2 राजाओं 17:32 बाइबल पद का अर्थ और पद-दर-पद टीका

यों वे यहोवा का भय मानते तो थे, परन्तु सब प्रकार के लोगों में से ऊँचे स्थानों के याजक भी ठहरा देते थे, जो ऊँचे स्थानों के भवनों में उनके लिये बलि करते थे।

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2 राजाओं 17:32 पद-दर-पद बाइबल टीका

2 राजा 17:32 — संदर्भ-संयोजन और टिप्पणी

परिस्थितिः यह hoofdstava माउंटिंग संहार के समय के समीप का है, जब राज्य इजराइल पर हर एक न्यायबहाल संस्था टूट-फूट रही थी। उसी दौर में वहाँ के लोग यहोवा का भय मानते थे, परन्तु इस भय के साथ अनेक दूसरे आचार-व्यवहार भी बने रहते थे। यहोवा के भय के साथ ऊँचे स्थानों के याजकों की भी प्रथा कायम थी, जो वे मिसाल के अनुसार ऊँचे स्थानों के भवनों में बलि-प्रदर्शन करते थे।

पाठ-विवेचन: परमेश्वर का भय बनाम आस्थागत अनियमितता

यह वाक्य स्पष्ट करता है कि यहूदियों के बीच धर्म-विश्वास का एक मिश्रण बना हुआ था। लोग यहोवा को मानते थे, परन्तु उन पर अन्य रीति-रिवाजों और पवित्र स्थानों की आस्था का बाहरी प्रभाव भी गहरा था। ऊँचे स्थानों के याजक जो बाहरी कर्तव्य निभाते थे, उनका प्रभाव यह दर्शाता है कि पूजा-प्रणालियाँ कितनी जटिल और विरोधाभासी रूप ले सकती थीं जब एक राष्ट्र में आध्यात्मिक नेतृत्व ढीला पड़ता है।

शब्दार्थ और चित्र (की-वर्ड्स)

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याजक का उच्च स्थानों में होना पूजा-प्रणालियों की विविधता को दर्शाता है — यह बताता है कि आस्था एक एकीकृत व्यवस्था के बजाय पवित्रता के मानक में विखराव भी दिखा सकती है।

अनुरोधित क्रॉस-रेफरेंसेस और उनके अर्थ

1) विपरीत उदाहरण: यहोवा के भय के साथ एकाग्रता का संयोजन — प्रेरित करने वाला पाठ दिखाता है कि केवल भय से हीधर्म की सफलता नहीं मिलती।

2) बाहरी धार्मिक-प्रथाओं से पवित्रता का निर्णयन: वास्तविक भक्ति हृदय की एक obedientता से जुड़ी होती है।

3) नीति और धर्म का संतुलन: यह बताता है कि आंतरिक सत्य के अभाव में बाहरी कृतियाँ असफल हो सकती हैं।

मौजूदा संदर्भ और नीति-प्रयोग

आज के पाठकों के लिए यह स्मरण कराता है कि हमारे विश्वासी जीवन में केवल सतह की आस्था नहीं चलेगी; हमारी पूजा, प्रार्थना और जीवन-चर्या में एक समग्रता और एकता होनी चाहिए—यानी एकात्मता और नैतिकता का पालन। यहोवा के भय को बनाए रखते हुए हमारे आध्यात्मिक जीवन में निरंतर अनुशासन, ईमानदारी और सच्चे मन से worship की आवश्यकता है।

कथा-आधार पर कुछ विचार

मैथ्यू हेनरी, ऐल्बर्ट बार्न्स और एडम क्लार्क के प्रामाणिक विचारों के संक्षिप्त संयोजन से यह निष्कर्ष निकलता है कि बाह्य प्रथाओं के साथ हृदय की सच्ची भक्ति सबसे अहम है।

उद्धरण (संक्षेप):

“यही वह समय है जब शिक्षा और चेतना दोनों साथ चलते हैं; यदि भय सिर्फ दिखावे के लिए है, तब ईश्वर के साथ वास्तविक जुड़ाव नहीं बनता।”

उद्धरण का स्पष्ट पाठ नहीं दिया गया है ताकि कॉपीराइट-स्वतंत्रता के दायरे में संरक्षित रहे; प्रकाशित विचारों में ये निष्कर्ष प्रकाशित क्षेत्रों के समान ही समझे जाएँगे।

संक्षिप्त निष्कर्ष

2 राजाओं 17:32 इस बात पर केंद्रित है कि यद्यपि लोग यहोवा का भय मानते थे, तब भी वे धार्मिक व्यवस्था में अव्यवस्थित थे—ऊँचे स्थानों के याजक और बाह्य कर्मों की प्रथा के कारण। यह संदेश आज भी यह कहता है कि वास्तविक भक्ति एक हृदय-संयम, एक निष्ठा और पूर्ण समर्पण से होती है, न कि केवल दिखावे या बाहरी रीतियों से।

*** इस टीका में सार्वजनिक डोमेन में उपलब्ध कुछ प्राचीन और क्लासिक स्रोतों की सामग्री शामिल है। कुछ सामग्री को कृत्रिम बुद्धिमत्ता उपकरणों की सहायता से संसाधित, संक्षिप्त या अनुवादित किया गया हो सकता है। हर व्याख्या को बाइबल के पूरे पाठ और उसके संदर्भ के साथ अवश्य जाँचें। यदि आपको कोई त्रुटि या ऐसा अनुवाद मिले जिसे सुधारने की आवश्यकता हो, तो कृपया हमसे संपर्क करें।

2 राजाओं 17:32 समानांतर पद और संबंधित वचन

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1 राजाओं 12:31 HINIRV संबंधित बाइबल पद का चित्र
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और उसने ऊँचे स्थानों के भवन बनाए, और सब प्रकार के लोगों में से जो लेवीवंशी न थे, याजक ठहराए।

2 राजाओं 17:29 HINIRV संबंधित बाइबल पद का चित्र
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तो भी एक-एक जाति के लोगों ने अपने-अपने निज देवता बनाकर, अपने-अपने बसाए हुए नगर में उन ऊँचे स्थानों के भवनों में रखा जो शोमरोनवासियों ने बनाए थे।

1 राजाओं 13:33 HINIRV संबंधित बाइबल पद का चित्र
1 राजाओं 13:33 (HINIRV) »
इसके बाद यारोबाम अपनी बुरी चाल से न फिरा। उसने फिर सब प्रकार के लोगों में से ऊँचे स्थानों के याजक बनाए, वरन् जो कोई चाहता था, उसका संस्कार करके, वह उसको ऊँचे स्थानों का याजक होने को ठहरा देता था।

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