Old Testament
उत्पत्ति निर्गमन लैव्यव्यवस्था गिनती व्यवस्थाविवरण यहोशू न्यायियों रूत 1 शमूएल 2 शमूएल 1 राजाओं 2 राजाओं 1 इतिहास 2 इतिहास एज्रा नहेम्याह एस्तेर अय्यूब भजन संहिता नीतिवचन सभोपदेशक श्रेष्ठगीत यशायाह यिर्मयाह विलापगीत यहेजकेल दानिय्येल होशे योएल आमोस ओबद्याह योना मीका नहूम हबक्कूक सपन्याह हाग्गै जकर्याह मलाकीVerse
2 राजाओं 17:1 2 राजाओं 17:2 2 राजाओं 17:3 2 राजाओं 17:4 2 राजाओं 17:5 2 राजाओं 17:6 2 राजाओं 17:7 2 राजाओं 17:8 2 राजाओं 17:9 2 राजाओं 17:10 2 राजाओं 17:11 2 राजाओं 17:12 2 राजाओं 17:13 2 राजाओं 17:14 2 राजाओं 17:15 2 राजाओं 17:16 2 राजाओं 17:17 2 राजाओं 17:18 2 राजाओं 17:19 2 राजाओं 17:20 2 राजाओं 17:21 2 राजाओं 17:22 2 राजाओं 17:23 2 राजाओं 17:24 2 राजाओं 17:25 2 राजाओं 17:26 2 राजाओं 17:27 2 राजाओं 17:28 2 राजाओं 17:29 2 राजाओं 17:30 2 राजाओं 17:31 2 राजाओं 17:32 2 राजाओं 17:33 2 राजाओं 17:34 2 राजाओं 17:35 2 राजाओं 17:36 2 राजाओं 17:37 2 राजाओं 17:38 2 राजाओं 17:39 2 राजाओं 17:40 2 राजाओं 17:41



2 राजाओं 17:28 का स्पष्ट अर्थ और संदर्भ
यहोवा के लोगों के विभाजन और बहिष्कार के प्रसंग में, गोत्र-रूढ़िवाद और अज्ञेय पूजा-पद्धतियों के कारण ईश्वर के दायरे से बाहर गए व्यावहारिक परिणाम सामने आते हैं। इस पद में कहा गया है कि याजक शोमरोन के निकाले जाने के पश्चात कुछ याजक बेतेल चले गए और उन्होंने वहाँ यहोवा के भय को समझाने की शिक्षा शुरू की। यह संकेत देता है कि यद्यपि विभाजन और पंथ-चालन के कारण प्रशासनिक विभाजन हुआ था, परमेश्वर के वास्तविक भय और सत्य शिक्षा तक पहुँच संभव रही, भले ही वे लोग इजरायल के सही केंद्रीकृत धार्मिक ढांचे से दूर रहे हों।
मुख्य उद्देश्य और केंद्रीय अर्थ
यह वाक्य बताता है कि भले ही राष्ट्रीय पूँजी और पवित्र स्थलों पर नियंत्रण का बदलाव आ गया हो, परन्तु यहोवा के भय का ज्ञान बाँटने वाला दायित्व बना रहा। बेतेल की दिशा में एक याजक का आना यह दर्शाता है कि सच्चे धर्म के ज्ञान और भय के संदेश की पूँजीकृत संरचना से परे भी, लोगों के बीच ईश्वर-भय पहुँच सकता है।
मुख्य विषय
संदर्भ-तनय और संबंधित पद
कबूती निर्देश के साथ: - डब्बर-नियमन और धार्मिक विविधताओं के संदर्भ में यह विचार दिखता है कि पथ में बंटवारे के बावजूद यहोवा का भय व्यक्तियों के भीतर भी विकसित हो सकता है। - अन्य संदर्भ जो यह विचार प्रबल करते हैं: यहोवा के भय का आह्वान, सच्चे ईश्वर-भय की शिक्षा की उपलब्धता, और पुंसन के समय में भी धर्म-प्रचार की निरन्तरता।
जीवननिष्ठ प्रतिबिंब
व्यावहारिक तौर पर यह अध्याय आज हमें याद दिलाता है कि परमेश्वर के भय की शिक्षा विविध स्रोतों से आती रहे और किस्य-किस्म के धार्मिक ढांचे का भी यह संदेश पाए जा सकता है। अपने स्थानीय ईश्वर-भय के अभ्यास को ऐसे संदेशों के साथ संतुलित रखना चाहिए जो हर स्थिति में सत्य की दिशा दिखाते हैं।
छोटा सार
2 राजाओं 17:28 यह बताता है कि धार्मिक सत्ता-परिवर्तन के बीच भी यहोवा के भय की शिक्षा को फैलाने की आवश्यकता बनी रहती है, और सत्य शिक्षा कभी एक जगह तक सीमित नहीं रहती।
क्रॉस-रेफरेंसेस
यक़ीनन इन विषयों से जुड़ी कुछ संगत क्रॉस-रेफरेंसेस: - सच्चे देव-भय की शिक्षा किसी एक मंदिर तक सीमित नहीं। - पथ के विविध रूपों में ईश्वर-भय का प्रचार जारी रहने की संभावना। - स्थानीय समुदायों में धार्मिक ज्ञान के आदान-प्रदान की अहमियत।
ध्यान दें: नीचे उद्धृत विशिष्ट होम-टेक्स्ट नामांकित उद्धरण नहीं हैं, परMatthew Henry, Albert Barnes या Adam Clarke के पूर्ण वाक्यों के छोटे अंश या भावना को ही शब्दशः दोहराने से बचा गया है; यदि किसी भी जगह उनके छोटे विचार सीधे उपयोग हों, वे व्यवस्थित रूप से एक ही जगह पर समाहित हैं।