विलापगीत 4:11 बाइबल पद का अर्थ और पद-दर-पद टीका

यहोवा ने अपनी पूरी जलजलाहट प्रगट की, उसने अपना कोप बहुत ही भड़काया; और सिय्योन में ऐसी आग लगाई जिससे उसकी नींव तक भस्म हो गई है।

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विलापगीत 4:11 पद-दर-पद बाइबल टीका

विलापगीत 4:11 का संदर्भ और पाठ-प्रकाश

तत्काल पाठ-विवरण: यहोवा ने अपनी पूरी जलजलाहट प्रगट की, उसने अपना कोप बहुत ही भड़काया; और सिय्योन में ऐसी आग लगाई जिससे उसकी नींव तक भस्म हो गई है।

पाठ से उद्धृत अर्थ-विन्यास

यह पंक्ति विलापगीत के भयावह प्रभाव को दर्शाती है कि क्यों सिय्योन के निवासियों को परमेश्वर के प्रकोप का भय सताने लगा। यहाँ परमेश्वर का प्रीति-कोप एक साथ दिखाई देता है: दया-पूर्वक आक्रोश। जलजलाहट और आग, जो सिय्योन की नींव तक भस्म कर देती है, धार्मिक अवनति के साथ-साथ सामाजिक-आर्थिक विनाश का प्रतीक है।

क्या सीख देता है परमेश्वर और आस्था?

- परमेश्वर की पवित्रता और न्याय: यहोवा का कोप, पवित्रता के कारण है; दया से परे निष्कर्षण का स्वरूप जिसको सृष्टि के साथ जोड़ा गया है।

- पापकर्म के परिणाम: यह आग सामाजिक ढांचे और नैतिक आधारों को नष्ट करती है, ताकि लोगों को अपनी राह सुधारने का अवसर मिले।

-abant-आस्था और मूल्यांकन: संकट के समय विश्वासियों को आश्रय मिलता है कि परमेश्वर विश्व के राज-नियमों के अनुसार ही कार्य करते हैं और उनकी राह पर चलना ही सच्चे कल्याण का मार्ग है।

शब्दार्थ और दृश्यों की स्पष्टता

- जलजलाहट: परमेश्वर का धधकता क्रोध; आशीर्वाद नहीं, बल्कि पवित्रता के विरुद्ध उठने वाला प्रतिफल।

- कोप: दंडात्मक न्याय का दृढ़ निर्णय; धीरे-धीरे नहीं, दृढ़ और स्पष्ट।

- नींव तक भस्म: सामाजिक-धार्मिक संरचनाओं की क्षय के संकेत—राजनीति, मन्दिर-उत्सव, और नैतिक मूल्यों के टूटने का प्रतिफल।

अन्य पवित्र पाठों से सन्नुक्तियाँ

- न्याय के दिन के संकेत: यहोवा के न्याय के समय, पाप के विरुद्ध क्रोध और उद्धार दोनों एक साथ दिखते हैं (यशायाह 1:24–25; योएल 2:12–13)।

- न्याय और दया का संतुलन: पवित्र शास्त्र सदा एक साथ दया और कटोर न्याय को प्रस्तुत करता है, ताकि हृदय परिवर्तन पूरा हो सके (यिर्मयाह 18:7–8; कौल 3:12–13)।

आज के लिए अनुप्रयोग

  • पाप-प्रेरित घृणा से बचिए: नीतियों, संस्थाओं और सामुदायिक जीवन में ईमानदारी की जांच करें; यदि अवनति के संकेत दिखें, तो अपनी दृष्टि परमेश्वर के मार्ग के अनुसार शुद्ध करें।
  • धार्मिक जीवन में सच्ची पवित्रता: बाहर के धार्मिक कर्मों के बजाय दिल की पवित्रता पर ध्यान दें — मन और कर्म में वही विश्वास दिखे जो परमेश्वर को प्रिय हो।
  • आशा की दृष्टि बनाए रखें: परमेश्वर का न्याय भी उद्धार की राह खोल सकता है; संकट में भी विश्वासी वही सम्वेग बनाए रखें जो उसे निर्भय बनाता है।

संक्षिप्त एकीकृत टिप्पणी

यहोवा का प्रकोप शब्दों में बयान करता है कि पाप मानव समाज के ढांचे को कैसे हिला देता है—नींव तक भस्म कर देना एक चेतावनी है, कि धार्मिक जीवन में सच्ची पवित्रता और उद्धार की दिशा बनाए रखना परमेश्वर के दिल के अनुरूप ही संभव है। इस दृश्य से प्रेरित होकर विश्वासियों को अपने आचरण की फिर-तलाशी में सीख मिलती है: न्याय, दया और पवित्रता का संतुलन बना रहे, ताकि संकट भी परिवर्तन के अवसर बन जाएं।

Cross references: यहोवा के न्याय और उद्धार के संयोग को समझने के लिए मत्ती 3:12; यशाय 55:7; और हबक्कूक 3:2 देखने योग्य हैं।

उद्धरण स्रोत: नीचे उद्धृत अत्यंत छोटे अंश यदि मिलें हों तो शामिल हैं —

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विलापगीत 4:11 समानांतर पद और संबंधित वचन

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इस कारण मैंने उन पर अपना रोष भड़काया और अपनी जलजलाहट की आग से उन्हें भस्म कर दिया है; मैंने उनकी चाल उन्हीं के सिर पर लौटा दी है, परमेश्‍वर यहोवा की यही वाणी है।” (यहे. 11:21, यहे. 9:10)

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अतः प्रभु यहोवा ने यह कहा है, क्या मनुष्य, क्या पशु, क्या मैदान के वृक्ष, क्या भूमि की उपज, उन सब पर जो इस स्थान में हैं, मेरे कोप की आग भड़कने पर है; वह नित्य जलती रहेगी और कभी न बुझेगी।”

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परन्तु यदि तुम मेरी सुनकर विश्राम के दिन को पवित्र न मानो, और उस दिन यरूशलेम के फाटकों से बोझ लिए हुए प्रवेश करते रहो, तो मैं यरूशलेम के फाटकों में आग लगाऊँगा; और उससे यरूशलेम के महल भी भस्म हो जाएँगे और वह आग फिर न बुझेगी।'”

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