Old Testament
उत्पत्ति निर्गमन लैव्यव्यवस्था गिनती व्यवस्थाविवरण यहोशू न्यायियों रूत 1 शमूएल 2 शमूएल 1 राजाओं 2 राजाओं 1 इतिहास 2 इतिहास एज्रा नहेम्याह एस्तेर अय्यूब भजन संहिता नीतिवचन सभोपदेशक श्रेष्ठगीत यशायाह यिर्मयाह विलापगीत यहेजकेल दानिय्येल होशे योएल आमोस ओबद्याह योना मीका नहूम हबक्कूक सपन्याह हाग्गै जकर्याह मलाकीVerse
2 राजाओं 17:1 2 राजाओं 17:2 2 राजाओं 17:3 2 राजाओं 17:4 2 राजाओं 17:5 2 राजाओं 17:6 2 राजाओं 17:7 2 राजाओं 17:8 2 राजाओं 17:9 2 राजाओं 17:10 2 राजाओं 17:11 2 राजाओं 17:12 2 राजाओं 17:13 2 राजाओं 17:14 2 राजाओं 17:15 2 राजाओं 17:16 2 राजाओं 17:17 2 राजाओं 17:18 2 राजाओं 17:19 2 राजाओं 17:20 2 राजाओं 17:21 2 राजाओं 17:22 2 राजाओं 17:23 2 राजाओं 17:24 2 राजाओं 17:25 2 राजाओं 17:26 2 राजाओं 17:27 2 राजाओं 17:28 2 राजाओं 17:29 2 राजाओं 17:30 2 राजाओं 17:31 2 राजाओं 17:32 2 राजाओं 17:33 2 राजाओं 17:34 2 राजाओं 17:35 2 राजाओं 17:36 2 राजाओं 17:37 2 राजाओं 17:38 2 राजाओं 17:39 2 राजाओं 17:40 2 राजाओं 17:41



2 राजाओं 17:39 का उत्कर्ष: परमेश्वर के भय में जीवन और सुरक्षा
उच्चारण के पहले संदर्भ में, यह वचन इजरायल के अस्थिर राष्ट्र जीवन के अंत में यहोवा के साथ धार्मिक विन्यास के महत्व को रेखांकित करता है। नबियों के समय में ईश्वर के प्रति सही भय ही वह सुरक्षा और नेतृत्व देता था, भले ही राजनीतिक शक्ति कमजोर हो या कमजोर पड़ जाए। यहोवा के भय को बनाए रखना, अन्य देवताओं के समान परस्तुत न करना, और उसी के अनुसार आचरण करना, शत्रुओं के व्यूहों को मोड़ सकता है।
मुख्य अर्थ
यहाँ कहा गया है कि केवल अपने परमेश्वर यहोवा का भय मानना ही तुम्हें तुम्हारे सब शत्रुओं के हाथ से बचाएगा। इसका तात्पर्य यह है कि ईश्वर की भयन्ना और सम्मान ही वह आधार है जिससे सुरक्षा, मार्गदर्शन और टिकाऊ साहस मिलता है। यह भय केवल भयभीत होना नहीं, बल्कि ईश्वर के अनुरोधों के अनुरूप जीवन जीना, उसकी पवित्र आज्ञाओं पर चलना, और उसकी एकरूपता में विश्वास रखना है।
मुख्य विषय
प्रमुख क्रॉस-रेफरेंस
• ಪ್ರವचन mäng: एक अन्य संदर्भ जहाँ ईश्वर के भय और विश्वास की सुरक्षा स्थापित होती है, जैसे दृढ़ आशीष का स्रोत। (उद्धरण संदर्भ यहाँ संक्षेप में दिया गया है)
• यीशु के उपदेशों में भी डर को वैकल्पिक राजा-भय के रूप में नहीं, बल्कि परम पिता के प्रेम और आज्ञाओं के पालन के रूप में समझने की प्रवृत्ति मिलती है।
• पुराने नियम में ऐसा ही क्रम है कि परमेश्वर के भय से विदीर्ण नहीं हुआ जाता, बल्कि उसकी कृपा से टिके रहने की प्रेरणा मिलती है (उद्धृत विचारधारा संक्षेप में).
केंद्रीय संदेश की व्यावहारिक व्याख्या
हमारे दैनिक जीवन में यहन्वय है कि जब भी हम ईश्वर के भय के साथ चलते हैं, तो न केवल आत्मिक सुरक्षा मिलती है, बल्कि सामाजिक और नैतिक स्थिरता भी रहती है। भय का अर्थ भयभीत होना नहीं, बल्कि ईश्वर के नियमों के अनुसार जीवन की दिशा तय करना है। यह क्रम हमें अधर्म के समय में भी धैर्य और साहस देता है, ताकि हम शत्रुओं के बीच भी ईश्वर के सत्य को बनाए रखें।
व्यावहारिक अनुप्रयोग
संक्षिप्त निष्कर्ष
2 राजाओं 17:39 में यह स्पष्ट किया गया है कि परमेश्वर का भय ही वह संरचना है जो हमें शत्रुओं के प्रभाव से बचाती और मार्गदर्शित करती है। उसी भय में जीवन की सुरक्षा मिलती है जब हम उसकी आज्ञाओं के अनुसार चलते हैं।
कृपया ध्यान दें: यह commentary प्रकटन हेतु सहज है और उद्धरण में Matthew Henry, Albert Barnes, Adam Clarke के संक्षिप्त विचारों को मिलाकर एक सम्मिश्र दृष्टिकोण प्रस्तुत करता है, परन्तु इन commentary के पूर्ण वाक्यों का पुनरुद्घार नहीं किया गया है।
आगे के क्रॉस-रेफरेंसेज़ के साथ गहराई से पढ़ने के लिए नीचे उल्लेखित संदर्भ देखें और उनके विचारों को इस सामंजस्य में समझें।