत में यह स्पष्ट है कि दोषी राष्ट्रों के लिए दण्ड निर्धारित है, परन्तु जो प्रत्यक्ष दुष्कर्मियों के विरुद्ध सत्य और दया की मांग करते हैं, उन्हें भी अपना फल मिलता है।
- यह संकेत देता है कि परमेश्वर के उद्देश्य चारों ओर एक ईमानदार चक्र बनाते हैं: दोष की पहचान, दण्ड की(expectation), और अंततः उद्धार या नियत परिणाम।
महत्वपूर्ण शब्दों और imagery की स्पष्टता
- दण्ड समाप्त होना: समय पर न्याय का पूर्ण होना और स्वतंत्र रूप से दयालु गृहण की ओर मोड़ना।
- सिय्योन और एदोम: ये प्रतीकात्मक राष्ट्र-चेतावनियाँ हैं। सिय्योन दाऊदीाई–याजकों के शेत्र की प्रतीक है, जबकि एदोम मानवीय क्रूरता और विश्वासघात के प्रतीक के रूप में प्रतीत होता है।
सम्बंधित बाइबिल पंक्तियाँ (क्रॉस-रेफरेंसेस)
इन क्रॉस-रेफरेंसेस से स्पष्ट होता है कि न्याय और दया एक साथ चलते हैं और पाप के परिणाम समय पर सत्य होते हैं।
आज के लिए व्यावहारिक अनुप्रयोग
- विश्वास में धैर्य रखें: जहाँ दण्ड के पक्ष में चेतावनियाँ हैं, वहीं परमेश्वर की प्रतिग्रहण-धारणा भी उद्धार के अवसर देता है।
- अपने समाज या समाज-स्तर पर अन्याय के विरुद्ध सत्य-न्याय के लिए सजग रहें, किन्तु परमेश्वर के समय-चक्र पर भरोसा रखें।
- अपने पापों के परिणामों को झेलते समय भी आत्म-धैर्य बनाए रखें और हर परिस्थिति में ईश्वर के फिल-नेम के अनुसार चलें।
एक संक्षिप्त एकीकृत टिप्पणी
यह पद सिखाता है कि परमेश्वर के अतुल्य न्याय के अधीन, बुराई के परिणाम स्पष्ट और अंतिम होते हैं, परन्तु दयालुता के मार्ग भी खुले रहते हैं। सिय्योन की समाप्ति से आशा मिलती है कि परमेश्वर अपने चुने हुए लोगों के लिए उद्धार की राह बनाये रखेगा, और एदोम जैसी भूमिका से यह स्पष्ट होता है कि अन्याय के विरुद्ध भी सत्य और न्याय का मूल तना मजबूत रहता है।
कट्टर उपदेशक परिणाम-आधार पर: अर्रिस्ट्टेटेड टिप्पणियाँ—Matthew Henry, Albert Barnes, Adam Clarke—इनमें से जो भी उपलब्ध उद्धरण हों, वे छोटे-छोटे पंक्तियों में लिखे जा सकते हैं, परन्तु यहाँ संक्षेप में उनके विचारों के अनुरूप ही सार दिया गया है।